कान का मैल साफ क्यों न करें डॉक्टर राजेश ने समझाया, साथ ही बताया इरिगेशन और सक्शन से कैसे होती है सफाई
कान का मैल साफ करने के लिए कोई तेल डालता है, कोई पिन का इस्तेमाल करता है तो कोई ईयर बड्स का, लेकिन सच तो ये है कि ये सभी चीजें असल में नुकसान पहुंचाने का काम करती हैं। डॉ. राजेश भारद्वाज की मानें तो ईयर वैक्स को तो कैनाल में रहने देना चाहिए। और नहाते समय सिर्फ बाहरी हिस्से को कपड़े से क्लीन करना चाहिए।

मैल जमे रहने देना है अच्छा, समझें क्यों?
कान के मैल को मेडिकल भाषा में सेरुमेन कहा जाता है और ये एंटीबैक्टरीयल और एंटीफंगल प्रॉपर्टीज लिए होता है। इसे ईयर कैनाल में मौजूद ग्रंथियां बनाती हैं। कान की नली में जब चिपचिपा मैल जमा रहता है, तो इससे बैक्टीरिया, धूल, अन्य प्रकार के सूक्ष्म कण, वैक्स में ही चिपक जाते हैं और ये कान के पर्दे व अंदरूनी हिस्से तक नहीं पहुंच पाते। इस वजह से संक्रमण और चोट का जोखिम काफी कम हो जाता है। कान का मैल कैनाल में नमी बनाए रखने का काम भी करता है, जिससे ड्राईनेस और इरिटेशन की समस्या नहीं होती।
कब होती है सफाई की जरूरत?
कान में थोड़ा-बहुत मैल जमा होना पूरी तरह से सामान्य और फायदेमंद है। शरीर के इस अंग का खुद का एक प्राकृतिक तंत्र मौजूद है, जो मैल को अपने आप साफ कर देता है। इसलिए इसकी जबरन पूरी सफाई करते रहना जरूरी नहीं है। हालांकि, कुछ स्थितियां ऐसी भी होती हैं, जिनमें इसे साफ करना बेहद जरूरी हो जाता है। दरअसल, मैल उस स्थिति में समस्या बन जाता है, जब इसकी मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है। इसके कारण कान बंद होने लगता है, जिससे कम सुनाई देने, बेचैनी होने, खुजली और ईयर रिंगिंग जैसी समस्याएं जन्म लेने लगती हैं।
कान की सफाई में न करना ये गलती
लोग अक्सर कान को घर में ही साफ करने की कोशिश करते हैं और उस दौरान ऐसी गलतियां कर देते हैं जो ईयर को डैमेज कर सकती हैं। सबसे बड़ी गलतियों में से एक कानों को साफ करने के लिए कॉटन बड्स, हेयरपिन, चाबी या किसी नुकीली चीज का इस्तेमाल करना है। इन चीजों से मैल बाहर निकलने की जगह अक्सर और अंदर चला जाता है।
इस स्थिति में वैक्स इम्पैक्शन यानी कैनाल में मैल फंसने से ब्लॉकेज जैसी स्थिति पैदा हो जाती है, जो दर्द, सुनने में तकलीफ और इंफेक्शन का कारण बनता है। वहीं कान में किसी भी तरह की वस्तु को डालने से कैनाल की स्किन को भी डैमेज पहुंच सकता है। और सबसे गंभीर मामलों में कान का पर्दा तक फट सकता है। कान का मैल जब परेशानी का कारण बन जाए, तो खुद से इसे निकालने की कोशिश करने की जगह एक्सपर्ट की मदद लें।
एक्सपर्ट की मदद कब हो जाती है जरूरी?
ऐसे लोग जिनके कानों में नैचरली ही ज्यादा मैल बनता है, जो लोग अक्सर ईयरफोन्स या हीयरिंग मशीन का इस्तेमाल करते हैं, और जिनके ईयर कैनाल जन्म से ही काफी पतले होते हैं, उनके कानों में मैल के जमने व फंसने की समस्या आम होती है। ऐसे लोगों को एक्सपर्ट से संपर्क कर प्रोफेशनल ईयर क्लीनिंग का सहारा लेना चाहिए। ये ईयर क्लीनिंग का बेस्ट तरीका है।
कैसे होती है प्रोफेशनल क्लीनिंग
- ईयर ड्रॉप्स: एक मेडिकेटिड लिक्विड वैक्स को नरम करने का काम करता है, जिससे उसे आसानी से बाहर निकाला जा सके।
- ईयर इरिगेशन: इस मेथड में बल्ब सिरिंज या इलेक्ट्रॉनिंग इरिगेटर का इस्तेमाल कर कान में हल्का गर्म पानी, सलाइन या फिर सॉल्यूशन डाला जाता है। इसका बहाव लगातार बनाए रखा जाता है, जिससे जमा हुआ मैल ढीला पड़कर बाहर आ जाता है।
- सक्शन: इसमें सक्शन डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है, जो कंट्रोल्ड वैक्यूम प्रेशर के जरिए कान के मैल को बाहर खींच लेता है।
तो क्या कान को घर पर बिल्कुल भी साफ न करें?
नहीं ऐसा नहीं है। कान के बाहरी हिस्से, जिसे पिन्ना कहा जाता है, उसे नहाते समय मुलायम कपड़े से साफ किया जा सकता है। ऐसा करना अच्छा इसलिए भी है, क्योंकि ये वहां पर जमने वाली धूल और पसीने के कणों को हटाने में मदद करता है। जो इंफेक्शन के जोखिम को घटाता है। ईयर कैनाल को तब तक न छूने की सलाह दी जाती है, जब तक कि किसी तरह की समस्या महसूस न हो। और इस स्थिति में भी डॉक्टर के पास जाना ही बेस्ट विकल्प होता है। ताकि परेशानी का बिना कान को नुकसान पहुंचाए समाधान किया जा सके।
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