100 रुपये का 1kg कोकोपीट खरीदने की नहीं पड़ेगी जरूरत, फ्री में नारियल से बनाने का तरीका

 

गार्डनिंग के शौकीनों के लिए कोकोपीट एक जरूरी चीज है। यह न केवल मिट्टी को हल्का बनाता है, बल्कि पौधों की जड़ों में नमी को भी बरकरार रखता है। बाजार में 1 किलो कोकोपीट की कीमत करीब 100 रुपये तक होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ की निधि ने एक घरेलू जुगाड़ बताया है जिससे इसे घर पर ही मुफ्त में तैयार कर सकते हैं।

secret to make Cocopeat to increase plant growth

बागवानी का शौक रखने वाले लोग अक्सर मिट्टी को उपजाऊ और हल्का बनाने के लिए बाजार से कोकोपीट खरीदते हैं। नारियल के रेशों से बना यह बुरादा पौधों की जड़ों में नमी सोखने की क्षमता रखता है, लेकिन बाजार में इसकी 1 किलो की कीमत करीब 100 रुपये तक होती है। अगर आप अपने बगीचे के लिए ढेर सारा कोकोपीट इस्तेमाल करते हैं, तो यह काफी महंगा सौदा साबित हो सकता है।

हालांकि छत्तीसगढ़ की गार्डनिंग एक्सपर्ट निधि ने एक शानदार और मुफ्त का तरीका बताया है, जिससे आप घर के कचरे यानी नारियल के छिलकों से ही बेहतरीन क्वालिटी का कोकोपीट तैयार कर सकते हैं। यह न केवल किफायती है, बल्कि पूरी तरह ऑर्गेनिक भी है।

सबसे पहले जानें, कोकोपीट क्या है और क्यों जरूरी है?

सबसे पहले जानें, कोकोपीट क्या है और क्यों जरूरी है?

कोकोपीट असल में नारियल के रेशों के बीच का बुरादा होता है। इसकी खासियत है कि यह अपने वजन से कई गुना ज्यादा पानी सोख सकता है। गमलों की मिट्टी में इसे मिलाने से मिट्टी सख्त नहीं होती और पौधों की जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त हवा मिलती है। बाजार से केमिकल युक्त कोकोपीट खरीदने के बजाय घर पर बना कोकोपीट पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित होता है।

कोकोपीट बनाने के लिए सही सामग्री का चुनाव

कोकोपीट बनाने के लिए सही सामग्री का चुनाव

गार्डनिंग एक्सपर्ट निधि के अनुसार, कोकोपीट बनाने के लिए नारियल के छिलके चाहिए होंगे। जब आप पूजा के लिए नारियल छीलते हैं, तो उसके रेशेदार छिलके बच जाते हैं। इन छिलकों को इकट्ठा कर लें। ध्यान रहे कि छिलके पूरी तरह सूखे हों ताकि उनसे फाइबर और बुरादा आसानी से अलग हो सके।

भिगोने का सही तरीका

भिगोने का सही तरीका

सबसे पहले एक बड़ा बर्तन या बाल्टी लें और उसमें नारियल के छिलके डाल दें। अब इसमें इतना पानी भरें कि छिलके पूरी तरह डूब जाएं। इन्हें 2 दिनों के लिए ऐसे ही छोड़ दें। पानी में भीगने से छिलके नरम हो जाते हैं और उनके रेशों के बीच फंसा हुआ लिग्निन यानी प्राकृतिक गोंद जैसा पदार्थ ढीला पड़ जाता है। इससे कोकोपीट निकालना बहुत आसान हो जाता है।


कोकोपीट अलग करने की तकनीक

कोकोपीट अलग करने की तकनीक

2 दिन बाद छिलकों को पानी से निकाल लें। अब एक लोहे वाला कड़ा ब्रश लें। छिलके को एक हाथ से पकड़ें और दूसरे हाथ से ब्रश की मदद से धीरे-धीरे उसे रगड़ें। रगड़ने पर आप देखेंगे कि छिलके से बारीक बुरादा गिर रहा है, यही असली कोकोपीट है।

सुखाना और स्टोर करना

सुखाना और स्टोर करना

जब आप सारा बुरादा निकाल लें, तो उसे धूप में एक पतली परत की तरह फैला दें। कोकोपीट को अच्छी तरह सूखने देना बहुत जरूरी है, वरना नमी के कारण इसमें फंगस लग सकती है। एक बार जब यह पूरी तरह सूख जाए, तो इसे किसी एयरटाइट कंटेनर या प्लास्टिक बैग में भरकर रख लें। यह सालों-साल खराब नहीं होता और आप जब चाहें इसे इस्तेमाल कर सकते हैं।

कोकोपीट बनाने का तरीका

इस्तेमाल करने का सही तरीका

इस्तेमाल करने का सही तरीका

घर पर बने इस कोकोपीट का उपयोग आप दो तरह से कर सकते हैं। मिट्टी, खाद और कोकोपीट को बराबर मात्रा में मिलाकर गमले भरें। इससे मिट्टी हल्की रहेगी और पौधों में बार-बार पानी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आप बीज उगाना चाहते हैं, तो केवल कोकोपीट और थोड़ी सी वर्मीकंपोस्ट का मिश्रण इस्तेमाल करें। इसमें बीज बहुत तेजी से अंकुरित होते हैं।


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