Hantavirus Outbreak On Cruise Ship: क्या है हंता वायरस जिससे अब तक जा चुकी है 3 लोगों की जान; बुखार, सिरदर्द, उल्टी है लक्षणों में शामिल

 

लग्जरी शिप MV Hondius पर हंता वायरस के मामले पाए जाने की सूचना ने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन को सकते में ला दिया है। क्रू मेंबर्स और यात्रियों की लगातार जांचें की जा रही हैं। 4 मई तक इस वायरस से तीन जानें जा चुकी हैं। लेकिन आखिर ये हंता वायरस है क्या और कैसे ये जानलेवा बन जाता है?

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लेख में इस्तेमाल की गईं तस्वीरें सांकेतिक हैं
अटलांटिक महासागर की ट्रिप के लिए 147 यात्रियों और क्रू मेंबर्स को लेकर निकले लग्जरी क्रूज शिप MV Hondius में हंता वायरस के केस पाए गए हैं। WHO के मुताबिक, अब तक इसके संक्रमण के चलते तीन लोगों की जान जा चुकी है। प्रभावित लोगों में बुखार, पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएं, निमोनिया का तेजी से फैलना और एक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम एंड शॉक जैसे लक्षण पाए गए हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, फिलहाल क्रूज पर ही प्रभावित लोगों को आइसोलेट कर उनका इलाज किया जा रहा है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये मनुष्यों तक पहुंचा कैसे?


आखिर क्या है हंता वायरस?

मनुष्यों में हंता वायरस तब पहुंचता है, जब व्यक्ति प्रभावित रोडन्ट (चूहे, गिलहरी जैसे कुतरने वाले जीव) के पेशाब, अपशिष्ट या थूक के संपर्क में आता है। एक से दूसरे मनुष्य में इस वायरस के पहुंचने के मामले बहुत ही कम पाए गए हैं। इसका सबसे पहला केस साल 1996 में सामने आया था। जांच पर खुलासा हुआ था कि इसकी वजह हंता वायरस के एक प्रकार एंडीज वायरस का फैलना था। यही वो स्पीशीज है, जो मनुष्यों से मनुष्यों में संक्रमण को पहुंचाने का काम करती है। फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है कि आखिर क्रूज पर इस वायरस के फैलने का जरिया क्या रहा।




हंता वायरस से जुड़े सिन्ड्रोम और लक्षण

सीडीसी के अनुसार, हंता वायरस से मुख्य रूप से दो तरह के सिन्ड्रोम होते हैं: हंता वायरस पल्मोनरी सिन्ड्रोम और हेमोरेजिक फीवर विद रेनल सिन्ड्रोम। इन दोनों के ही शरीर में अलग-अलग तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। आमतौर पर एचपीएस के लक्षण वायरस के संपर्क में आने के दो से चार सप्ताह के बीच में नजर आते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में ये एक सप्ताह में ही या आठ सप्ताह बाद भी सामने उभरकर आ सकते हैं।


हंता वायरस पल्मोनरी सिन्ड्रोम (HPS) के लक्षण

ये हंता वायरस का गंभीर और जानलेवा रूप है, जो फेफड़ों को मुख्य रूप से प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में:

  • थकान
  • बुखार
  • मसल्स में दर्द
  • सिरदर्द
  • चक्कर आना
  • ठंड लगना
  • पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे- उल्टी, डायरिया, दर्द आदि शामिल हैं।
प्रभावित व्यक्ति में 10 दिन के बाद लक्षण गंभीर रूप लेने लगते हैं। उसे खांसी बने रहने के साथ ही सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। फेफड़ों में पानी भरने पर उन्हें सीने में जकड़न का अनुभव हो सकता है। HPS से प्रभावित करीब 38% लोग रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी जटिलताओं की चपेट में आने के कारण अपनी जान गंवा सकते हैं।


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हंता वायरस के लक्षण

हेमोरेजिक फीवर विद रेनल सिन्ड्रोम (HFRS) के लक्षण

ये हंता वायरस का गंभीर और जानलेवा रूप है, जो किडनी को भी प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में:

  • तेज सिरदर्द
  • पीठे और पेट में दर्द
  • बुखार आना या ठंड लगना
  • मतली
  • आंखों में धुंधलापन आना
  • चेहरे, आंखों व शरीर पर लालिमा या रैश आना
  • लो ब्लड प्रेशर
  • ब्लड फ्लो का प्रभावित होना (एक्यूट शॉक)
  • इंटरनल ब्लीडिंग होना (वस्क्युलर लीकेज)
  • किडनी फेल होना आदि शामिल हैं।
HFRS के हंतान और डोब्रावा वायरस के संक्रमण में आने पर सबसे ज्यादा गंभीर लक्षण पैदा होते हैं, जिस वजह से इससे प्रभावित 5 से 15 प्रतिशत लोगों की मृत्यु हो सकती है।


हंता वायरस के उपचार का तरीका

दुखद ये है कि इस वायरस का अब तक कोई एक तय उपचार ईजाद नहीं हो सका है। प्रभावित व्यक्ति को सपोर्टिव केयर के रूप में वायरस से उपजे लक्षणों का ट्रीटमेंट दिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें आराम करने और हाइड्रेट रहने की सलाह दी जाती है।

इस वायरस से लंग्स के प्रभावित होने पर व्यक्ति के लिए सांस लेना मुश्किल हो सकता है, जिससे उसे इंट्यूबेशन जैसे ब्रीदिंग सपोर्ट देने की जरूरत पड़ सकती है। वहीं किडनी के प्रभावित होने पर मरीज को डायलिसिस सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है, ताकि शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स को बाहर निकाला जा सके।

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