गुड़हल के पत्ते पीले पड़ रहे, नहीं आ रहे फूल? माली ने बताया कारण और उपाय, लोहे की कील वाला नुस्खा आएगा काम

 

गार्डनिंग का शौक रखने वालों के लिए गुड़हल का पौधा किसी बेशकीमती होता है। लेकिन अक्सर शिकायत आती है कि पौधा बढ़ तो रहा है, पर उसकी पत्तियां पीली पड़ रही हैं और कलियां आने से पहले ही गिर जाती हैं। ऐसे में गार्डनिंग एक्सपर्ट ने इसका आसान और मुफ्त का समाधान बताया है।

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गुड़हल का पौधा हर बगीचे की शान होता है, इसके बड़े और चटकीले फूल बगीचे की रौनक बढ़ा देते हैं। लेकिन जब इसकी हरी पत्तियां पीली पड़ने लगें और कलियां खिलने से पहले ही गिरने लगें, तो चिंता होने लगती है। गार्डनिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसे क्लोरोसिस कहा जाता है, जिसका सीधा मतलब है कि आपके पौधे में आयरन और मैग्नीशियम की भारी कमी हो गई है।


ऐसे में महंगे फर्टिलाइजर्स पर पैसे खर्च करने के बजाय आप गार्डनिंग एक्सपर्ट द्वारा शेयर किए फ्री के नुस्खे को आजमा सकते हैं। इस लेख में जानेंगे कि कैसे लोहे की साधारण कीलों से बना आयरन घोल और पानी देने का सही तरीका आपके मुरझाए हुए गुड़हल में नई जान फूंक सकता है। मात्र दो आसान स्टेप्स अपनाकर पौधे को फिर से हरा-भरा और फूलों से लदा हुआ बना सकते हैं।

सबसे पहले समझिए क्या है वजह

सबसे पहले समझिए क्या है वजह

जब आपके गुड़हल की पत्तियों की नसें हरी रहें लेकिन बाकी हिस्सा पीला पड़ने लगे, तो समझ लीजिए कि पौधा क्लोरोसिस का शिकार है। आसान भाषा में कहें तो, पौधे के पास खाना तो मौजूद है, लेकिन वो उसे खा नहीं पा रहा है। ऐसा अक्सर मिट्टी में मैग्नीशियम और आयरन की कमी के कारण होता है। जैसे हमारे शरीर को खून की कमी होने पर कमजोरी महसूस होती है, वैसे ही आयरन की कमी से पौधा पीला पड़ने लगता है।

ओवरवाटरिंग करें बंद

ओवरवाटरिंग करें बंद

माली का सुझाव है कि सबसे पहले ओवरवाटरिंग यानी कि जरूरत से ज्यादा पानी देना तुरंत बंद कर दें। हम अक्सर सोचते हैं कि रोज पानी देने से पौधा खुश रहेगा, लेकिन गुड़हल के मामले में यह उल्टा पड़ता है। ज्यादा पानी से जड़ें सड़ने लगती हैं और वे मिट्टी से पोषक तत्व सोखना बंद कर देती हैं। जब तक मिट्टी की ऊपरी सतह 1-2 इंच तक पूरी तरह सूख न जाए, तब तक पानी न दें।

लोहे की कील का घोल

लोहे की कील का  घोल

आयरन की कमी को पूरा करने के लिए आपको बाजार से महंगे सप्लीमेंट खरीदने की जरूरत नहीं है। बस 2 से 3 साधारण लोहे की कीलें लें जो बिना पेंट वाली हों। इन्हें एक मग पानी में डाल दें और 2 दिनों के लिए ऐसे ही छोड़ दें। दो दिनों में पानी का रंग थोड़ा बदल जाएगा, जिसका मतलब है कि लोहे के अंश पानी में घुल चुके हैं। यह आपके पौधे के लिए एक पावरफुल आयरन टॉनिक बन गया है।

घोल डालने का सही तरीका और समय

घोल डालने का सही तरीका और समय

इस लोहे वाले पानी को सीधे पौधे की जड़ में डाल दें। ध्यान रहे कि यह काम आपको हफ्ते में सिर्फ एक बार ही करना है। बार-बार आयरन देने से मिट्टी का pH लेवल बिगड़ सकता है। जब आप यह घोल डालते हैं, तो जड़ें सीधे तौर पर आयरन सोख पाती हैं और क्लोरोफिल बनने की प्रक्रिया फिर से शुरू हो जाती है, जिससे पत्तियां वापस हरी होने लगती हैं।

मैग्नीशियम की कमी और घरेलू उपचार

मैग्नीशियम की कमी और घरेलू उपचार

आयरन के साथ-साथ गुड़हल को मैग्नीशियम की भी बहुत जरूरत होती है। अगर लोहे की कील वाला नुस्खा काम कर रहा है पर फूल फिर भी छोटे आ रहे हैं, तो आप एप्सम साल्ट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आधा चम्मच एप्सम साल्ट को एक लीटर पानी में घोलकर पत्तियों पर स्प्रे करने से पौधा हेल्दी होगा।

धूप और छंटाई का महत्व

धूप और छंटाई का महत्व

गुड़हल एक सन लविंग प्लांट है। इसे दिन में कम से कम 5-6 घंटे की सीधी धूप मिलना जरूरी है। अगर आपका पौधा छाया में रखा है, तो उसे धूप वाली जगह पर शिफ्ट करें। इसके साथ ही, पीली पड़ चुकी पुरानी पत्तियों को हटा दें ताकि पौधा अपनी सारी ऊर्जा नई और स्वस्थ पत्तियों को उगाने में लगा सके।

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