ज्यादा चीनी-मीठी ड्रिंक्स से क्यों पहुंचता है सीधा नुकसान, 4 मई को MoHFW ने बताए फैटी लिवर से बचने के 3 तरीके
Good and Bad Things for Liver Health: हमारी रोज की अनहेल्दी आदतें लिवर को बीमार करने का काम करती हैं। इसके बाद आपका बैड कोलेस्ट्रॉल बिगड़ सकता है और डायजेशन व एनर्जी में कमी आ सकती है। भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 4 मई को पोस्ट करके इस अंग को नुकसान पहुंचाने वाली चीजें और फैटी लिवर से बचाने वाले उपायों के बारे में बताया है।

भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने 4 मई को मीठे पेय और ज्यादा चीनी को लिवर के लिए नुकसानदायक बताया। ये चीजें आपके लिवर के फंक्शन को प्रभावित कर सकती हैं। MoHFW ने फैटी लिवर से बचाव करने वाले 3 काम भी बताए हैं, जो कि बेहद बेसिक और आसान हैं।
लिवर के लिए क्या नुकसानदायक और क्या स्वास्थ्यवर्धक
ज्यादा चीनी का लिवर पर प्रभाव
चीनी आंतों से गुजरते हुए फ्रुक्टोज और ग्लूकोज के रूप में लिवर तक पहुंचती है। एनसीबीआई पर मौजूद शोध के मुताबिक, जब आप जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन करते हैं तो इंसुलिन का लेवल बहुत हाई हो जाता है। इससे लिवर को संकेत मिलता है कि अब ग्लूकोज और फ्रुक्टोज को अपने भीतर फैट के रूप में स्टोर करने का वक्त आ गया है और जब शरीर को अपर्याप्त ग्लूकोज के दौरान एनर्जी की जरूरत हो तो इस स्टोर फैट को एनर्जी बनाने के लिए इस्तेमाल करना है।
लेकिन जब आप लंबे समय तक अत्यधिक चीनी लेते रहते हैं तो शरीर में ग्लूकोज का लेवल कभी नीचे नहीं आ पाता। जिसके कारण लिवर पर फैट इकट्ठा होता रहता है। इस स्थिति से फैटी लिवर की समस्या विकसित होती है और धीरे-धीरे लिवर के कामकाज की गुणवत्ता में गिरावट लाती रहती है।
मीठी ड्रिंक्स का लिवर पर असर
मीठी ड्रिंक्स में फ्रुक्टोज, ग्लूकोज, आर्टिफिशियल स्वीटनर्स और अन्य एडिक्टिव्स हो सकते हैं। एनसीबीआई पर मौजूद शोध के मुताबिक, मीठी ड्रिंक्स के ग्लूकोज-फ्रुक्टोज चीनी के मुकाबले ज्यादा तेजी से लिवर में अवशोषित होते हैं। साथ ही ड्रिंक्स में एक बार में ज्यादा शुगर लेने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि मीठी ड्रिंक्स के सेवन से तेजी से फैटी लिवर विकसित हो सकता है। साथ में ड्रिंक्स में मौजूद अन्य केमिकल, एडिक्टिव्स, आर्टिफिशियल कलर या सोडा लिवर को और ज्यादा हानि पहुंचाते हैं।फैटी लिवर से बचने के 3 तरीके
MOHFW ने फैटी लिवर से बचाव के लिए संतुलित आहार, ताजे फल और भरपूर पानी को अपनाने की सलाह दी है।
- संतुलित डाइट लेने से लिवर पर बोझ बढ़ाए बिना आवश्यक विटामिन व मिनरल मिलते हैं। यह पोषक तत्व लिवर के नेचुरल डिटॉक्सिफिकेशन को सुधारने में मदद करते हैं। इससे इंफ्लामेशन और फैट बिल्ड अप में कमी आती है।
- ताजे फलों में एंटीऑक्सीडेंट्स, पोलीफेनोल्स और फाइबर होता है। ये सभी चीजें लिवर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद करती हैं, जो कि लिवर डिजीज का बड़ा कारण है।
- हाइड्रेशन सही रखने से लिवर की सेल्स व उनका फंक्शन सही रहता है। इसके कारण टॉक्सिन आसानी से बाहर निकलते रहते हैं, बाइल प्रोडक्शन बेहतर रहता है और मेटाबॉलिक स्ट्रेन नहीं होता।
ध्यान रखें कि लिवर एक महत्वपूर्ण अंग है, जो खाना पचाने से लेकर हॉर्मोन बनाने, शरीर की सफाई और एनर्जी प्रोडक्शन में सपोर्ट करता है। आप छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों से फैटी लिवर, लिवर कैंसर, सिरोसिस आदि का खतरा कम कर सकते हैं। इसके लिए आपको ऐल्कोहॉल से दूरी, पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि और स्ट्रेस मैनेजमेंट पर भी ध्यान देना होगा।
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