सीने में दर्द, बेहोशी के दौरे, सांस लेने में तकलीफ; चक्कर आना कब गंभीर रूप लेता है, महिलाओं को कितना खतरा

 

महिलाओं में चक्कर आने की समस्या आमतौर पर पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो, हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी और पोषण की कमी के साथ-साथ अन्य मेडिकल प्रॉब्लम्स से जुडी हो सकती है। ऐसे में चक्कर आने का कारण जानना जरूरी है ताकि उसके अनुरूप ट्रीटमेंट किया जा सके। जरूरी टेस्ट से चक्कर आने का कारण पता लगाया जा सकता है, साथ ही हेल्दी डाइट से शरीर में पोषण की कमी को बैलेंस किया जा सकता है।

चक्कर आना कब गंभीर होता है (सांकेतिक तस्वीर)
चक्कर आना कब गंभीर होता है (सांकेतिक तस्वीर)
अगर आपके परिवार की महिला बार-बार चक्कर आने की शिकायत करती है तो उसे नजरअंदाज न करें। महिलाओं के शरीर में हर उम्र में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। हार्मोनल बदलाव के अलावा मेडिकल प्रॉब्लम्स के कारण भी चक्कर आने की समस्या हो सकती है। इस लेख में हम महिलाओं में बार-बार चक्कर आने के कारण और उपाय के बारे में बता रहे हैं।


महिलाओं में चक्कर आने की 8 वजहें
महिलाओं के शरीर में हर उम्र में बदलाव होते रहते हैं। इन बदलावों के कारण कई बार उन्हें चक्कर आने की समस्या हो सकती है। महिलाओं में चक्कर आने की निम्नलिखित वजहें हो सकती हैं-



  1. आयरन की कमी-महिलाओं में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया चक्कर आने का सबसे आम कारण है। अनियमित या हेवी पीरियड्स के कारण महिलाओं में इसका खतरा अधिक होता है। ऐसे में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिसके कारण चक्कर की समस्या होती है।
    क्या हैं इसके लक्षण-
    थकान, चक्कर आना, कमजोरी, थोड़ी सी फिजिकल एक्टिविटी से भी सांस फूल जाना, त्वचा में पीलापन और कमजोर नाखून इसके लक्षणों में शामिल हैं।
  2. पीरियड्स के दौरान हार्मोनल बदलाव-महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का उतार-चढ़ाव ब्लड सर्कुलेशन और फ्लूइड बैलेंस को प्रभावित करता है। यह पीरियड्स से पहले (PMS), पीरियड्स के दौरान और ओव्यूलेशन के आसपास होता है।
    क्या हैं इसके लक्षण
    - हल्का चक्कर आना, मूड स्विंग, पेट फूलना और थकान इसके लक्षणों में शामिल हैं।
  3. प्रेग्नेंसी के दौरान चक्कर आना-शारीरिक परिवर्तनों के कारण प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में चक्कर आना आम है। प्रेग्नेंसी में चक्कर आना तब गंभीर संकेत माना जाता है जब इसके साथ वजाइनल ब्लीडिंग, पेट में तेज दर्द और बेहोशी जैसे लक्षण भी हों।
    क्या हैं इसके लक्षण-
    लो ब्लड प्रेशर, मतली, उल्टी के कारण डिहाइड्रेशन और लो ब्लड शुगर इसके लक्षण हो सकते हैं।
  4. पीसीओएस और हार्मोन्स का असंतुलन-अनियमित पीरियड्स के कारण लगातार ब्लीडिंग हो सकती है, जिससे एनीमिया हो सकता है। ऐसा हार्मोन्स के असंतुलन के कारण होता है।
    क्या हैं इसके लक्षण-
    इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव होता है, जिससे थकान और चक्कर आते हैं।
  5. थायराइड डिसऑर्डर-इस स्थिति यानी हाइपोथायरायडिज्म में थकान, सुस्ती और चक्कर आना जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
    क्या हैं इसके लक्षण-
    चिंता, चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज होना इसके लक्षण हो सकते हैं।
  6. लो ब्लड प्रेशर- युवा या दुबली महिलाओं में लो ब्लड प्रेशर की समस्या आम है।
    क्या हैं इसके लक्षण-
    डिहाइड्रेशन और पीरियड्स के दौरान यह समस्या बढ़ सकती है ।
  7. पोषण की कमी-आयरन, विटामिन बी12, फोलेट और विटामिन डी की कमी के कारण महिलाओं में चक्कर आने की समस्या हो सकती है।
    क्या हैं इसके लक्षण-
    थकान, चक्कर आना और कमजोरी इसके लक्षण हो सकते हैं।
  8. रक्तस्राव के स्त्री रोग संबंधी कारण-फाइब्रॉइड, एडेनोमायोसिस, एंडोमेट्रियोसिस की स्थिति में लगातार रक्तस्राव होता है जिससे एनीमिया हो जाता है और चक्कर आने लगते हैं।
    क्या हैं इसके लक्षण-
    चक्कर आना, कमजोरी और थकान इसके लक्षण हो सकते हैं।




