सफेद बाल फिर से उग सकते हैं काले? आयुर्वेदिक डॉ. ने कहा कुछ हद तक संभव, बताई जड़ी-बूटियां, तेल और मास्क
ये तो सभी जानते हैं कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे सफेद बालों की संख्या भी बढ़ती जाती है। लेकिन उस स्थिति का क्या जिसमें उम्र से पहले ही वाइट हेयर दिखने लगते हैं? क्या इन्हें आयुर्वेद की मदद से फिर से काला किया जा सकता है? डॉ. श्रीनिवास पांडे के अनुसार, ऐसा उन मामलों में कुछ हद तक संभव है, जब कारण पित्त दोष या तनाव जैसे कारणों से जुड़ा हो।

सफेद बालों को लेकर क्या कहता है आयुर्वेद
बालों का सफेद होना आयुर्वेद में पालित्य कहलाता है। इसे सिर्फ एक बाहरी समस्या नहीं बल्कि शरीर के अंदरूनी असंतुलन के संकेत के रूप में देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, समय से पहले बालों का सफेद होना मुख्य रूप से शरीर में 'पित्त दोष' के बढ़ने से जुड़ा है। ये शरीर में गर्मी, चयपचय (मेटाबॉलिज्म) और शारीरिक बदलावों की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।तनाव, अस्वस्थ खान पान, एसिडिटी या खराब जीवनशैली के चलते जब शरीर में पित्त व गर्मी बढ़ जाती है, तो इसका नकारात्मक असर स्कैल्प और बालों की जड़ों पर पड़ता है और बालों की प्राकृतिक रंग बनाने की प्रक्रिया बाधित होने लगती है।इसके अलावा शरीर के धातुओं (टिशू), विशेष तौर पर खून, अस्थि (हड्डियां) और मज्जा (नर्वस सिस्टम) से संबंधित धातु के कमजोर होने पर बालों तक सही तरीके से पोषण नहीं पहुंच पाता है। क्रोनिक स्ट्रेस, केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल, नींद की कमी और पाचन संबंधी समस्याएं इस प्रक्रिया को और भी तेज कर देती हैं।
क्या सफेद बालों को फिर से काला किया जा सकता है?
आयुर्वेद के अनुसार, शुरुआती चरणों, विशेष रूप से 35 से 40 वर्ष से कम आयु के लोगों में अगर सफेद बालों का कारण तनाव या पोषक तत्वों की कमी से जुड़ा हो तो उपयुक्त कदम उठाते हुए इनके बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है। वहीं कुछ मामलों में नए उगने वाले बालों का रंग भी वापस लाया जा सकता है।हालांकि, अगर बाल पूरी तरह से सफेद हो गया हो, तो उसे दोबारा काला बनाना संभव नहीं। इसी वजह से आयुर्वेद में मुख्य ध्यान सिर्फ चिकित्सा पद्धति से जुड़ा न होकर पोषण और जीवनशैली से भी संबंधित रहता है। इनमें निरंतरता रखते हुए बालों की गुणवत्ता और रंग को बेहतर बनाया जा सकता है।
अंदरूनी पोषण पर दें ध्यान, आंवला-ब्राह्मी जैसी औषधियों का करें सेवन
आयुर्वेद इस बात पर जोर देता है कि बालों के रंग को स्वस्थ बनाए रखने के लिए शरीर को अंदर से पोषण व मजबूती देना आवश्यक है। इसके लिए कुछ औषधीय गुणों वाली जड़ी-बूटियों को लेना शुरू किया जा सकता है।- आंवला- बालों के रंग से लेकर स्कैल्प को स्वस्थ रखने में आंवला बेहद असरदार माना जाता है। ऐसा इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट गुणों के कारण संभव होता है।
- भृंगराज- इसे बालों का राजा कहा जाता है। ये न सिर्फ जड़ों से मजबूती देता है, बल्कि पित्त दोष को संतुलित करते हुए बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकने में भी मददगार साबित होता है।
- ब्राह्मी- ये मन को शांत रखने और तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। इससे तनाव के कारण समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
- भृंगराजासव, च्यवनप्राश और त्रिफला- शरीर के टिशूज को पूर्ण पोषण देने और उन्हें फिर से जीवंत (रिजूवनेट) करने के लिए इन पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन की सलाह दी जाती है।
