मरीज ने रो-कर पूछा, ऑपरेशन के बाद दोबारा क्यों हो गया हर्निया? फिर डॉक्टर ने बताया मेन कारण

 

Hernia Recurrence After Surgery: किसी भी तरह की सर्जरी से हर व्यक्ति कतराता है। क्योंकि, एक तो इसमें पैसा काफी लगता है और ऊपर से रिकवरी में समय लग जाता है। लेकिन हर्निया के कुछ मामले में सर्जरी के बाद दोबारा भी यह परेशानी देखने को मिल जाती है। जिसके बाद मरीज का परेशान होना लाजमी है, ऐसे मरीजों की कंफ्यूजन को सर्जन Dr. Ratnesh Jenaw ने दूर किया है।

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ऑपरेशन के बाद हर्निया आने का कारण (सांकेतिक तस्वीर)
हर्निया का इलाज करने के लिए सर्जरी की जाती है। हर्निया में कनेक्टिव टिश्यू या आसपास मौजूद अन्य प्रकार की मांसपेशी के किसी कमजोर हिस्से से अंदरुनी अंग या टिश्यू बाहर आ जाता है। सर्जरी इस बीमारी का प्रभावी इलाज है, लेकिन कई बार सर्जरी के बाद फिर से हर्निया की समस्या देखी जाती है। जनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जन होने के नाते मेरे पास अक्सर हर्निया के मरीज आते हैं। जिसमें से एक मरीज ने किसी अस्पताल में हर्निया का ऑपरेशन करवाया था, मगर इसके बाद दोबारा उसे यह समस्या हो गई। आंखों में आंसू के साथ मरीज का एक ही सवाल था कि आखिर सर्जरी के बाद हर्निया वापस क्यों आया, जिसके बाद मैंने उसे कारण और लक्षण समझाए।


हर्निया के दोबारा आने का क्या मतलब है?

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हर्निया कैसे होता है (सांकेतिक तस्वीर)
हर्निया के दोबारा आने (Hernia Recurrence) का मतलब पिछली सर्जिकल साइट पर या उसके आसपास फिर से हर्निया हो जाना है। यह स्थिति पिछली सर्जरी के कुछ हफ्ते बाद से कुछ महीने या कुछ साल बाद भी हो सकती है। हर्निया की यह वापसी पिछली बार वाले लक्षणों के साथ भी हो सकती है, जैसे- उभार दिखना, असहजता या दर्द होना, जो कि खासतौर से वजन उठाने, खांसी या जोर पड़ने पर अक्सर दिखते हैं।





हालांकि, कुछ मॉडर्न सर्जिकल तकनीकों ने हर्निया रिकरेंस की संभावना काफी कम कर दी है, लेकिन कोई भी प्रक्रिया इसके ना लौटने की गारंटी नहीं दे सकती है। दोबारा आने की संभावना कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है, जैसे- हर्निया का प्रकार, सर्जरी का तरीका और मरीज की स्थिति भी।


सर्जरी के बाद हर्निया दोबारा आने का कारण?

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सर्जरी में इस्तेमाल होने वाला मैश (सांकेतिक तस्वीर)

हर्निया रिकरेंस का कोई एक खास कारण नहीं है, बल्कि यह कई सारे फैक्टर्स की मिली-जुली संभावना है। एक सबसे बड़ा कारण सर्जरी वाली जगह पर फिर से टिश्यू में कमजोरी आना है। अगर टिश्यू पूरी तरह रिकवर नहीं कर पाते या नाजुक बने रहते हैं तो फिर से हर्निया को जगह मिल सकती है।





इसके वापस आने में सर्जरी की तकनीक भी एक बड़ा रोल निभाती है। कुछ मामलों में, खासतौर से मेश (mesh) का इस्तेमाल ना करने वाली पुरानी तकनीक से हर्निया रिकरेंस का खतरा ज्यादा रहता है। आज के दौर में टिश्यू रिपेयरिंग को मजबूत करने और रिकरेंस को घटाने के लिए मेश का इस्तेमाल करना आम है।


इसके अलावा पेट पर पड़ने वाला प्रेशर भी है। हेवी लिफ्टिंग, क्रॉनिक कफिंग, कब्ज, मोटापा जैसी समस्याएं एब्डोमिनल वॉल पर प्रेशर डालती है, जिससे रिपेयर की गई जगह पर फिर से हर्निया हो सकता है।




किन लोगों को होता है ज्यादा खतरा?


