Women Bone Health Problems: महिलाओं को सबसे ज्यादा होते हैं 5 हड्डी रोग, रूमेटॉइड अर्थराइटिस से लेकर स्ट्रेस फ्रैक्चर के नाम हैं शामिल

 

रूमेटॉइड अर्थराइटिस से लेकर स्ट्रेस फ्रैक्टर के नाम आपने काफी बार सुने होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस तरह की 5 हड्डियों से जुड़ी समस्याएं महिलाओं में ज्यादा दिखती हैं। डॉ. गौरव भारद्वाज ने बताया कि इसके पीछे हार्मोनल इम्बैलेंस से लेकर न्यूट्रिशन पर ध्यान न देना जैसे कारण छिपे हैं।

Bone Health Problems That Majorly Impact Women
लेख में इस्तेमाल की गईं सभी तस्वीरें सांकेतिक हैं
हड्डियों से जुड़े रोग या समस्याएं वैसे तो किसी को भी हो सकती हैं, लेकिन इस बात से ज्यादातर लोग अनजान रहते हैं कि ऐसी भी समस्याएं हैं, जो महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा होती हैं। इनमें ऑस्टियोपोरोसिस, ऑस्टियोपीनिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस, स्ट्रेस फ्रैक्चर आदि शामिल हैं। इनकी वजह हार्मोनल चेंज से लेकर विटामिन-डी की कमी, अनहेल्दी लाइफस्टाइल जैसे कारण हो सकते हैं।

महिलाओं को क्यों है ज्यादा खतरा?
शरीर को अगर स्वस्थ और ताकतवर बनाए रखना है और चाहते हैं कि बढ़ती उम्र में भी मोबिलिटी अच्छी बनी रहे, तो इसके लिए हड्डियों का हेल्दी बने रहना जरूरी है। महिलाओं के मामले में ये चीज और अहम हो जाती है, क्योंकि कई ऐसे फैक्टर्स हैं, जो उनकी हड्डियों को कमजोर करने का काम करते हैं। इन कारणों में प्रेग्नेंसी, बढ़ती उम्र, पोषण में कमी और लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें शामिल हैं।
वहीं हार्मोनल इम्बैलेंस खासतौर से मेनोपॉज स्टेज महिलाओं की हड्डियों की सेहत को बिगाड़ने वाला सबसे बड़ा फैक्टर है। दरअसल, इस दौरान पीरियड्स बंद होने पर फीमेल बॉडी में एस्ट्रोजन का लेवल गिर जाता है। इस वजह से मांसपेशियों और हड्डियों में कमजोरी आने लगती है और इनसे संबंधित कुछ विशेष समस्याओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

ऑस्टियोपोरोसिस

ऑस्टियोपोरोसिस

महिलाओं को होने वाली हड्डियों से जुड़ी सबसे आम बीमारियों में ऑस्टियोपोरोसिस शामिल है। ये खासकर मेनोपॉज के बाद उन्हें जकड़ती है। इसके होने पर हड्डियों कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं। इस वजह से मामूली चोट लगने या गिरने पर भी हड्डी टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
लक्षण: ऑस्टियोपोरोसिस अक्सर बिना किसी लक्षण के चुपचाप बढ़ता है और किसी चोट व हड्डी टूट जाने जैसी स्थिति में पकड़ में आता है। हालांकि, शुरुआती लक्षणों में कमर, जोड़ों में दर्द, सूजन आदि शामिल हैं।
कारण: मेनोपॉज या प्रेग्नेंसी के चलते एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट इसका मुख्य कारण हैं। वहीं कैल्शियम-विटामिन डी में कमी भी इसके जोखिम को बढ़ाती है। इनके अलावा सेडेंटरी लाइफस्टाइल और फैमिली में ऑस्टियोपोरोसिस की हिस्ट्री होना भी महिलाओं में इस समस्या को जन्म देते हैं।
बचाव: कैल्शियम और विटामिन डी सप्लीमेंट लेना, रेग्युलर वॉकिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, धूम्रपान और शराब से दूर रहना जैसी चीजें जोखिम को कम करने में मददगार हैं। साथ ही महिलाओं को समय-समय पर बोन डेंसिटी टेस्ट करवाते रहने की भी सलाह दी जाती है।

ऑस्टियोपीनिया

ऑस्टियोपीनिया

ऑस्टियोपीनिया को ऑस्टियोपोरोसिस से पहले की स्थिति माना जाता है। ये एक तरह से हड्डियों में कमजोरी होने का शुरुआती चरण है। इस स्थिति में बोन मिनरल डेंसिटी कम हो जाती है।

  • लक्षण:आमतौर पर इसके कोई खास लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। इस वजह से समय-समय पर टेस्ट करवाना महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर ऑस्टियोपीनिया, ऑस्टियोपोरोसिस में बदल सकता है।
  • कारण: उम्र के साथ हड्डियों के घनत्व में आने वाली गिरावट, हार्मोनल असंतुलन, अनहेल्दी लाइफस्टाइल इसके कारण हो सकते हैं।
  • बचाव: कैल्शियम रिच फूड लेना, विटामिन डी के लेवल को बनाए रखना, बोन फोकस्ड एक्सरसाइज करना, धूम्रपान और शराब से दूरी।