महिलाओं में चक्कर आने के लक्षण

चक्कर आना कैसे रोकें (सांकेतिक तस्वीर)<br>
चक्कर आना कैसे रोकें (सांकेतिक तस्वीर)

महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं इसलिए उनमें चक्कर आने के लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं। आमतौर पर महिलाओं में चक्कर आने के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं-


  • चक्कर आना (वर्टिगो)
  • संतुलन बिगड़ना
  • सिर भारी लगना
  • मतली
  • पीरियड्स के दौरान कमजोरी या सामान्य कमजोरी
  • दिल की धड़कन तेज होना

चक्कर आने पर क्या करें ?
चक्कर आने पर तुरंत उठाए जाने वाले कदम निम्नलिखित हो सकते हैं-




  • तुरंत बैठ जाएं या लेट जाएं
  • बेहोशी महसूस होने पर पैरों को ऊपर उठाएं
  • पानी या ओआरएस पिएं
  • यदि शुगर कम होने का संदेह हो तो कुछ खाएं
  • अचानक हिलने-डुलने से बचें
  • अकेले गाड़ी न चलाएं या सीढ़ियां न चढ़ें

चक्कर आना कब गंभीर होता है
चक्कर आना आम बात है, लेकिन कुछ स्थितियों में चक्कर आना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। इन स्थितियों में चक्कर आना कब गंभीर हो सकता है-

  • बेहोशी के दौरे
  • कमजोरी के साथ हेवी पीरियड्स
  • सीने में दर्द या धड़कन तेज होना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • अचानक तेज सिरदर्द
  • न्यूरोलॉजिकल लक्षण (अस्पष्ट बोलना, कमजोरी, असंतुलन)
  • प्रेग्नेंसी में दर्द या रक्तस्राव

बार-बार चक्कर आए तो क्या करें



बार बार चक्कर क्यों आता है (सांकेतिक तस्वीर)<br>
बार बार चक्कर क्यों आता है (सांकेतिक तस्वीर)

लगातार चक्कर आना नॉर्मल नहीं है। ऐसी स्थिति में जांच कराना जरूरी है। बार-बार चक्कर आने पर स्थिति को समझते हुए निम्नलिखित जांच कराई जा सकती है-

  • पीरियड्स के पैटर्न (इतिहास) की जांच
  • सीबीसी (हीमोग्लोबिन जांच)
  • आयरन टेस्ट
  • थायरॉइड फंक्शन टेस्ट
  • ब्लडप्रेशर की जांच (लेटकर और खड़े होकर)
  • प्रेग्नेंसी टेस्ट (अगर जरूरत हो)
  • हेवी ब्लीडिंग की आशंका हो तो पेल्विक अल्ट्रासाउंड

चक्कर आना कैसे रोकें ?
जिन लोगों को चक्कर आने की समस्या रहती है उन्हें अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके साथ ही जरूरी टेस्ट भी कराने चाहिए। चक्कर आना रोकने के लिए आयरन से भरपूर आहार जैसे हरी सब्जियां, दालें, नॉन वेजीटेरियन हैं तो अंडे और मीट को डाइट में शामिल करें।



पीरियड्स के दौरान हेवी ब्लीडिंग होती है तो इसकी जांच कराएं। हेवी ब्लीडिंग होने पर नियमित रूप से हीमोग्लोबिन की जांच कराएं। यदि पीसीओएस या थायराइड संबंधी समस्या हैं तो उसका इलाज कराएं। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। समय पर भोजन करें और भोजन की मात्रा कम न करें।

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