नॉर्मल डिलीवरी से डरकर महिलाएं खुद चुन रहीं सिजेरियन, कई मामलों में नहीं होती जरूरत

 

अगर आप भी नॉर्मल डिलीवरी के दर्द से डरती हैं और इसी वजह से सी-सेक्शन चुनने का मन बना रही हैं, तो बतौर डॉक्टर मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगी कि यह दर्द अस्थायी होता है और इसे सही तरीके से संभाला जा सकता है। साथ ही, प्रसव के दौरान किसी अपने का साथ, हल्की-फुल्की एक्टिविटी और जरूरत पड़ने पर एपिड्यूरल जैसे विकल्प इस पूरी प्रक्रिया को काफी हद तक आसान बना सकते हैं।

fear of labor pain driving women to choose c sections even when not necessary
नॉर्मल ड‍िलीवरी को मानती हैं दर्दनाक ( Image- freepik )
मेरे ही नहीं, बल्कि कई अन्य गायनेकोलॉजिस्ट के अनुभव में भी पिछले कुछ वर्षों में यह देखने को मिला है कि सिजेरियन डिलीवरी को लेकर पूछताछ और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि कई मामलों में इसकी मेडिकल जरूरत नहीं होती। इसका एक बड़ा कारण नॉर्मल डिलीवरी के दर्द का डर है। कई महिलाएं इस दर्द के डर से इतनी ज्यादा घबरा जाती हैं कि कोश‍िश ही नहीं करती हैं और पहले ही सिजेरियन का विकल्प चुन लेती हैं।

हालांकि, प्रसव से पहले सही काउंसलिंग, सकारात्मक जानकारी और नकारात्मक बातों से दूरी बनाकर इस डर को काफी हद तक कम किया जा सकता है, जिससे महिलाएं अधिक आत्मविश्वास के साथ सही निर्णय ले पाती हैं। आइए इस व‍िषय को व‍िस्‍तार से समझते हैं। साथ ही यह भी जानेंगे क‍ि आख‍िर सी-सेक्शन की जरूरत कब पड़ती है?

सी-सेक्शन की जरूरत कब पड़ती है?

सी-सेक्शन की जरूरत तब पड़ती है जब सामान्य प्रसव के दौरान मां या बच्चे की सेहत को खतरा हो। ऐसी स्थिति में डॉक्टर सुरक्षित डिलीवरी के लिए सी-सेक्शन की सलाह देते हैं। यह जरूरत कई कारणों से हो सकती है, जैसे भ्रूण में संकट (फीटल डिस्ट्रेस), प्लेसेंटा प्रीविया, लंबा या रुक हुआ प्रसव, ब्रीच पोजीशन, जुड़वां या मल्टीपल प्रेग्नेंसी में जटिलताएं, पहले की गर्भाशय सर्जरी, अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज।

ऐसी स्थितियों में स‍िजेर‍ियन केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए लिया गया एक जरूरी मेडिकल निर्णय होता है।

नॉर्मल डिलीवरी को मानती हैं दर्दनाक

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नॉर्मल ड‍िलीवरी को मानती हैं दर्दनाक ( Image- freepik )
कई ऐसी हेल्दी प्रेग्नेंसीज होती हैं, जहां मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ होते हैं, फिर भी सी-सेक्शन को प्राथमिकता दी जाती है और वो भी खासकर पहली बार मां बनने वाली महिलाओं में। अक्सर इन महिलाओं को लगता है कि नॉर्मल डिलीवरी का मतलब है बेपनाह दर्द। ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि वे अपने रिश्तेदारों, दोस्तों या सोशल मीडिया से ऐसी ही दर्दभरी कहानियां सुन होती हैं।

इसी वजह से एक धारणा बन जाती है कि नॉर्मल डिलीवरी बहुत दर्दनाक होती है, जबकि सिजेरियन को लोग एक आसान और पहले से तय प्रक्रिया मानते हैं। यही कारण है कि आजकल डिलीवरी से जुड़े फैसले सिर्फ मेडिकल कारणों पर नहीं, बल्कि मानसिक सोच, जानकारी और समाज के प्रभाव पर भी निर्भर करते हैं।

सिर्फ डर ही नहीं, ये वजहें भी हैं जिम्मेदार

Normal delivery fear
स‍िजेर‍ियन के ल‍िए स‍िर्फ डर नहीं ये भी हैं वजहें Image- Freepik


नॉर्मल डिलीवरी को लेकर महिलाओं के मन में सिर्फ दर्द ही नहीं, बल्कि कई और चिंताएं भी होती हैं। जैसे- लंबे समय तक चलने वाला और अनिश्चित दर्दनाक प्रसव, और गर्भ में बच्चे के साथ कुछ गलत होने का डर। कई बार परिवार के सदस्य भी इस सोच को प्रभावित करते हैं, क्योंकि वे सिजेरियन को ज्यादा सुरक्षित या आसान मानते हैं।

