गैस, कब्ज, दस्त, पेट दर्द, मतली का मतलब प्रोटीन को पचाने में कठिनाई, जानें क्या है Protein Intolerance

 

प्रोटीन शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक है, लेकिन कुछ लोगों के लिए प्रोटीन का सेवन फायदे की बजाय असुविधा का कारण बन सकता है। ऐसे लोगों के लिए अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन न करना, दालों को भिगोकर इस्तेमाल करना, डाइट में प्रोबायोटिक्स को शामिल करना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना प्रोटीन इनटॉलेरेंस से बचने के आसान उपाय हो सकते हैं।

प्रोटीन इनटॉलेरेंस क्या है (सांकेतिक तस्वीर)
प्रोटीन इनटॉलेरेंस से कैसे बचें (सांकेतिक तस्वीर)
प्रोटीन मांसपेशियों यानी मसल्स के निर्माण, इम्यून सिस्टम को मजबूत करने और कोशिकाओं के विकास और उनकी रिपेयरिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन शरीर के लिए बेहद जरूरी प्रोटीन को कई लोगों का शरीर पचा नहीं पाता। इस स्थिति को ‘प्रोटीन इनटॉलेरेंस’ कहते हैं।

पिछले कुछ सालों में प्रोटीन इनटॉलेरेंस और गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी जैसी समस्याएं पाई जा रही हैं। ये समस्याएं खासकर बच्चों और कुछ वयस्कों में भी बढ़ी हैं। इस लेख में हम बता रहे हैं कि प्रोटीन इनटॉलेरेंस क्या है और इससे कैसे राहत पाई जा सकती है।
प्रोटीन इनटॉलेरेंस क्या है?

प्रोटीन इनटॉलेरेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर आहार में मौजूद कुछ प्रोटीन को ठीक से पचा नहीं पाता। इस स्थिति में यह समझना जरूरी है कि प्रोटीन इनटॉलेरेंस फूड एलर्जी से अलग है। एलर्जी में इम्यून सिस्टम किसी पदार्थ पर प्रतिक्रिया करता है, जबकि प्रोटीन इनटॉलेरेंस में पाचन तंत्र को प्रोटीन को पचाने में दिक्कत होती है।

जिन लोगों को प्रोटीन इनटॉलेरेंस की समस्या है उन्हें प्रोटीन के सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं जैसे गैस, पेट फूलना, पेट दर्द, मतली या दस्त की तकलीफ हो सकती है। ये लक्षण अक्सर प्रोटीन युक्त चीजें खाने के बाद दिखाई देते हैं और इनकी तीव्रता हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है।


गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी क्या है?

प्रोटीन इनटॉलेरेंस से कैसे बचें (सांकेतिक तस्वीर)<br>
प्रोटीन इनटॉलेरेंस से कैसे बचें (सांकेतिक तस्वीर)


गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी शिशुओं और छोटे बच्चों में अधिक पाई जाती है। यह एलर्जी वयस्कों में कम पाई जाती है, लेकिन कुछ लोगों में डेयरी प्रोटीन के प्रति एलर्जी होती है। इस स्थिति में इम्यून सिस्टम गाय के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन पर प्रतिक्रिया करता है, जिससे कई हेल्थ प्रॉब्लम शुरू हो जाते हैं।

गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी होने पर डेयरी प्रोडक्ट से परहेज करना, शिशुओं के लिए विशेष रूप से तैयार फॉर्मूला मिल्क और वयस्कों के लिए प्लांट बेस्ड डाइट का विकल्प फायदेमंद हो सकता है। गाय के दूध के प्रोटीन से होने वाली एलर्जी में आमतौर पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं-

  • उल्टी या दस्त
  • त्वचा पर चकत्ते या खुजली
  • सांस लेने में कठिनाई
  • शिशुओं में लगातार रोना या पेट में बेचैनी


प्रोटीन इनटॉलेरेंस को कैसे पहचानें ?