आहार में हों ये चीजें: औषधीय गुणों वाली जड़ी-बूटियों के अतिरिक्त ताजे फल विशेष तौर पर खट्टे फलों, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज, काले तिल आदि को आहार में शामिल करने की सलाह दी जाती है। ये पित्त दोष को संतुलित करने में सहायक होते हैं। वहीं बालों को मजबूती देने के लिए प्रोटीन से भरे खाद्य पदार्थों को लेने का सुझाव दिया जाता है।
इनसे रहें दूर: प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक कैफीन, तली-भुनी चीजों और देर रात खाना खाने की आदतों से परहेज करना भी बालों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए अहम है। आयुर्वेद के अनुसार, इस तरह की चीजें शरीर की अंदरूनी गर्मी को बढ़ाती हैं, जिससे बाल के रंग व स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है।
तेल व हेयर मास्क, जो बालों के रंग व स्वास्थ्य को बचाने में करेंगे मदद
आयुर्वेद में बालों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए नियमित रूप से तेल लगाने पर जोर दिया जाता है। बालों को जड़ से मजबूती देने और कालेपन को बनाए रखने के लिए पारंपरिक रूप से नीलीभृंगादि, भृंगामलकादि और भृंगराज जैसे औषधीय तेलों के इस्तेमाल किया जा सकता है।होम मेड ऑयल
इन औषधीय तेलों के अतिरिक्त नारियल तेल को करी पत्ते के साथ गर्म करके भी लगाया जा सकता है। करी पत्तों में मौजूद पोषक तत्व बालों के रंग को बरकरार रखने में मदद करने के लिए जाने जाते हैं। इसे सप्ताह में दो से तीन बार नियमित रूप से लगाकर सिर की मालिश करें, ताकि जड़ों तक पोषण सीधे पहुंचे और रक्त संचार भी बेहतर हो सके।
होम मेड हेयर मास्क
इन तेलों के अलावा एक होममेड मास्क भी असरदार साबित हो सकता है। इसके लिए बस भृंगराज और आंवला पाउडर को दही में मिलाकर सप्ताह में एक बार सिर की त्वचा और बालों पर लगाना है। नियमित रूप से लगाने पर हेयर क्वालिटी, टेक्सचर और हेल्थ में सकारात्मक अंतर दिख सकता है।
जीवनशैली में लाएं अंतर, आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों का लें सहारा
- समय से पहले बालों के सफेद होने में खराब जीवनशैली की अहम भूमिका होती है। लगातार तनाव की स्थिति में रहना, अनियमित या कम नींद होना और अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आना पित्त को बढ़ा सकता है। इससे बालों की एजिंग और तेज हो जाती है।
- प्राणायाम (विशेष रूप से नाड़ी शोधन और भ्रामरी) व हल्के योगासन नर्वस सिस्टम को शांत और तनाव से जुड़ी जटिलताओं को कम करने में मददगार साबित होते हैं।
- सोने का एक नियमित समय बनाए रखना (आदर्श रूप से 11 बजे से पहले) भी शरीर को किसी भी प्रकार के डैमेज से बेहतर तरीके से रिकवर होने में सहायता देता है।
चिकित्सा पद्धतियां
- शिरोधारा- बढ़े हुए पित्त को शांत और तनाव को दूर करने के लिए शिरोधारा चिकित्सा पद्धति का सहारा लिया जा सकता है। इसमें माथे पर औषधीय तेल या दूध की धार डाली जाती है।
- तक्रधारा- अगर पित्त संबंधी जटिलताएं हों, तो उस स्थिति में तक्रधारा को प्राथमिकता दी जाती है। ये छाछ आधारित चिकित्सा है।
- तैलधारा- इस तेल आधारित चिकित्सा को वात को संतुलित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
- शिरोवस्ति- शिरोवस्ति में भी तेल की धारा का उपयोग होता है। इससे सिर की त्वचा को अधिक पोषण मिलता है, जो बालों को स्वस्थ, मजबूत और उनके रंग को बनाए रखने में सहायक है।
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