Toothache के 6 आयुर्वेदिक इलाज- लौंग, नीम, हल्दी, मुलेठी, नमक, ऑयल पुलिंग से दांतों-मसूड़ों को मजबूत बनाएं

 

आयुर्वेद में दांतों को सड़न और बैक्टीरिया से बचाने, मसूड़ों में सूजन और इन्फेक्शन रोकने के आसान उपाय मौजूद हैं। आयुर्वेदिक उपचार में पारंपरिक जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है, जिससे दांतों से जुड़ी समस्याओं से राहत पाई जा सकती है। हर्बल प्रोडक्ट से दांत साफ करना, गरारे और ऑयल पुलिंग जैसे घरेलू उपचार दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखते हैं।

दांतों में दर्द कब बढ़ता है (सांकेतिक तस्वीर)
दांतों में दर्द कब बढ़ता है (सांकेतिक तस्वीर)
दांत दर्द एक आम समस्या है। आमतौर पर यह समस्या दांतों में कैविटी, सड़न, सेंसिटिविटी, मसूड़ों में सूजन और संक्रमण के कारण होती है। आयुर्वेदिक उपचार में दांतों की समस्याओं का इलाज नेचुरल तरीके से किया जाता है। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और विधियों का उपयोग करके दांत दर्द का नेचुरल तरीके से इलाज किया जा सकता है। साथ ही ओरल हेल्थ और हाइजीन को भी मेंटेन किया जा सकता है। इस लेख में हम दांत दर्द के आयुर्वेदिक उपचार बता रहे हैं।


दांत दर्द के 6 आयुर्वेदिक उपचार

दांतों में सेंसिटिविटी क्यों बढ़ती है (सांकेतिक तस्वीर)<br><br>
दांतों में सेंसिटिविटी क्यों बढ़ती है (सांकेतिक तस्वीर)




दांतों और मसूड़ों की नियमित सफाई के साथ-साथ दांतों के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम, विटामिन डी और फाइबर युक्त हेल्दी डाइट लेना जरूरी है। चीनी से दूरी और ज्यादा ठंडे या गर्म भोजन से परहेज करके दांतों के इनेमल की रक्षा की जा सकती है और दांतों की सेंसिटिविटी को कम किया जा सकता है। दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए नीचे दिए गए 6 आयुर्वेदिक उपचारों का उपयोग किया जा सकता है-


1. लौंग- आयुर्वेद में लौंग को सबसे प्रभावी उपचारों में से एक माना जाता है। लौंग में मौजूद यूजेनॉल नेचुरल पेन रिलीफ का काम करता है और दांतों के बैक्टीरिया से बचाव करता है। लौंग के उपयोग से दांतों का दर्द कम होता है और बैक्टीरिया का बढ़ना रुकता है।

उपयोग का तरीका- लौंग को दांत के पास रखकर धीरे-धीरे चबाने से आराम मिलता है। नारियल तेल में लौंग का तेल मिलाकर रुई से दांत दर्द वाली जगह पर लगाने से आराम मिलता है। लौंग के तेल का उपयोग सीमित मात्रा में करें, अधिक मात्रा में लगाने से त्वचा में जलन हो सकती है।


2. नीम- नीम एक बेहतरीन एंटीबैक्टीरियल है। इसके उपयोग से दांतों के बैक्टीरिया और मसूड़ों की सूजन से राहत मिलती है। जो लोग नीम का नियमित उपयोग करते हैं, उनके मसूड़े मजबूत होते हैं, जिससे उन्हें भविष्य में दांत दर्द से राहत मिलती है।

उपयोग का तरीका- नीम की टहनियों का उपयोग पारंपरिक रूप से प्राकृतिक टूथब्रश के रूप में किया जाता रहा है। नीम की दातुन प्लाक हटाने, मसूड़ों की सूजन कम करने और दांतों की बीमारियों से बचाव करने में सहायक है। नीम के पाउडर का इस्तेमाल हर्बल टूथ पाउडर के तौर पर भी किया जा सकता है।


3. हल्दी- हल्दी दांत दर्द के इलाज में काफी लोकप्रिय है। इसमें बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता होती है। हल्दी की सूजन कम करने की क्षमता इसे मसूड़ों के दर्द के लिए एक प्रभावी उपचार बनाती है।

उपयोग का तरीका- हल्दी पाउडर को पानी या सरसों के तेल में मिलाकर टूथ पेस्ट की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यह उपचार दर्द और सूजन दोनों को कम करने में मदद करता है। यह पेस्ट घाव भरने की प्रक्रिया में भी सहायक है।


4. मुलेठी- आयुर्वेदिक उपचार में मुलेठी की जड़ को मुंह के स्वास्थ्य के लिए एक उपयोगी जड़ी-बूटी माना गया है। इसमें मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट करने वाले गुण दांतों में सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ते हैं और मसूड़ों की सूजन से भी राहत दिलाते हैं।

उपयोग का तरीका- मुलेठी पाउडर को हर्बल टूथ पाउडर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके उपयोग से दांत दर्द से राहत पाई जा सकती है। इसका रोजाना सीमित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है।


5. नमक- मुंह की सफाई, गले की खराश और बैक्टीरिया से दांतों के बचाव के लिए नमक के पानी से कुल्ला करना फायदेमंद है।

उपयोग का तरीका- गुनगुने पानी में सेंधा नमक मिलाकर गरारे करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है, मुंह साफ होता है और शरीर से संक्रामक पदार्थ निकलते हैं। दांतों की सुरक्षा के लिए दिन में दो से तीन बार नमक के पानी से गरारे किए जा सकते हैं।


6. ऑयल पुलिंग- आयुर्वेद में ऑयल पुलिंग को दांतों की सफाई का एक महत्वपूर्ण आधार माना गया है। ऑयल पुलिंग को ‘गंडूषा’ भी कहा जाता है।

उपयोग का तरीका- ऑयल पुलिंग की प्रक्रिया में एक बड़ा चम्मच तिल का तेल या नारियल का तेल 10 से 15 मिनट तक मुंह में घुमाना होता है। नियमित रूप से ऑयल पुलिंग से विषाक्त पदार्थ और बैक्टीरिया दूर होते हैं, दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं और दांतों की सेंसिटिविटी कम होती है।


दांतों की सुरक्षा सबसे जरूरी

दांत दर्द से कैसे बचें (सांकेतिक तस्वीर)<br>
दांत दर्द से कैसे बचें (सांकेतिक तस्वीर)


दांतों की समस्याओं से बचने के ऊपर बताए गए उपायों से पॉजिटिव रिजल्ट मिलते हैं, लेकिन इनका उपयोग करते समय दांतों की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है, जैसे गाढ़े हर्बल ऑयल को बिना पतला किए सीधे त्वचा पर लगाने से बचें। इससे त्वचा में जलन हो सकती है। एलर्जी या दांतों की समस्या वाले लोगों को कोई भी घरेलू उपचार करने से पहले दांतों की जांच करा लेनी चाहिए। जिन लोगों को दांतों से संबंधित गंभीर इन्फेक्शन, फोड़े, घाव या लगातार दर्द की तकलीफ है, उन्हें पहले अपना डेंटल ट्रीटमेंट कराना चाहिए।

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