गुड़हल के पौधे के साथ एक बड़ी समस्या अक्सर देखने को मिलती है कि इसपर सबसे ज्यादा सफेद चिपचिपे कीड़ो का हमला हमला होता है। इस बीच मशहूर गार्डनिंग जोड़ी वरुण और अन्नू ने बताया है कि आखिर गुड़हल पर ही इनका आतंक क्यों होता है और इनसे बचाव क्यों जरूरी है।

गार्डनिंग एक्सपर्ट के मुताबिक मिलीबग्स गुड़हल के मीठे रस और इसकी कोमल टहनियों के दीवाने होते हैं। गुड़हल की घनी बनावट और चींटियों का साथ इन कीड़ों को फलने-फूलने का सही मौका देता है। अगर आप भी अपने गार्डन को बर्बाद होने से बचाना चाहते हैं, तो यह समझना जरूरी है कि ये कीड़े सिर्फ गुड़हल को ही क्यों चुनते हैं और इनसे आसानी से कैसा बचा जा सकता है।
पहला कारण: पोषक तत्वों से भरपूर रस का अट्रैक्शन
गुड़हल का पौधा अपनी ग्रोथ के लिए बहुत अधिक मात्रा में पानी और पोषक तत्वों का निर्माण करता है। इस प्रोसेस में पौधे के अंदर एक मीठा और पोषक रस बनता है। मीलीबग्स इस रस से बहुत अट्रैक्ट होते हैं। वे पौधे की टहनियों और पत्तियों में छेद करके इस रस को चूसते हैं, जो उनके लिए मुख्य भोजन का काम करता है। यही कारण है कि वे गुड़हल को अपना पसंदीदा ठिकाना बनाते हैं।
नई और कोमल कलियों पर हमला
गुड़हल के पौधे की एक खासियत है कि इसमें लगातार नई और बेहद कोमल पत्तियां व कलियां आती रहती हैं। वरुण और अन्नू की जोड़ी बताती है कि मीलीबग्स हमेशा नई ग्रोथ की तलाश में रहते हैं। वे पौधे के सबसे ऊपरी हिस्सों पर गुच्छों में जमा हो जाते हैं। कोमल होने के कारण कीड़े आसानी से वहां से रस चूस लेते हैं, जिससे नई कलियां खिलने से पहले ही गिर जाती हैं और पौधे की ग्रोथ पूरी तरह रुक जाती है।
घनी बनावट और छिपने की जगह
गुड़हल का पौधा अक्सर बहुत घना बढ़ता है। इसकी पत्तियां बड़ी होती हैं और आपस में सटी रहती हैं। यह बनावट इन सफेद कीड़ों को छिपने के लिए एक सुरक्षित जगह देती हैं। वे पत्तियों के पीछे या टहनियों के जोड़ के नीचे छिप जाते हैं और वहीं अपने अंडे देते हैं। घनी पत्तियों की वजह से शुरुआत में माली की नजर इन पर नहीं पड़ती, जिससे इनकी संख्या तेजी से बढ़ जाती है।
चींटियों की मदद और बड़ा संकेत
वरुण और अन्नू की जोड़ी का कहना है कि अगर आपको अपने गुड़हल के पास चींटियां घूमती दिखें, तो समझ जाइए कि समस्या गंभीर है। दरअसल, मीलीबग्स एक मीठा तरल पदार्थ छोड़ते हैं जिसे चींटियां खाना पसंद करती हैं। इसके बदले में चींटियां इन कीड़ों को सुरक्षा देती हैं और इन्हें एक पौधे से दूसरे पौधे तक ले जाने में ट्रांसपोर्ट का काम भी करती हैं। चींटियों का होना इस बात का सबूत है कि मीलीबग्स ने पौधे पर कब्जा कर लिया है।
संक्रमण फैलने की तेज रफ्तार
मीलीबग्स के हमले को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर आप इन्हें केवल 2-3 दिनों के लिए भी नजरअंदाज कर देते हैं, तो यह संक्रमण बहुत शांति से और तेजी से आपके गार्डन के अन्य पौधों तक फैल सकता है। ये कीड़े हवा के जरिए या चींटियों की मदद से पड़ोसी पौधों पर पहुंच जाते हैं और देखते ही देखते आपका पूरा बगीचा बर्बाद हो सकता है।
मिलीबग के हमले का कारण
बचाव और सावधानी के उपाय
पौधे को बचाने के लिए जरूरी है कि आप नियमित रूप से पत्तियों के नीचे चेक करें। वरुण-अन्नू की सलाह है कि संक्रमण दिखते ही तेज धार वाले पानी से कीड़ों को झाड़ दें। इसके अलावा, नीम के तेल और लिक्विड सोप के घोल का स्प्रे हर 15 दिन में करने से ये कीड़े दूर रहते हैं। अगर कोई टहनी बहुत ज्यादा संक्रमित है, तो उसे काटकर हटा देना ही बेहतर होता है ताकि बाकी पौधा सुरक्षित रहे।डिस्क्लेमर: इस लेख में किए गए दावे इंस्टाग्राम वीडियो और इंटरनेट पर मिली जानकारी पर आधारित हैं। एनबीटी इसकी सत्यता और सटीकता जिम्मेदारी नहीं लेता है।
Comments
Post a Comment