इलेक्ट्रिक कार या बाइक-स्कूटर खरीदना कितना फायदे का सौदा है? कहीं यह सामान्य पेट्रोल-डीजल कारों के मुकाबले नुकसानदेह तो नहीं? ये सारे सवाल आपके जेहन में आ रहे होंगे और आप इनके जवाब भी ढूंढ रहे होंगे। ऐसे में आज हम आपको EV की रनिंग कॉस्ट और शुरुआती लागत के लेकर रेंज एंजाइटी, बैटरी वॉरंटी और रिसेल से जुड़ीं चिंताओं समेत वो सारी जरूरी बातें बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में जानकर आपकी सारी चिंताएं दूर हो जाएंगी।

ईवी से क्या-क्या फायदे?
इलेक्ट्रिक कार या मोटरसाइकल-स्कूटर खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनकी रनिंग कॉस्ट कम होती है। आम तौर पर जिन कारों को चलाने में प्रति किलोमीटर 5-10 रुपये खर्च होते हैं, वहीं इलेक्ट्रिक कारों से यह लागतर घटकर 2-3 रुपये पर आ जाती है। वहीं, बैटरी चालित बाइक-स्कूटर का खर्च तो पैसे में आ जाता है, यानी हर महीने बंपर बचत। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में ज्यादा मैकेनिक्स नहीं होते हैं और मूविंग पार्ट्स कम होने की वजह से इनके मेंटेनेंस में भी ज्यादा खर्च नहीं आता। इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाना काफी आसान है और इनमें पेट्रोल-डीजल वीइकल्स की तरह ज्यादा शोर-शराबा भी नहीं होता है।
मौजूदा समय में क्या कुछ ईवी के फेवर में नहीं
इलेक्ट्रिक वाहनों के नुकसान के बारें में बताएं तो सबसे पहले तो यह बताना जरूरी है कि इनकी शुरुआती लागत ज्यादा होती है। यानी, जो पेट्रोल या सीएनजी कार आपको 7-8 लाख रुपये में मिल जाएगी, उन्हीं सारी खूबियों वाली इलेक्ट्रिक कार के लिए आपको 10-12 लाख रुपये चुकाने पड़ सकते हैं। और भी महंगी गाड़ियों में यह कॉस्ट और बढ़ता जाता है। ईवी के साथ एक और बड़ी चिंता इनकी बैटरी वॉरंटी को लेकर होती है कि अगर बैटरी खराब हो गई तो फिर चेंज कराने में कितना खर्च आएगी और बैटरी कितने दिन चल चलेगी। हालांकि, टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां अब बैटरी पर लाइफटाइम वॉरंटी भी देने लगी है। ईवी ओनर्स को एक और परेशानी यह होती है कि उन्हें रिसेल वैल्यू कितनी मिलेगी, यानी अगर ईवी को बेचने का मन हुआ तो अच्छे दाम मिलेंगे या नहीं।
चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर उतना मजबूत नहीं
मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर सबसे ज्यादा चिंता चार्जिंग स्टेशन की होती है कि मान लीजिए कि गाड़ी लेकर निकले और पता चला रास्ते में बैटरी खत्म हो गई, तो फिर क्या करेंगे। कहां-कहां पब्लिक चार्जिंग स्टेशन ढूंढे़ंगे और कितनी देर में बैटरी चार्ज होगी। यह चिंता ईवी अडॉप्शन के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। दरअसल, पेट्रोल-डीजल या सीएनजी पंप तो गली-मोहल्ले से लेकर हाइवे-एक्सप्रेसवे तक आसानी से जगह-जगह मिल जाते हैं, लेकिन पब्लिक चार्जिंग स्टेशन की संख्या फिलहाल सीमित है, ऐसे में ईवी ओनर्स को निश्चित तौर पर दिक्कतें होती हैं और वे लंबी दूरी तय करने के लिए ईवी पर भरोसा नहीं करते हैं। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट (Ref) की रिपोर्ट इस बारे में और विस्तार से जानकारी देती है।
सरकारी कोशिशें तेज
अब बात आती है कि अगर इलेक्ट्रिक गाड़ियां ही फ्यूचर मोबिलिटी है तो फिर इस दिशा में कितनी कोशिशें सरकार और निजी कंपनियों द्वारा होती हैं। आपको बता दें कि केंद्र और राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए कई तरह की सब्सिडी दे रही है और ईवी पर टैक्स बेनिफिट्स भी मिल रहे हैं। साथ ही देशभर में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। वहीं, निजी कंपनियों के साथ ही ईवी कंपनियां किफायती दाम में बेहतर प्रोडक्ट लाने के साथ ही चार्जिंग नेटवर्क मजबूत कर लोगों को बिना किसी चिंता के ईवी अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। ऐसे में आने वाला समय निश्चित रूप से ईवी का है और आपको सड़कों पर अच्छी-खासी संख्या में इलेक्ट्रिक कार और बाइक-स्कूटर के साथ ही कॉमर्शियल ईवी भी दिख जाएंगी।
किनके लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां सही
आखिर में बात आती है कि आखिरकार किन लोगों के लिए इलेक्ट्रिक कारें या बाइक-स्कूटर ज्यादा बेहतर विकल्प हैं? आपको बता दें कि आप अगर डेली 30-80 किलोमीटर कार से सफर करते हैं तो 4-6 साल में आप कार की एक्स्ट्रा कीमत वसूल कर सकते हैं। इलेक्ट्रिक गाड़ियां उनलोगों के लिए बेस्ट है, जिनके पास घर पर पार्किंग और चार्जिंग की सुविधा है। वहीं, जो लोग अक्सर हाइवे पर लंबी दूरी कार से तय करते हैं, उनके लिए फिलहाल ईवी उतना बेहतर विकल्प नहीं है। यहां एक बात बताना जरूरी है कि पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तरह अभी ईवी का सेकेंड हैंड मार्केट तैयार नहीं हुआ है, ऐसे में रिसेल के बारे में सोचना शायद फायदेमंद नहीं है।
Comments
Post a Comment