मोबाइल पर रील देखने, गेम खेलने से दिमाग पर क्या असर होता है, Dopamine Detox से मानसिक स्वास्थ्य सुधारें

 

सोशल मीडिया पर घंटों रील देखने या ऑनलाइन गेम खेलने से लोगों को खुशी तो महसूस होती है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब लोग इसके आदी हो जाते हैं। ऐसे लोगों को फोकस होकर पढ़ाई करना, काम करना या शांत बैठना बोरिंग लगने लगता है। इसका कारण है डोपामाइन। जब भी हम कोई ऐसा काम करते हैं जिससे हमें खुशी महसूस होती है, तो हमारा दिमाग डोपामाइन रिलीज करता है। यही कारण है कि हम बार-बार वही काम दोहराना चाहते हैं। इससे बचने के लिए डोपामाइन डिटॉक्स जरूरी है।

डोपामाइन डिटॉक्स क्या है (सांकेतिक तस्वीर)
सोशल मीडिया से दूरी कैसे बनाएं (सांकेतिक तस्वीर)
डिजिटल युग में जीने के तरीके बदल गए हैं। सोशल मीडिया इस कदर लोगों के जीवन से जुड़ गया है कि खाली समय मिलते ही लोग तुरंत अपना मोबाइल उठा लेते हैं। फिर रील स्क्रॉल करते हुए घंटों बीत जाते हैं और समय का पता ही नहीं चलता। इसका कारण डोपामाइन है। डोपामाइन दिमाग का एक केमिकल (न्यूरोट्रांसमीटर) है जो हमें खुशी, संतुष्टि और मोटिवेशन महसूस कराता है।

घंटों रील देखने या ऑनलाइन गेम खेलने से दिमाग हाई लेवल की उत्तेजना (स्टिमुलेशन) का आदी हो जाता है। फिर ऐसे लोगों के लिए काम या पढ़ाई में फोकस करना मुश्किल हो जाता है। स्क्रीन टाइम की लत से बचने के लिए डोपामाइन डिटॉक्स करना जरूरी है। इस लेख में हम डोपामाइन डिटॉक्स की वजहें और उसके फायदे के बारे में बता रहे हैं।




डोपामाइन डिटॉक्स क्या है ?

डोपामाइन डिटॉक्स एक तरह का उपवास है। इसमें व्यक्ति को कुछ समय के लिए उन चीजों से दूरी बनानी होती है जो उसे तुरंत खुशी देती हैं। इसका उद्देश्य दिमाग को रीसेट करना होता है, ताकि वह फिर से सामान्य और सरल गतिविधियों में भी आनंद महसूस कर सके।

डोपामाइन डिटॉक्स का मतलब है बहुत ज्यादा और गैरजरूरी उत्तेजना को कम करना। डोपामाइन डिटॉक्स की प्रक्रिया को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि डोपामाइन को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता और न ही करना चाहिए। यह शरीर के लिए जरूरी है।




डोपामाइन ट्रिगर्स को कैसे पहचानें?

सोशल मीडिया से दूरी कैसे बनाएं (सांकेतिक तस्वीर)<br>
सोशल मीडिया से दूरी कैसे बनाएं (सांकेतिक तस्वीर)


डोपामाइन ट्रिगर्स वो चीजें होती हैं जो हमें तुरंत खुशी देती हैं, लेकिन लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकती हैं। कोई भी व्यक्ति अपनी आदतों को देखकर डोपामाइन ट्रिगर्स को आसानी से पहचान सकता है। अगर आपको लगता है कि कोई आदत आपको कंट्रोल कर रही है, तो वह डोपामाइन ट्रिगर हो सकती है, जैसे कोई काम बिना सोचे बार-बार करना और उसके बाद पछताना, समय बर्बाद करना और खुद पर कंट्रोल न रहना। निम्नलिखित आदतें डोपामाइन ट्रिगर्स का संकेत हो सकती हैं-



  • बार-बार मोबाइल चेक करना
  • सोशल मीडिया स्क्रॉल करना
  • वीडियो या वेब सीरीज लगातार देखना
  • वीडियो गेम खेलना
  • जंक फूड और मीठा ज्यादा खाना
  • बिना मतलब इंटरनेट चलाना


डोपामाइन डिटॉक्स कैसे करें?

डोपामाइन डिटॉक्स करना मुश्किल नहीं है। इसकी शुरुआत धीरे-धीरे करें। अच्छे रिजल्ट देखकर आप खुद इसे करना चाहेंगे। ऐसे करें डोपामाइन डिटॉक्स की शुरुआत-

  • छोटे समय से शुरू करें- शुरुआत में 2-4 घंटे के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहें। फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। आप चाहें तो हफ्ते में एक दिन 'नो स्क्रीन डे' भी रख सकते हैं।
  • फोन का उपयोग कम करें- बार-बार नोटिफिकेशन चेक करने से बचें। जरूरत न हो तो फोन को साइलेंट मोड पर पर या खुद से दूर रखें।
  • सोशल मीडिया से ब्रेक लें- कुछ समय के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक या यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दूरी बनाएं।
  • अपने लिए समय निकालें- डिजिटल ब्रेक के समय को कुछ नया सीखने या अपने शौक पूरे करने के लिए इस्तेमाल करें।




डोपामाइन डिटॉक्स के दौरान क्या करें?

