घर पर कर रहे डर्मारोलिंग? डॉ. ने बताया कैसे चुनें सही डर्मारोलर, इस्तेमाल का सही तरीका और कौन यूज करने से बचें
डर्मारोलिंग ब्यूटी ट्रेंड में जबरदस्त तरीके से छाई हुई है। लेकिन डॉ. सुनिता नायक की मानें तो अगर रोलर की हाइजीन और इस्तेमाल के तरीके से लेकर अन्य सावधानियों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो फायदे बड़े नुकसान में तब्दील हो सकते हैं। उन्होंने समझाया कि किसे 0.25mm और 0.5mm की नीडल्स वाले रोलर का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि कोलेजन बूस्टिंग से लेकर हेयर फॉल की समस्या में राहत पाने जैसे बेनिफिट्स पाए जा सकें।

मेरे पास कई ऐसे केस आते हैं, जो इन स्थितियों की मौजूदगी के बावजूद डर्मारोलर का इस्तेमाल करते हैं और फिर उनके कॉम्प्लिकेशन्स बढ़ जाते हैं। अगर किसी को ये समस्याएं नहीं हैं, और वो पहली बार डर्मारोलिंग करने जा रहे हैं, तो उन्हें 0.25mm की माइक्रोनीडल्स वाले विकल्प को चुनना चाहिए।
अगर सही तरीके और हाइजीन का ख्याल रखते हुए इस टूल का उपयोग किया जाए, तो एक्ने स्कार्स, फाइन लाइन्स, पिगमेंटेशन आदि को कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं स्कैल्प पर इस्तेमाल करने पर ये हेयर फॉल में भी राहत दे सकता है। इन सभी चीजों को आगे विस्तार से समझिए।
क्या है डर्मारोलिंग?
डर्मारोलिंग को डर्मारोलर नाम के टूल के जरिए किया जाता है। ये माइक्रोनीडलिंग ट्रीटमेंट का एक वर्जन है, जिसे आमतौर पर घर पर किया जाता है। रोलर पर बारीक सुइयां मौजूद होती हैं, जो माइक्रो-इंजरी क्रिएट करती हैं, जिससे रिपेयरिंग और हीलिंग प्रोसेस एक्टिव होता है। इस्तेमाल के दौरान इन्हें हल्के प्रेशर के साथ ही स्किन या फिर स्कैल्प पर घुमाया जाता है। ये रोलर काफी हैंडी होते हैं, जिससे इन्हें यूज करना बेहद आसान होता है।कैसे चुना जाता है रोलर?
सही नतीजे पाने के लिए सही साइज की माइक्रोनीडल्स का रोलर चुनना भी बेहद जरूरी है:- 0.25mm: पहली बार घर पर डर्मारोलर इस्तेमाल करने जा रहे लोगों के लिए नीडल्स का ये साइज उपयुक्त है।
- 0.5mm: जिन लोगों को हल्के स्कार से जुड़ी समस्या है, या फिर हेयर ग्रोथ के प्रयास कर रहे हैं, उनके लिए इस साइज की नीडल्स वाला रोलर बेस्ट है।
- 1.0mm या उससे ज्यादा: मार्केट में अगर इन साइजों की नीडल्स वाला डर्मारोलर मिले भी तो उसे न लें, क्योंकि इसे केवल क्लिनिकली यूज करना सेफ है।
डर्मारोलिंग से मिलते हैं कौन से फायदे?
- स्किन से जुड़े फायदे: चेहरे पर इसके उपयोग से कोलेजन और इलास्टिन का प्रोडक्शन बूस्ट होता है। नतीजन इससे एक्ने स्कार कम होना, फाइन लाइन्स व रिंकल्स का घटना, स्किन टेक्सचर में सुधार आना, पिगमेंटेशन कम होना, ओपन पोर्स का कम दिखना, स्किन के ज्यादा टाइट, स्मूद और हेल्दी दिखने जैसे फायदे मिलते हैं। इसके इस्तेमाल से चेहरे पर लगाए जाने वाले प्रोडक्ट्स का एब्जॉर्बशन भी बेहतर होता है, जिससे उनसे मिलने वाले रिजल्ट्स और बेहतर हो जाते हैं।
- स्कैल्प से जुड़े फायदे: स्कैल्प पर डर्मारोलर के इस्तेमाल से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे हेयर फॉल घटने और हेयर ग्रोथ प्रमोट होने जैसे फायदे मिलते हैं। हेयर सीरम या ऑयल से जुड़े रिजल्ट्स भी इसके इस्तेमाल के बाद बेहतर होते हैं।
डर्मारोलर इस्तेमाल करने का सही तरीका
- डर्मारोलर को इस्तेमाल करने से पहले 70% अल्कोहल से 5-10 मिनट के लिए सैनिटाइज करें
- चेहरे को अच्छे से वॉश करें। जब त्वचा सूख जाए, तो उस पर हल्के हाथ से रोलर चलाएं
- एक ही हिस्से पर 4-5 बार रोलर को ऊपर-नीचे और दाईं-बाईं दिशा में चलाएं
- प्रोसेस पूरा होने के बाद हायलूरोनिक एसिड या फिर हीलिंग क्वॉलिटी वाला जेंटल सीरम लगाएं
- अगर दिन में बाहर जाने वाले हैं, तो सनस्क्रीन लगाना न भूलें
- अगर स्कैल्प पर इसका इस्तेमाल करें, तो सेम प्रोसेस दोहराएं और फिर सीरम लगाएं।
डर्मारोलिंग पोस्ट-केयर रूटीन
डर्मारोलिंग के दौरान माइक्रोनीडल्स स्किन में माइक्रो-इंजरी क्रिएट करती हैं। इस वजह से त्वचा काफी ज्यादा सेंसिटिव हो जाती है। जो पोस्ट-केयर को और ज्यादा अहम बना देता है।- केवल जेंटल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें
- ऐसे प्रोडक्ट लगाएं, जो हाइड्रेटिंग हों
- प्रोसेस के अगले 24 घंटे तक मेकअप प्रोडक्ट्स लगाने से बचें
- पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं ताकि स्किन अंदर से हाइड्रेट रह सके
- सनस्क्रीन का रेग्युलर इस्तेमाल करें।
डर्मारोलर का किसे यूज करना चाहिए और किसे नहीं?
