भीषण गर्मी में फ्रिज का ठंडा पानी भले ही सुकून दे, लेकिन यह सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में मिट्टी के मटके का पानी सबसे बेहतर ऑप्शन है। और, गांव की एक महिला ने मटके का पानी प्राकृतिक तरीके से फ्रिज जैसा ठंडा करने का तरीका बताया है।

संतू चौधरी के तरीके में जूट की रस्सी का इस्तेमाल करना होगा। जो मटके के पानी को 'नेचुरल फ्रिज' जैसा ठंडा करने में मदद करता है। इसके लिए आपको रस्सी का सही इस्तेमाल और मटके के रखरखाव के बारे में भी जानना होगा। ताकि पूरी गर्मी आप मटके से फ्रिज जैसा ठंडा पानी पी सकें।
जूट की रस्सी का कमाल
गांव की महिला ने पूरे मटके को जूट की रस्सी से कसकर लपेटने का देसी तरीका बताया है। दरअसल, जूट एक प्राकृतिक फाइबर है जिसमें नमी सोखने की जबरदस्त क्षमता होती है। जब आप मटके पर रस्सी लपेटते हैं, तो यह मटके की सतह पर पानी की एक अतिरिक्त परत बनाए रखने में मदद करती है, जिससे बाहरी गर्म हवा का असर मटके के अंदरूनी तापमान पर नहीं पड़ता।
कैसे लपेटना होगी रस्सी
मटके पर जूट की रस्सी लपेटना बेहद आसान है। सबसे पहले रस्सी के एक सिरे को मटके के ऊपरी हिस्से पर मजबूती से एक गांठ लगाकर या दबाकर फिक्स कर लें। इसके बाद, मटके को धीरे-धीरे घुमाते हुए रस्सी को ऊपर से नीचे की ओर गोलाई में लपेटना शुरू करें।
ध्यान रहे कि लपेटते समय रस्सी के हर फेरे के बीच बिल्कुल भी खाली जगह न बचे और वह पूरी तरह से मटके की सतह को ढंक ले। जब आप मटके के निचले हिस्से तक पहुंच जाएं, तो आखिरी सिरे को पिछली लपेट के अंदर दबा दें या एक छोटी गांठ लगाकर सुरक्षित कर दें।
रस्सी को गीला रखना भी है जरूरी
सिर्फ रस्सी लपेटना काफी नहीं है। मटके का पानी फ्रिज जैसा ठंडा तभी रहेगा जब यह जूट की रस्सी हमेशा गीली रहे। दिन में 2-3 बार रस्सी पर पानी छिड़कने से मटके के चारों ओर एक कूलिंग चैंबर बन जाता है, जो चिलचिलाती धूप में भी पानी को बर्फ जैसा कर देता है।
कैसे काम करती है देसी ट्रिक
मिट्टी के मटके में हजारों छोटे छेद होते हैं, जिनसे पानी रिसकर बाहर आता है। जब बाहरी हवा इस नमी के संपर्क में आती है, तो वाष्पीकरण की प्रक्रिया शुरू होती है। जूट की रस्सी इस प्रक्रिया को और तेज कर देती है। रस्सी मटके से रिसने वाले पानी को सोख लेती है और जब हवा इस गीली रस्सी से टकराती है, तो मटका अंदर से और भी ज्यादा ठंडा होने लगता है।
पानी ज्यादा ठंडा करने के लिए रेत का इस्तेमाल
इस देसी जुगाड़ को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 'मिट्टी के स्टैंड' या 'बालू रेत की खाद' का उपयोग एक शानदार है। मटके को सीधे जमीन पर रखने के बजाय, एक तसले या ऊंचे स्टैंड में गीली बालू रेत भरें और उसके ऊपर जूट की रस्सी से लिपटा यह मटका रखें। इससे न केवल मटके को नीचे से भी ठंडक मिलती रहेगी, बल्कि बालू रेत में जमा पानी धीरे-धीरे वाष्पित होकर मटके के आसपास के वातावरण को कई डिग्री तक कम कर देगा।
मटके का पानी ठंडा रखने का तरीका
सफाई और रखरखाव
हर 3-4 दिन में जूट की रस्सी को खोलकर धूप में सुखाना चाहिए और मटके की बाहरी सतह को साफ पानी से धोना चाहिए। ऐसा करने से मटके के छोटे छेद बंद नहीं होते और जूट की रस्सी में किसी भी तरह की बदबू या काई जमने का डर नहीं रहता। जब आप साफ और सूखी रस्सी को दोबारा लपेटकर उसे ताजे पानी से भिगोते हैं, तो वाष्पीकरण की क्षमता फिर से अपनी पूरी शक्ति से काम करने लगती है।
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