भारत को मिली डेंगू से बचाने वाली पहली वैक्सीन Qdenga, कब और किसे लगेगी डोज, कैसे करेगी काम?

 

First Dengue Vaccine In India: डेंगू एक खतरनाक वायरल डिजीज है, जो लंबे समय से भारत पर बोझ बनी हुई है। लेकिन अब देश में इससे बचाव करने वाली क्यूडेंगा (Qdenga) वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। यह डेंगू वायरस के चारों स्टीरियोटाइप से बचाने का काम करती है। इसके डोज, प्रभावकारिता आदि के बारे में डॉक्टर ने जानकारी दी है।

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भारत की पहली डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा (सांकेतिक तस्वीर)
डेंगू के खिलाफ भारत की लड़ाई मजबूत हो गई है, क्योंकि ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने भारत की पहली डेंगू वैक्सीन Qdenga (क्यूडेंगा) को मंजूरी दे दी है। यह वैक्सीन जल्द ही भारत में आम जनता के लिए उपलब्ध हो जाएगी और हर साल बढ़ने वाले डेंगू के मामलों को रोकने में प्रभावशाली साबित होगी। दिल्ली स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल ने Qdenga की डोज, प्रभावकारिता और टाइमिंग के बारे में बताया है।

Qdenga (क्यूडेंगा) क्या है और इसकी डोज क्या है?

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डेंगू की वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर)




डॉ. अरविंद अग्रवाल ने बताया, Qdenga एक टेट्रावेलेंट डेंगू वैक्सीन है, जो डेंगू वायरस के सभी चार स्टीरियोटाइप के खिलाफ सुरक्षा देती है। यह बहुत बड़ी खासियत है, क्योंकि एक स्टीरियोटाइप के कारण हुआ इंफेक्शन दूसरे स्टीरियोटाइप के खिलाफ इम्यूनिटी नहीं बनाता और जब दोबारा इंफेक्शन होता है तो वह काफी गंभीर साबित होता है। इस वैक्सीन को दो डोज के शेड्यूल के साथ लगाया जाएगा। इन डोज के बीच 3 महीने का गैप रखा जाएगा। इसे लगवाने की एक खास एज ग्रुप (संभावित 4 वर्ष से 60 वर्ष) होगी और यह हर किसी को लगाया जा सकता है, चाहे उसे पहले डेंगू बुखार हुआ हो या ना हुआ हो।



कौन बनाता है Qdenga?

Qdenga जापान की टाकेडा फार्मासियुटिकल कंपनी बनाती है। टाकेडा ने इस वैक्सीन को मार्केट में लाने से पहले सालों तक रिसर्च और क्लीनिकल ट्रायल किया है। कंपनी का मकसद ऐसी वैक्सीन बनाने का था, जो विभिन्न क्षेत्र की जनता के लिए सुरक्षित और प्रभावी साबित हो सके। भारत में इसका निर्माण हैदराबाद की कंपनी करेगी और इसके आने पर डेंगू का बोझ कम करने में मदद मिलेगी। बता दें कि यह वैक्सीन और भी कई सारे देशों में इस्तेमाल हो रही है।

डेंगू से कैसे बचाती है Qdenga?

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डेंगू का मच्छर (सांकेतिक तस्वीर)




डॉ. अरविंद अग्रवाल के मुताबिक, Qdenga वैक्सीन बॉडी के इम्यून सिस्टम को स्टिम्युलेट करती है ताकि वो डेंगू वायरस के चारों स्टीरियोटाइप को पहचानकर लड़ सके। यह वायरस के एक कमजोर प्रकार का इस्तेमाल करती है, जिससे बीमारी विकसित किए बिना वायरस के खिलाफ इम्यून रेस्पॉन्स शुरू हो जाता है। एक बार वैक्सीन लगने के बाद शरीर इस वायरस को पहचानकर उसके खिलाफ एंटीबॉडीज बनाने लगता है और भविष्य में इसके शरीर में घुसने पर वायरस को तुरंत मार देता है।

यह वैक्सीन इंफेक्शन के संपर्क में आने और उसके गंभीर होने का खतरा बेहद कम कर देती है। चूंकि, दूसरे स्टीरियोटाइप के कारण दूसरी बार होने वाले इंफेक्शन के दौरान डेंगू गंभीर रूप दिखाता है, ऐसे में Qdenga जैसी टेट्रावैलेंट वैक्सीन मजबूत सुरक्षा देने में मदद करती है।



कितनी प्रभावशाली है Qdenga वैक्सीन?

क्लीनिकल ट्रायल में Qdenga ने बढ़िया रिजल्ट दिखाया है। वैक्सीन लगाने के बाद सिम्प्टोमेटिक डेंगू और उसके कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना में भारी कमी देखी गई है। हालांकि, किसी भी वैक्सीन की प्रभावकारिता व्यक्ति की उम्र, वायरस के पहले संपर्क और फैल रहे स्टीरियोटाइप्स पर निर्भर करती है।

कितना खतरनाक हो सकता है डेंगू?

डॉक्टर ने कहा कि डेंगू को हल्के में लेने की गलती ना करें, कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो जाता है। यह बीमारी कई चरणों में विकसित होती है और समय पर इलाज ना मिलने से खतरनाक साबित हो सकती है। इसकी वजह से डेंगू हेमोरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसे गंभीर रूप देखने को मिल सकते हैं, जिसके कारण प्लाज्मा लीकेज, गंभीर ब्लीडिंग, अंगों का काम ना करना और शॉक भी हो सकता है।



प्लेटलेट्स में अचानक गिरावट आने की वजह से इंटरनल ब्लीडिंग, व्हाइट फ्लूइड लीकेज हो सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर काफी नीचे आ सकता है। अगर इलाज ना मिले तो मल्टी-ऑर्गन फेलियर और मृत्यु का खतरा हो जाता है। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग इस बीमारी के हाई रिस्क ग्रुप में आते हैं। इस बीमारी का समय पर निदान ना होने या मेडिकल इंटरवेंशन ना होने पर जानलेवा परिणाम देखने को मिल सकता है। इसलिए बचाव, जल्दी निदान होना और अब वैक्सीनेशन लगवाना महत्वपूर्ण हो गया है।



भारत में Qdenga का अप्रूवल मिलना डेंगू की रोकथाम में मील का पत्थर साबित हो सकता है। क्योंकि, यह चारों स्टीरियोटाइप के खिलाफ सुरक्षा देने और बीमारी की गंभीरता कम करने का काम करती है। लेकिन, यह ध्यान रखें कि यह डेंगू से बचाव और एहतियात का विकल्प नहीं है, आपको वैक्सीनेशन के साथ बचाव, जागरुकता और साफ-सफाई का ध्यान रखना पड़ेगा।

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