Soaked Almond or Blanch Almond: बादाम काफी पौष्टिक होते हैं, जो कई सारे हेल्थ बेनिफिट्स देते हैं। लेकिन इसके खाने के तरीके को लेकर लोग अक्सर कंफ्यूज रहते हैं। अब एक तरीका और पॉपुलर हो रहा है, जिसे ब्लांचिंग कहते हैं। इस आर्टिकल में डाइटिशियन ने बादाम को ब्लांच करने का सही तरीका बताया है, साथ ही जानेंगे कि क्या यह भीगे बादाम से ज्यादा हेल्दी होते हैं?

नेचुरल न्यूट्रिशन का भंडार है बादाम
बादाम बहुत सारे पोषण से भरा नट है। इनका सेवन करने से विटामिन, मिनरल्स और हेल्दी फैट्स मिलते हैं। बादाम से प्लांट प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन ई की सप्लाई मिलती है, जिस वजह से इनका नियमित सेवन करने पर दिल की बीमारी, स्किन प्रोब्लम्स और एनर्जी की कमी से बचाव होता है। खाने के लिए इनकी तैयारी करने का तरीका इनके पाचन और पोषण प्राप्त होने की गति पर असर डालता है।
बादाम ब्लांच करने का सही तरीका
- पानी को अच्छी तरह उबाल लें।
- इसके बाद स्टोव बंद कर दें और बादाम को इस उबले पानी में भिगो दें।
- 2 से 3 मिनट बादाम भीगने के बाद सारा पानी निकाल दें।
ब्लांच करने से क्या होता है?
बादाम के छिलके में टैनिन होता है, जो कुछ पोषक तत्वों का अवशोषण बाधित कर सकता है। इसलिए, ब्लांच करने के बाद संवेदनशील पेट वाले लोगों के लिए बादाम पचाना आसान हो जाता है। लेकिन यहां ध्यान रखने वाली बात यह है क बादाम के छिलके में डाइटरी फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स की अच्छी मात्रा होती है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर के अंदर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को घटाकर ओवरऑल हेल्थ को सही रखने में मदद करते हैं। ब्लांच आलमंड पचने में सुविधाजनक हो जाते हैं, लेकिन साथ में इनके कुछ नेचुरल न्यूट्रिएंट भी कम हो जाते हैं।बादाम भिगोने से क्या होता है?
बादाम को भिगोना इन नट्स को खाने का एक पारंपरिक तरीका है। इसके लिए बादाम को रातभर पानी में भिगोकर रखा जाता है। इस तरीके से बादाम थोड़े नरम हो जाते हैं और इसके पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ाने वाला एंजाइम एक्टिवेट हो जाता है। बादाम भिगोने से फाइटिक एसिड भी खत्म हो जाता है। बता दें कि फाइटिक एसिड एक ऐसा कंपाउंड है, जो कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे मिनरल्स के साथ बंध जाता है और इनका अवशोषण बाधित कर देता है।
भीगे बादाम का टेक्सचर कच्चे बादाम के मुकाबले थोड़ा नरम होता है, जिस वजह से इन्हें चबाना और पचाना आसान होता है। आप इन्हें आराम से खाली पेट सुबह खा सकते हैं। लोग भिगोने के बाद बादाम का छिलका उतारकर खाते हैं, लेकिन अगर आप छिलके के साथ बादाम खाएंगे तो इनके अंदर मौजूद डाइटरी फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की कुछ मात्रा मिल सकती है।
ब्लांच और भीगे बादाम में अंतर
इन दोनों का प्रमुख अंतर यह है कि ब्लांच आलमंड को आमतौर पर बादाम का पेस्ट, बादाम का दूध या डिजर्ट बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि यह भीगे बादाम के मुकाबले ज्यादा आसानी से ब्लेंड हो जाते हैं, स्मूथ कंसिस्टेंसी देते हैं, नॉन-ग्रिटी टेक्सचर होता है और इनका फ्लेवर न्यूट्रल होता है। दूसरी तरफ भीगे बादाम का नियमित सेवन करने पर ज्यादा पोषण मिलता है। भिगोने के बाद भी बादाम के अंदर विटामिन और मिनरल की ज्यादा मात्रा रह जाती है। यह डाइटरी फाइबर, हेल्दी फैट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स का बेहतर संतुलन देते हैं, जो हेल्दी डायजेशन और पेट को भरा रखने के लिए महत्वपूर्ण है।भीगे बादाम या ब्लांच बादाम में से क्या खाएं?
अधिकतर बार मैं लोगों को ब्लांच करने की जगह भीगे बादाम खाने की सलाह देती हूं। इनकी न्यूट्रिशल प्रोफाइल ज्यादा कंप्लीट होती है और यह डायजेशन, एनर्जी और हेल्थ बेनिफिट्स के लिए बेहतर होते हैं। दूसरी तरफ, ब्लांच आलमंड को नुकसानदायक ना मानें। जिन लोगों को बादाम का छिलका पचाने में दिक्कत होती है, जैसे बच्चे, बुजुर्ग या संवेदनशील पेट वाले लोग, उनके लिए ब्लांच किए हुए बादाम फायदेमंद साबित हो सकते हैं।कुल मिलाकर, आप भीगे बादाम खाएं या ब्लांच आलमंड, यह आपकी जरूरत और खाने के तरीके पर निर्भर करता है। जबतक आप इनका मॉडरेशन में सेवन करते हैं, तबतब इन्हें हेल्दी डाइट में शामिल किया जा सकता है। आपको हर दिन 6 से 10 बादाम ही खाने चाहिए, क्योंकि ज्यादा बादाम खाने पर संभावित नुकसान झेलने पड़ सकते हैं।
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