कई बार गुड़हल और मोगरे के पौधों की पत्तियां अचानक सिकुड़ने लगती हैं या उन पर फफोले जैसे निशान दिखने लगते हैं। कई बार खाद डालने के बावजूद पौधों की ग्रोथ रुक जाती है। इसका मुख्य कारण सफेद मक्खी और उनके द्वारा फैलाया गया वायरस होता है। जिसका समाधान माली ने बताया है।

यह कीट न केवल पौधों का रस चूसता है, बल्कि खतरनाक वायरस भी फैलाता है, जिससे नई पत्तियों का प्राकृतिक आकार बिगड़ जाता है और पौधों का विकास पूरी तरह थम जाता है। हालांकि माली ने इस समस्या से बचने के लिए एक केमिकल का इस्तेमाल करने का तरीका बताया है। हालांकि इसको लेकर आपको काफी सावधानी बरतनी होगी।
पत्तियों पर फफोले और मरोड़
अक्सर गुड़हल और मोगरे की नई पत्तियां ऊपर या नीचे की ओर मुड़ने लगती हैं। पत्तियों की सतह ऊबड़-खाबड़ हो जाती है, जिसे फफोले पड़ना कहते हैं। यह इस बात का संकेत है कि पौधा अंदरूनी तौर पर बीमार है। जब पत्तियां अपनी प्राकृतिक बनावट खो देती हैं, तो वे प्रकाश संश्लेषण ठीक से नहीं कर पातीं, जिससे पौधा धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।
क्या है असली वजह
माली के अनुसार, इस समस्या की जड़ सफेद मक्खी है। ये छोटे-छोटे सफेद कीट पत्तियों की निचली सतह पर अपना बसेरा बनाते हैं। ये मक्खियां न केवल पत्तियों का रस चूसती हैं, बल्कि वहां अंडे भी देती हैं। सफेद मक्खी एक चिपचिपा पदार्थ छोड़ती है, जिससे फंगस और वायरस फैलता है। इनके हमले के कारण ही पत्तियों की हालत खराब हो जाती है।
लीफ कर्ल वायरस का प्रसार
सफेद मक्खी सिर्फ रस ही नहीं चूसती, बल्कि यह एक वेक्टर का काम करती है। यह एक पौधे से दूसरे पौधे तक लीफ कर्ल वायरस फैलाती है। एक बार जब वायरस पौधे के सिस्टम में घुस जाता है, तो नई आने वाली पत्तियों का शेप या आकार कभी भी नेचुरल नहीं रहता। पत्तियां छोटी, मुड़ी हुई और पीली दिखने लगती हैं, जिसे अक्सर लोग पोषण की कमी समझ लेते हैं, जबकि यह असल में एक वायरल अटैक होता है।
ग्रोथ पर होता है बुरा असर
जब गुड़हल और मोगरे की पत्तियां वायरस और कीटों की चपेट में आती हैं, तो पौधे की ग्रोथ पूरी तरह रुक जाती है। नई कोपलें ही सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं, इसलिए पौधे में कलियां नहीं बनतीं और फूल आना बंद हो जाते हैं। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो पौधा धीरे-धीरे बर्बाद हो जाता है।
क्या है समस्या का समाधान
इस गंभीर समस्या को रोकने के लिए माली ने साइपरमेथ्रिन नामक कीटनाशक के उपयोग की सलाह देती हैं। आप 1 लीटर साफ पानी लें और उसमें मात्र 3 ML साइपरमेथ्रिन मिलाएं। इस घोल को एक स्प्रे बोतल में भरें। शाम के समय पत्तियों के ऊपर और खासतौर पर पत्तियों के नीचे की तरफ अच्छी तरह छिड़काव करें।
गार्डनिंग एक्सपर्ट ने बताया समाधान
असर और रिकवरी का समय
साइपरमेथ्रिन का छिड़काव करने के बाद धैर्य रखना जरूरी है। यह दवा अपना असर तुरंत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे दिखाती है। आमतौर पर 15 से 20 दिनों के भीतर आपको सुधार नजर आने लगेगा। जो पत्तियां पहले से खराब हो चुकी हैं, वे ठीक नहीं होंगी, लेकिन जो नई पत्तियां आएंगी, वे स्वस्थ, चमकदार और सही आकार की होंगी।
सावधानी बरतना है जरूरी
कीटनाशकों का प्रयोग करते समय सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। दवा का छिड़काव हमेशा दस्ताने और मास्क पहनकर ही करें। छिड़काव के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। साथ ही, यह ध्यान रखें कि दवा का प्रयोग केवल शाम के समय ही करें, ताकि तेज धूप के कारण पत्तियों के जलने का खतरा न रहे। बच्चों और पालतु जानवरों को दूर रखें।
Comments
Post a Comment