प्रोटीन इनटॉलेरेंस के शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है। अगर प्रोटीन युक्त चीजों का सेवन करने के बाद आपको अक्सर पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं, तो यह प्रोटीन इनटॉलेरेंस का संकेत हो सकता है। अगर प्रोटीन युक्त चीजों के सेवन के बाद नीचे बताए गए लक्षण लगातार बने रहें, तो इसकी जांच कराना जरूरी है। डाइट में बदलाव करके प्रोटीन इनटॉलेरेंस से बचा जा सकता है। आमतौर पर प्रोटीन इनटॉलेरेंस के ये लक्षण होते हैं-

  • पेट फूलना और भारीपन
  • गैस और अपच
  • पेट में दर्द या ऐंठन
  • दस्त या कब्ज
  • मतली


वेजीटेरियन प्रोटीन पचाने में परेशानी क्यों होती है?

प्रोटीन से भरपूर दाल, चना, राजमा और सोया सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं, लेकिन कई लोगों को इन्हें खाने के बाद पाचन संबंधी परेशानी होती है। इसके कई कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए- चना, राजमा जैसी चीजों में जटिल कार्बोहाइड्रेट और फाइबर होते हैं, जिनसे गैस बन सकती है।

कुछ लोगों में इन्हें पचाने के लिए जरूरी डाइजेस्टिव एंजाइम की कमी हो सकती है। चना, राजमा, लोबिया जैसी चीजों को गलत तरीके से पकाने या अधिक मात्रा में खाने से लक्षण और बिगड़ सकते हैं। दाल या फलियों को ठीक से भिगोए बिना खाने से पेट फूलना, बेचैनी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। दालों को भिगोने, अंकुरित करने या अच्छी तरह पकाने जैसी सरल विधियों से इन्हें पचाना आसान हो जाता है।


प्रोटीन इनटॉलेरेंस से कैसे बचें ?

प्रोटीन इनटॉलेरेंस को कैसे पहचानें (सांकेतिक तस्वीर)<br>
प्रोटीन इनटॉलेरेंस को कैसे पहचानें (सांकेतिक तस्वीर)


प्रोटीन इनटॉलेरेंस से बचने के लिए नीचे दिए गए कुछ आसान तरीकों को अपनाया जा सकता है-

  • एक साथ अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन करने की बजाय धीरे-धीरे प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं।
  • पाचन में सुधार के लिए दालों और फलियों को अच्छी तरह भिगोकर और पकाकर खाएं।
  • सिर्फ एक प्रकार के प्रोटीन पर निर्भर रहने की बजाय विभिन्न प्रकार के प्रोटीन स्रोतों को डाइट में शामिल करें।
  • गट हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए दही या फर्मेंटेड फूड जैसे प्रोबायोटिक्स का सेवन करें।
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें, रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।


प्रोटीन इनटॉलेरेंस और एलर्जी के फर्क को समझें

प्रोटीन इनटॉलेरेंस और गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी को अक्सर गलत समझा जाता है और एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल किया जाता है, जबकि ये दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। प्रोटीन इनटॉलेरेंस मुख्य रूप से पाचन से संबंधित है, जबकि एलर्जी इम्यून सिस्टम से जुड़ी होती है।

कई लोग प्रोटीन युक्त चीजें खाने के बाद गैस या पेट फूलने जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं। समय के साथ यह समस्या को और भी गंभीर बना सकता है। इन लक्षणों को जल्दी पहचानना और समय रहते आहार में बदलाव करना बहुत फायदेमंद हो सकता है। वेजीटेरियन प्रोटीन स्रोतों को ठीक से तैयार करना और धीरे-धीरे उन्हें डाइट में शामिल करना असुविधा को कम करने में सहायक हो सकता है।


सेहत के प्रति जागरूक रहें

प्रोटीन सेहत के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन हर व्यक्ति की पाचन क्षमता अलग होती है। यदि आपका शरीर प्रोटीन सेवन पर लगातार नकारात्मक प्रतिक्रिया करता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। अच्छी सेहत के लिए प्रोटीन इनटॉलेरेंस और एलर्जी के प्रति जागरूकता और पौष्टिक आहार की सही समझ से इस समस्या से बचा जा सकता है और इसे कंट्रोल भी किया जा सकता है।

अगर आपको लगातार पाचन संबंधी समस्याएं हो रही हैं या बिना वजह वजन कम हो रहा है, तो ये प्रोटीन इनटॉलेरेंस के लक्षण हो सकते हैं। अगर प्रोटीन इनटॉलेरेंस के लक्षण बढ़ने लगें, इसका असर आपकी दिनचर्या पर पड़ने लगे, तो अपनी जांच कराएं। इससे समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।

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