इसके अलावा, कुछ परिवार इमरजेंसी की स्थिति से डरते हैं, इसलिए वे अनिश्चितता से बचने के लिए पहले से प्लान किया हुआ सी-सेक्शन चुन लेते हैं।

नॉर्मल ड‍िलीवरी के डर को ऐसे करें कम

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नॉर्मल ड‍िलीवरी के डर को ऐसे कर सकती हैं कम (Image- Istock )


सामान्य प्रसव को लेकर डर कम करने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं, जिनकी शुरुआत सही जानकारी से होती है। कई महिलाएं इसलिए डरती हैं क्योंकि उन्हें यह नहीं पता होता कि प्रसव के दौरान क्या होने वाला है।

ऐसे में, प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली काउंसलिंग से उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि प्रसव कैसे होता है, शरीर कैसे प्रतिक्रिया देता है और दर्द को कम करने के कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं।

सही तरीके से सांस लेना, प्रसव के दौरान किसी अपने का साथ होना, हल्का-फुल्का चलना-फिरना और जरूरत पड़ने पर एपिड्यूरल जैसे विकल्प अपनाकर इस पूरी प्रक्रिया को काफी हद तक आसान बनाया जा सकता है।

फैम‍िली भी कर सकती है सपोर्ट

प्रेग्नेंट महिला के मन से नॉर्मल डिलीवरी का डर कम करने में परिवार की भूमिका बेहद अहम होती है। ऐसे समय में परिवार का व्यवहार जितना सकारात्मक और सहयोगी होगा, महिला उतना ही आत्मविश्वास महसूस करेगी। परिवार के लोगों को चाहिए कि वे शांत और समझदारी से बात करें, महिला का हौसला बढ़ाएं और उसे किसी भी तरह की गलत धारणा या डर से प्रभावित न करें।

साथ ही, डॉक्टर की सलाह पर भरोसा करना और उसी के अनुसार महिला को सपोर्ट देना बहुत जरूरी है। जब परिवार के सदस्य डॉक्टर की काउंसलिंग में शामिल होते हैं, तो उन्हें भी यह समझ आता है कि क्या सही है और प्रसव को कैसे सुरक्षित तरीके से संभाला जाता है। इस तरह का सहयोगी और सकारात्मक माहौल न सिर्फ महिला का डर कम करता है, बल्कि पूरे अनुभव को ज्यादा सहज और सुरक्षित बनाने में भी मदद करता है।

नॉर्मल डिलीवरी की संभावना कैसे बढ़ाएं

1: रेग्‍यूलर चेकअप करवाएं

नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ाने के लिए गर्भावस्था के दौरान नियमित प्रसवपूर्व जांच बहुत जरूरी है। इससे मां और बच्चे दोनों की सेहत पर नजर रहती है। अगर कोई समस्या होती है, तो वह समय पर पता चल जाती है और उसका इलाज किया जा सकता है।

2: बैलेंस डाइट लें

Pregnancy diet
हेल्‍दी डाइट जरूर लें। (Image- Istock)


संतुलित और पौष्टिक आहार बच्चे के सही विकास और मां के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। स्वस्थ वजन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ज्यादा वजन से प्रसव के दौरान जटिलताओं की संभावना बढ़ सकती है।

3: फ‍िज‍िकली एक्‍ट‍िव रहें

नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ाने में एक्सरसाइज बहुत मदद करती है, खासकर जब महिला पूरी तरह स्वस्थ हो। नियमित हल्की एक्सरसाइज से शरीर मजबूत बनता है, स्ट्रेंथ बढ़ती है, स्टैमिना में सुधार होता है और फ्लेक्सिबिलिटी भी बढ़ती है, जो प्रसव के समय बहुत काम आती है।

इसके लिए महिलाएं वॉक, प्रेग्नेंसी योग, हल्की स्ट्रेचिंग और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज कर सकती हैं। ये सभी शरीर को ड‍िलीवरी के लिए तैयार करने में मदद करते हैं और ब्‍लड सर्कुलेशन भी बेहतर बनाती हैं। लेकिन हर गर्भावस्था अलग होती है, इसलिए कोई भी व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

मेडिकल आधार पर लें फैसला

महिलाओं और उनके परिवारों को यह समझना चाहिए कि नॉर्मल डिलीवरी और सी-सेक्शन का चुनाव हमेशा मेडिकल जरूरत के आधार पर होना चाहिए, न कि डर के कारण।

प्रसव का दौरान होने वाला दर्द एक स्वाभाविक बात है, लेकिन सही सलाह, दर्द कम करने के विकल्प, शरीर की तैयारी और परिवार के सहयोग से महिलाएं सामान्य प्रसव के लिए अधिक आत्मविश्वास महसूस कर सकती हैं।

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