Future Of Electric Vehicles: ईरान की अमेरिका और इस्राइल से वॉर के बाद दुनिया को एक बात का जरूर ऐहसास हो गया कि फ्यूल और गैस क्राइसिस की स्थिति कभी भी बन सकती है और दुनिया में हाहाकार मचना तय है। हमारी ईंधन पर निर्भरता काफी जोखिम भरी हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति में बाधा का खतरा केवल एक आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि फ्यूचर मोबिलिटी के लिए बड़ी चेतावनी है और ऐसे में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) उम्मीद की एक किरण तो हैं।

फ्यूचर मोबिलिटी
जी हां, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, यानी EV, जिसे एक्सपर्ट फ्यूचर मोबिलिटी का सबसे बड़ा जरिया मान रहे हैं और इसके पीछे काफी सारी वजहें भी हैं। हालांकि, ईवी को लेकर अब तक दुनियाभर में उस तरह का सकारात्मक माहौल नहीं बना है, लेकिन जब कल को लोगों के पास विकल्प नहीं रहेंगे, तो इलेक्ट्रिक कार और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के साथ ही बैटरी चालित अन्य माध्यमों के वाहनों को अपनाने के अलावा हमारे पास और ज्यादा विकल्प नहीं होगा।
भारत में ईवी सेगमेंट में ये सारी कंपनियां एक्टिव
भारतीय बाजार में बीते काफी वर्षों से इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया और हुंडई जैसी कंपनियां सक्रिय हैं और उनके एक से बढ़कर एक विकल्प हैं। बीते कुछ वर्षों के दरमियां विनफास्ट, किआ, बीवाईडी के साथ ही मर्सिडीज बेंज और बीएमडब्ल्यू के साथ ही टेस्ला जैसी कंपनियां अपनी स्थिति बेहतर करते हुए अलग-अलग प्राइस सेगमेंट की ईवी से जुड़ीं लोगों की जरूरतें पूरी कर रही हैं। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में टीवीएस, बजाज, ओला, एथर, हीरो विडा, एम्पीयर, सिंपल एनर्जी, रिवर और काइनेटिक समेत काफी सारी कंपनियों की गाड़ियां हैं।
ईवी जरूरी भी और मजबूरी भी...
अब बात आती है कि क्या मौजूदा फ्यूल क्राइसिस की स्थिति में वाकई ईवी उम्मीद की किरण हैं, तो इसका जवाब निश्चित रूप से हां हैं। मान लीजिए कि आपके पास दो विकल्प हैं, एक तो ये कि आपको एक घने जंगल से गुजरना है, जहां हिंसक जानवरों का खतरा है, और दूसरा वो सुनसान रास्ता, जहां कोई खतरा नहीं है और आपकी भूख-प्यास मिटाने के साथ ही सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक पहुंचने का समाधान है। आप में से ज्यादातर लोग दूसरा विकल्प चुनेंगे, क्योंकि हम इंसानों के पास ज्यादा सोचना का समय और विकल्प होता नहीं है।
सरकार ने E85 फ्यूल को अनिवार्य किया तो...?
दूसरी बात यह भी है कि वैश्विक तेल संकट के एक सुगम समाधान के रूप में लगभग हर देश अब कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करने की कोशिश में है और भारत के लिए यह सबसे ज्यादा जरूरी है, क्योंकि यह सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है और यहां वाहनों की संख्या लगातार रेकॉर्ड स्तर को छू रही है। हाल ही में एक खबर आई कि भारत सरकार आने वाले समय में E85 फ्यूल (85 फीसदी एथेनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल का मिश्रण) के लिए मसौदा नीति जारी करने की तैयारी कर रही है। मौजूदा समय में E20 पेट्रोल (20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण) का चलन है और इसे लेकर लोगों में ज्यादा खुशी है नहीं, क्योंकि समय-समय पर खबरें आती हैं कि ई20 फ्यूल से माइलेज घटता है और इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित होती है। ऐसे में आने वाले समय में ई85 अगर प्रभाव में आता है तो फिर लोगों की प्रतिक्रिया क्या होगा, ये हम-आप बेहतर समझ सकते हैं।
ईवी अडॉप्शन के सामने काफी सारी चुनौतियां भी... लेकिन समय होगा बेहतर
कुल मिलाकर बात वहीं आती है कि अगर हमें बेहतर और सुगम भविष्य चाहिए, जहां तेल और गैस पर निर्भरता कम हो, तो मोबिलिटी के इलेक्ट्रिफिकेशन को अपनाने के अलावा और कोई ज्यादा विकल्प है नहीं। हां, मौजूदा समय में ईवी अडॉप्शन के सामने काफी सारी चुनौतियां हैं, जिनमें कार या बाइक की शुरुआती ज्यादा लागत और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का बेहतर विकास नहीं, लेकिन ये सारी चुनौतियां आने वाले समय में खत्म हो सकती हैं और इसके लिए वाहन कंपनियों के साथ ही सरकार भी पूरे जोर-शोर से लगी हुई है। ऐसे में निकट भविष्य में सड़कों पर आपको ज्यादातर इलेक्ट्रिक वाहन दिखने लगे तो समझिएगा कि बेहतर भविष्य की कल्पना धीरे-धीरे हकीकत की तरफ बढ़ रही है।
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