Which Foods Increase Uric Acid Level: प्यूरीन से भरे फूड खाने पर यूरिक एसिड का लेवल बढ़ता है। जब यह वेस्ट मटेरियल शरीर से बाहर नहीं निकल पाता तो गाउट का खतरा बढ़ जाता है। हाई फ्रुक्टोज, हाई शुगर, ऐल्कोहॉल, रेड मीट आदि चीजों में प्यूरीन की मात्रा बहुत ज्यादा पाई जाती है। इनके बारे में जागरूक करने के लिए डाइटिशियन डॉ. अर्चना बत्रा ने जानकारी दी है।

आमतौर पर यूरिक एसिड खून में घुल जाता है और पेशाब के साथ बाहर निकल जाता है। लेकिन जब शरीर में यूरिक एसिड का उत्पादन ज्यादा हो जाए या यूरिक एसिड के बाहर निकलने की रफ्तार धीमी हो जाए तो शरीर में इसका लेवल बढ़ने लगता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है।
जोड़ों में बन जाते हैं क्रिस्टल
लंबे समय तक यूरिक एसिड का लेवल बढ़ा हुआ रहने से जोड़ों के बीच छोटे-छोटे क्रिस्टल बन जाते हैं, जिससे गाउट (गठिया) नाम की दर्दनाक बीमारी होती है। डॉ. अर्चना बत्रा अपने पेशेंट्स को यूरिक एसिड लेवल को नॉर्मल लेवल में रखने की सलाह देती हैं। पुरुषों का यूरिक एसिड 3.4 से 7.0 mg/dL के बीच और महिलाओं का यूरिक एसिड 2.4 से 6.0 mg/dL के बीच रहना चाहिए।रेड मीट और ऑर्गन मीट
डाइटिशियन के मुताबिक, रेड मीट और ऑर्गन मीट (जानवरों का लिवर-किडनी) का अत्यधिक सेवन करने पर यूरिक एसिड के लेवल में बढ़ोतरी होती है। इन मीट के अंदर प्यूरीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए यह यूरिक एसिड बढ़ाने में सीधी भूमिका निभाते हैं। जब मरीज इनका सेवन कम करते हैं, तो उनके जोड़ों के दर्द और फ्लेयर अप में तेजी से कमी आती है। खासतौर से जिन मरीजों का यूरिक एसिड बढ़ा हो, लाइफस्टाइल सुस्त हो या गाउट की फैमिली हिस्ट्री हो, उन्हें इन मीट का सेवन लिमिट में ही करना चाहिए।
सीफूड
एक्सपर्ट के मुताबिक, सीफूड का सेवन करते हुए भी ध्यान रखना चाहिए। मछलियों को हेल्दी फूड माना जाता है, लेकिन इनके अंदर प्यूरीन की मात्रा काफी होती है। खासकर सार्डिन, एंकोवी और शैलफिश का सेवन कम करना चाहिए। बढ़े हुए यूरिक एसिड से परेशान लोग अगर इन मछलियों का थोड़ी मात्रा में भी सेवन करते हैं तो उनका लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जिससे जोड़ों का दर्द गंभीर हो जाता है। इन सीफूड प्रोडक्ट्स का सेवन कम करके यूरिक एसिड लेवल को स्थिर रख सकते हैं और जोड़ों में सूजन व अकड़न से राहत पा सकते हैं।ऐल्कोहॉल
ऐल्कोहॉल भी यूरिक एसिड बढ़ाती है, जिसमें बीयर का रोल सबसे ज्यादा है। यह यूरिक एसिड बढ़ाने के साथ किडनी का फंक्शन भी कम कर देती है, जिससे यह वेस्ट प्रोडक्ट बाहर नहीं निकल पाता। जहां ऐल्कोहॉल में पहले से प्यूरीन की मात्रा होती है, वहीं बीयर बनाने के लिए उसमें डाला जाने वाला यीस्ट भी प्यूरीन से भरा होता है। जो लोग यूरिक एसिड को घटाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें ऐल्कोहॉल और बीयर से बिल्कुल दूरी बना लेनी चाहिए।शुगर और फ्रुक्टोज से भरे फूड-ड्रिंक
सोडा, पैकेटबंद जूस, हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सीरप आदि में प्यूरीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। यह प्यूरीन मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर यूरिक एसिड का उत्पादन तेजी से बढ़ाते हैं। डॉ. अर्चना के मुताबिक इन फूड्स के साथ आपको चीनी का सेवन भी कम कर देना चाहिए। यह यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के साथ वजन कंट्रोल करने में भी मदद करेगा और सिस्टेमिक इंफ्लामेशन को कम करेगा।रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स वाले फूड
सफेद ब्रेड, केक और मैदा से बने खाद्य पदार्थों में प्यूरीन नहीं होता, लेकिन यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देते हैं। जिससे शरीर प्रभावी ढंग से यूरिक एसिड को बाहर नहीं निकाल पाता है। इसकी वजह से खून में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने लगता है। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स वाले फूड की जगह मरीजों को साबुत अनाज का सेवन करना चाहिए।
सैचुरेटेड फैट और फ्राइड फूड
सैचुरेटेड फैट और फ्राइड फूड का अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए। फैट और अनहेल्दी फूड से भरी डाइट किडनी फंक्शन को प्रभावित करती है और शरीर में इंफ्लामेटरी रिएक्शन की तादाद भी बढ़ जाती है। दोनों स्थितियों के कारण यूरिक एसिड का मेटाबॉलिज्म घट जाता है। डाइट में हेल्दी फैट और हेल्दी कुकिंग मेथड जोड़ने से ना केवल यूरिक एसिड लेवल कंट्रोल कर सकते हैं, बल्कि हाई कोलेस्ट्रॉल, कार्डियोवैस्कुलर डिजीज जैसे कई रोगों का खतरा कम कर सकते हैं।यूरिक एसिड लेवल कंट्रोल करने का मतलब केवल खाने पर लगाम लगाना नहीं है, बल्कि लाइफ में बैलेंस और माउंडफुलनेस लाना है। लंबे समय तक फायदा पाने के लिए मरीजों को हाई यूरिक एसिड ट्रिगर करने वाले फूड्स से दूरी बना लेने के साथ हाइड्रेट रहने, फाइबर से भरी डाइट लेने और मेटाबॉलिक फंक्शन को सही रखने पर ध्यान देना चाहिए।
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