शॉर्टकट खुशी के नुकसान (सांकेतिक तस्वीर)<br>
शॉर्टकट खुशी के नुकसान (सांकेतिक तस्वीर)


आज के समय में हम लगातार डिजिटल चीजों से घिरे रहते हैं। हर समय नोटिफिकेशन, मैसेज और मनोरंजन उपलब्ध होता है। इससे हमारा दिमाग हमेशा एक्टिव और उत्तेजित रहता है। डोपामाइन डिटॉक्स करते समय एकदम से सब कुछ छोड़ना मुश्किल होता है। इसके लिए अपनी आदतों को धीरे-धीरे बदलें।

डोपामाइन डिटॉक्स के दौरान अपने विचारों पर ध्यान दें। सोचें कि आपको वास्तव में किस चीज से खुशी मिलती है और क्या सिर्फ समय बर्बाद करता है। डोपामाइन डिटॉक्स वह समय है जो आपको खुद से मिलवाता है। इस दौरान जब आप सोशल मीडिया से दूर हों उस समय ऐसी गतिविधियां करें जो कम उत्तेजना देती हैं, लेकिन लंबे समय में ज्यादा संतुष्टि देती हैं, जैसे-



  • किताब पढ़ना
  • टहलना
  • मेडिटेशन
  • डायरी लिखना
  • परिवार-दोस्तों से बात करना


डोपामाइन डिटॉक्स के 5 फायदे

जब कोई व्यक्ति डोपामाइन डिटॉक्स करता है, तो उसे निम्नलिखित फायदे मिलते हैं-

  1. फोकस बढ़ना-जब आप ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहते हैं, तो आपका दिमाग ज्यादा अच्छे से काम पर फोकस कर पाता है।
  2. मोटिवेशन बढ़ना-छोटी-छोटी चीजों में भी मजा आने लगता है, जैसे किताब पढ़ना या कुछ नया सीखना।
  3. मन शांत रहना-डिजिटल शोर कम होने से दिमाग रिलैक्स महसूस करता है और चिंता कम होती है।
  4. प्रोडक्टिविटी बढ़ना-समय का सही इस्तेमाल करने से काम जल्दी पूरा होता है।
  5. खुद पर कंट्रोल-आदतों पर कंट्रोल करने खुद पर नियंत्रण बढ़ता है।





मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी ये डिटॉक्स

स्क्रीन टाइम का दिमाग पर असर (सांकेतिक तस्वीर)<br>
स्क्रीन टाइम का दिमाग पर असर (सांकेतिक तस्वीर)


जब दिमाग को हर समय आसान और जल्दी मिलने वाली खुशी मिलती है, तो वह मेहनत वाले कामों से बचने लगता है। यही कारण है कि कई लोग बिना कारण थका हुआ, बोर या अनमोटिवेटेड महसूस करते हैं।

जब दिमाग ऐसी शॉर्टकट खुशियों का आदी हो जाता है तो काम में ध्यान कम लगता है, आलस बढ़ता है, काम टालने की आदत बन जाती है, रिश्तों में रुचि कम हो जाती है, तनाव और चिंता बढ़ती है। डोपामाइन डिटॉक्स व्यक्ति को संतुलन सिखाता है, यह बताता है कि असली खुशी सिर्फ तुरंत मिलने वाली चीजों में नहीं, बल्कि मेहनत, धैर्य और सार्थक कामों में होती है।




सच्ची खुशी को पहचानें

डोपामाइन डिटॉक्स से धीरे-धीरे व्यक्ति महसूस करता है कि उसका ध्यान बेहतर हो रहा है, वह भावनात्मक रूप से स्थिर हो रहा है, उसका अनुशासन बढ़ रहा है, वह पहले से ज्यादा खुश और संतुष्ट महसूस कर रहा है। डोपामाइन डिटॉक्स का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी जिंदगी से सारी खुशियां हटा दें। इसका मतलब है अपनी आदतों को समझना और उनमें संतुलन लाना।

अगर आप बार-बार फोन इस्तेमाल करते हैं, ध्यान नहीं लगा पाते या मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करते हैं, तो डोपामाइन डिटॉक्स आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। छोटे-छोटे कदम उठाएं। धीरे-धीरे अपनी आदतों को सुधारें। समय के साथ आप खुद में बड़ा बदलाव महसूस करेंगे। आप पहले से ज्यादा फोकस, ज्यादा शांति और ज्यादा खुशी महसूस करेंगे।

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