कुछ लोगों को हर्निया रिकरेंस का खतरा दूसरों से ज्यादा होता है। जिन मरीजों का वजन ज्यादा होता है, उनके पेट की एब्डोमिनल वॉल पर ज्यादा प्रेशर पड़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके अलावा, स्मोकिंग करने वाले लोगों को भी हाई रिस्क होता है, क्योंकि धूम्रपान से टिश्यू रिपेयरिंग और कोलाजन की मजबूती प्रभावित होती है।


पुरानी खांसी या कब्ज की समस्या लंबे समय से झेल रहे लोगों की पेट की मांसपेशियों पर बार-बार तनाव पड़ता रहता है, जिससे हर्निया रिकरेंस का खतरा बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, सर्जरी के बाद जल्दी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या हेवी फिजिकल एक्टिविटी करने से भी हीलिंग प्रोसेस बाधित होता है। इसके अलावा जिन लोगों को मल्टीपल हर्निया रिपेयर या कॉम्प्लेक्स हर्निया से गुजरना पड़ा हो, उनको भी अधिक खतरा होता है।




किन लक्षणों पर रखें ध्यान?


सही समय पर इलाज पाने के लिए शुरुआती संकेतों के बारे में पता होना जरूरी है। मरीजों को सर्जरी वाली जगह पर उभार या सूजन देखते ही डॉक्टर से बात करनी चाहिए। इसके साथ एक्टिविटी करने पर दर्द बढ़ना या सर्जिकल साइट पर भारीपन को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में हर्निया रिकरेंस बहुत धीमी रफ्तार से होती है, जिस वजह से इन शुरुआती संकेतों को पहचानकर सही वक्त पर इलाज प्राप्त किया जा सकता है।


हर्निया दोबारा आने से कैसे रोकें?

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हर्निया से कैसे बचें (सांकेतिक तस्वीर)

हर्निया रिकरेंस के सभी मामले रोके नहीं जा सकते हैं, लेकिन मरीज कुछ कदम उठाकर इसका खतरा कुछ हद तक कम कर सकते हैं। जिसमें पोस्ट-सर्जिकल दिशा-निर्देशों का ध्यान से पालन करना बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें कुछ वक्त के लिए हेवी लिफ्टिंग और भारी एक्टिविटी ना करना भी शामिल होता है।




आपको अपने शारीरिक वजन को हेल्दी पैरामीटर में रखना है। बैलेंस्ड डाइट और रेगुलर नॉर्मल फिजिकल एक्सरसाइज से एब्डोमिनल वॉल पर पड़ने वाला प्रेशर कम होता है। खांसी और कब्ज जैसी पुरानी बीमारियों को मैनेज करने से भी खतरा कम होता है।


इसके अलावा, स्मोकिंग छोड़ने से हीलिंग तेज होती है और हर्निया के दोबारा आने का खतरा भी कम हो जाता है। साथ में आपको सही मार्गदर्शन के अंदर वजन उठाने की सही तकनीक और कोर मसल्स को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज सीखनी चाहिए।


कुल मिलाकर आपको यह समझना जरूरी है कि सर्जरी के बाद हर्निया रिकरेंस की संभावना होती है, लेकिन यह अनिवार्य भी नहीं है। मॉडर्न सर्जिकल तकनीक के साथ सही पोस्ट-ऑपरेटिव केयर और लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन के साथ इसके दोबारा आने का खतरा कम किया जा सकता है। मरीज इस खतरे को कम करने के लिए रिकवरी को सही रख सकता है, जिसके लिए मेडिकल सलाह को फॉलो करना, स्वास्थ्य को सही रखना और शरीर पर तनाव डालने वाली एक्टिविटी करते हुए ध्यान रखना चाहिए।

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