ऑस्टियोआर्थराइटिस

ऑस्टियोआर्थराइटिस

ये वो समस्या है, जो आमतौर पर 40 की उम्र से ऊपर की महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस तब होता है, जब कार्टिलेज धीरे-धीरे घिस जाती है और जोड़ों पर घर्षण का तनाव ज्यादा पड़ने लगता है, जिससे जोड़ों में दर्द, अकड़न और सूजन बने रहने की समस्या आ जाती है। गंभीर मामलों में सर्जरी करवाने तक की नौबत आ सकती है।

  • लक्षण: हाथ, घुटने, कूल्हे और रीढ़ की हड्डी में दर्द, अकड़न या सूजन, इस बीमारी के संकेत हो सकते हैं। इससे हिलने-डुलने और चलने जैसे आम बॉडी मूवमेंट्स में भी मुश्किल महसूस हो सकती है।
  • कारण: बढ़ती उम्र, ओबेसिटी, पुरानी चोट, इन्फ्लेमेशन और जेनेटिक्स इसके कारणों में शामिल हैं।
  • बचाव: वेट कंट्रोल, रेग्युलर एक्सरसाइज, पोस्चर करेक्शन और हेल्दी लाइफस्टाइल एंड डाइट इससे बचने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

रूमेटॉइड अर्थराइटिस

रूमेटॉइड अर्थराइटिस

रूमेटॉइड अर्थराइटिस पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होता है। ये डिसऑर्डर तब होता है, जब इम्यून सिस्टम गलती से जोड़ों की परत पर ही हमला करने लग जाता है।अगर इसका समय रहते इलाज न किया जाए, तो जोड़ों का आकार बिगड़ सकता है। इस स्थिति के लंबे समय तक बने रहने पर विकलांगता भी हो सकती है। यही वजह है कि इसका शुरुआती स्टेज में पता लगना काफी अहम है।

  • लक्षण: हाथ-पैरों के जोड़ों में दर्द, जॉइंट्स के आसपास सूजन या लालिमा, जकड़न महसूस होना, जोड़ों के आसपास की जगह का आकार बदलना और इन्फ्लेमेशन इसके मुख्य लक्षण हैं।
  • कारण: इसकी मुख्य वजह पूरी तरह से मालूम नहीं चल सकी है। हालांकि जेनेटिक्स और एन्वायरमेंटल फैक्टर्स को इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जाता है।
  • बचाव: रेग्युलर एक्सरसाइज, स्ट्रेस मैनेजमेंट, वेट कंट्रोल और विटामिन-डी और कैल्शियम रिच डाइट जैसी चीजें रूमेटॉइड अर्थराइटिस से बचाव में सहायता कर सकती हैं।

स्ट्रेस फ्रैक्चर

स्ट्रेस फ्रैक्चर

इस स्थिति में हड्डियों में छोटी-छोटी दरारें आने लगती हैं। ये उन महिलाओं में ज्यादा आम है, जो लगातार हाई-इम्पैक्ट फिजिकल एक्टिविटीज करती हैं, और अपने पोषण व पर्याप्त आराम का ख्याल नहीं रखतीं। स्ट्रेस फ्रैक्चर आमतौर पर फीट, एंकल्स और लोअर लेग्स में होते हैं।

  • लक्षण: इसका सबसे सामान्य लक्षण किसी एक हिस्से में होने वाला दर्द है, जो एक्सरसाइज या अन्य प्रकार की फिजिकल एक्टिविटी के दौरान बढ़ जाता है। वहीं आराम करने पर इसमें राहत महसूस होने लगती है।
  • कारण: हेवी और हाई इम्फैक्ट एक्सरसाइज, शरीर को पर्याप्त आराम न देना, गलत शू सिलेक्शन, गलत ट्रेनिंग टेक्नीक, हार्ट सरफेस पर ज्यादा एक्टिविटी, लो न्यूट्रिशन लेवल आदि।
  • बचाव: एक्सरसाइज का बैलेंस्ड रूटीन, पोषण से भरा आहार और वर्कआउट्स के बीच में पर्याप्त अंतर रखना ताकि शरीर आराम कर सके, स्ट्रेस फ्रैक्चर से बचा सकता है।

    महिलाओं में विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी बेहद आम है। उम्र के साथ इनकी कमी और हड्डियों के घटते घनत्व के चलते उन्हें कई समस्याएं घेर लेती हैं। ऐसे में न्यूट्रिशन से भरी डाइट, हेल्दी लाइफस्टाइल और प्रॉपर फिजिकल एक्टिविटी को डेली लाइफ में शामिल करना अहम है।साथ ही समय-समय पर टेस्ट करवाते रहना भी जरूरी है। आमतौर पर महिलाएं हड्डियों या जोड़ों के दर्द को इग्नोर कर देती हैं, लेकिन बेहतर यही है कि एक्सपर्ट को दिखाकर,सुझाए गए टेस्ट करवा लिए जाएं, ताकि सही सलाह पर अमल कर गंभीर परिणामों से बचा जा सके।

Comments