कौन करें यूज- हल्के एक्ने स्कार की समस्या वाले
- फाइन लाइन्स या एजिंग के शुरुआती लक्षण जिनके फेस पर दिखने लगे
- हेयर थिनिंग की समस्या से जो गुजर रहे हों
- और जिनकी स्किन नॉर्मल या ऑयली हो।
- एक्टिव एक्ने
- पिंपल्स
- स्किन इंफेक्शन
- एक्जिमा, सोरायसिस या अन्य स्किन डिजीज
- डायबिटीज या वीक इम्युनिटी
- ब्लड क्लॉटिंग से जुड़ी समस्या
- सेंसिटिव या बेहद ड्राई स्किन।
डर्मारोलिंग से जुड़ी सावधानियां
- एक ही डर्मारोलर को बार-बार इस्तेमाल करने से बचें
- रोलर को अच्छे से सैनिटाइज किए बगैर यूज न करें
- रोलर का बहुत ज्यादा यूज न करें
- ज्यादा प्रेशर के साथ रोलर को न घुमाएं
- डर्मारोलिंग करने के बाद स्किन को कम से कम 24-28 घंटों तक रिलैक्स्ड रहने दें
- धूप में निकलने से बचें।
अगर डर्मारोलिंग करने के बाद आपको ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत रोलर का इस्तेमाल रोक दें और डॉक्टर को दिखाएं:
- बहुत ज्यादा रेडनेस दिखना या सूजन आना
- खून निकलना
- पस निकलना
- इंफेक्शन दिखना
- स्किन का छिलना
- स्किन बर्निंग।
डर्मारोलिंग करने के बाद कितने दिन में दिखते हैं रिजल्ट?
डर्मारोलिंग के रिजल्ट तुरंत नहीं दिखाई देते। चूंकि ये स्किन की नैचुरल हीलिंग को एक्टिव करता है, इसलिए इसके शुरुआती प्रभाव दिखने में भी कम से कम दो सप्ताह तक का वक्त लगता है। ड्यूरेशन के हिसाब से फायदे कुछ निम्नलिखित रूप में दिख सकते हैं:- 2-3 सप्ताह में स्किन पर ग्लो आना
- 6-8 सप्ताह में स्किन टेक्चर में सुधार नजर आना
- 2-3 महीनों में स्कार और पिगमेंटेशन की समस्या का कम होना।
क्या घर पर डर्मारोलिंग करना सुरक्षित है?
सच कहूं तो डर्मारोलिंग घर पर यूज करना चाहिए या नहीं, इसे लेकर सभी विशेषज्ञों की मिली-जुली राय ही देखने को मिलती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये भले ही माइक्रोनीडलिंग का सस्ता और आसान तरीका हो, लेकिन जब इसे क्लीनिक में किया जाता है, तो पूरा माहौल स्टेराइल और कंट्रोल्ड रहता है।प्लस इसे एक्सपर्ट द्वारा किया जाता है, जो प्रेशर से लेकर प्रिकॉशन्स की सही जानकारी रखते हैं। घर पर ये चीजें मेजर मिस होती हैं।
बाजार में मिलने वाले डर्मारोलर को घर पर इस्तेमाल करने के बाद डिस्कार्ड कर देना चाहिए। लेकिन अक्सर लोग इस प्रिकॉशन को भी इग्नोर कर देते हैं। जिससे कॉम्प्लिकेशन्स का सामना करना पड़ता है।
घर पर इस्तेमाल के जोखिम
- स्किन इन्फ्लेमेशन
- स्किन रैशेज
- बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन
- स्किन पर कट लगना या डैमेज होना
- पिगमेंटेशन बढ़ जाना
- स्किन बैरियर कमजोर होना।
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