अगर आपके बच्चे के दांतों का अलाइनमेंट ठीक नहीं है या जबड़े का आकार गड़बड़ है और आप इसे ठीक करवाने के लिए ब्रेसेस लगवाने का सोच रहे हैं, तो सही समय पर यह ट्रीटमेंट करवाना बेहद जरूरी होता है, ताकि इसका पूरा फायदा मिल सके। इसीलिए पेरेंट्स इस बात का ध्यान रखें।

ब्रेसेस ट्रीटमेंट क्या होता हैं ?
आम तौर पर ब्रेसेस (दांतों में तार लगाना) को सिर्फ सुंदरता बढ़ाने से जोड़कर देखा जाता है और कई लोग इसे दिखावटी भी मान लेते हैं। लेकिन असल में यह ऑर्थोडॉन्टिक ट्रीटमेंट का हिस्सा है, जिसमें टेढ़े-मेढ़े दांतों को सीधा किया जाता है और जबड़े को सही स्थिति में लाया जाता है। इस प्रक्रिया में समय के साथ धीरे-धीरे और लगातार दांतों और जबड़े पर हल्का दबाव दिया जाता है, जिससे उनकी स्थिति सुधरती है। Image- freepik
ब्रेसेस कितने प्रकार के होते हैं?
ब्रेसेस मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। पहला मेटल और दूसरा सिरेमिक। दोनों ही समान रूप से प्रभावी होते हैं, लेकिन इनकी दिखावट, मजबूती और कीमत में फर्क होता है।
मेटल ब्रेसेस
● यहस्टेनलेस स्टील से बने होते हैं
● मजबूत और जटिल दांतों की समस्याओं में भी असरदार
● कीमत कम होती है, इसलिए ज्यादातर लोग इसे अर्फोड कर सकते हैं।
● दिखने में ज्यादा आकर्षक नहीं होते, जिससे कुछ टीनएजर्स इसे लगवाने में कंर्फटेबल नहीं होते हैं।
सिरेमिक ब्रेसेस
● दांतों के रंग जैसे होते हैं, इसलिए कम नजर आते हैं
● मेटल ब्रेसेस की तुलना में ज्यादा नाजुक होते हैं और देखभाल की जरूरत होती है
● सही देखभाल न करने पर इनका रंग बदल सकता है
● मेटल ब्रेसेस से महंगे होते हैं
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ब्रेसेस लगाने के फायदे क्या हैं?
1- टेढ़े-मेढ़े दांत ठीक करने में मदद: ऑर्थोडॉन्टिस्ट अक्सर टेढ़े-मेढ़े या बहुत दूर-दूर दांतों को ठीक करने और जबड़े का आकार सही स्थिति में लाने के लिए डॉक्टर्स ब्रेसेज लगाने की सलाह देते हैं। 2- इन प्रॉब्लम्स में भी करता है मदद: यह ओवरबाइट (जब ऊपरी दांत आगे निकल जाते हैं), अंडरबाइट (जब निचले दांत आगे आ जाते हैं) और क्रॉसबाइट जैसी समस्याओं को ठीक करने मदद करते हैं।
3- दांतों में सड़न का खतरा कम होता है: जब दांतों की अलाइनमेंट ठीक होता है, तो इसे साफ करना आसान हो जाता है। इससे प्लाक, मसूड़ों की बीमारी और दांतों में सड़न का खतरा कम होता है।
4- स्पीच में हो सकता है सुधार: टेढ़े-मेढ़े दांत ठीक होने से जबड़े की मांसपेशियों और जोड़ों पर दबाव भी कम पड़ता है, और कुछ मामलों में तो बोलने में भी सुधार हो सकता है।
किस उम्र में ब्रेसेस लगवाना सही है?
आमतौर पर 12 से 16 साल की उम्र में ब्रेसेस लगाने की सलाह देते हैं। क्योंकि इस समय तक ज्यादातर पक्के (स्थायी) दांत आ चुके होते हैं। इस उम्र में जबड़ा अभी विकसित हो रहा होता है और हड्डियां लचीली होती हैं, इसलिए दांतों को सही जगह पर लाना आसान होता है। साथ ही, जबड़े के विकास को भी सही दिशा में किया जा सकता है और बेहतर परिणाम मिलते हैं। इलाज में देरी करने पर, तो दांतों की समस्या बढ़ सकती है और चेहरे की बनावट पर भी असर पड़ सकता है।
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कौन से ब्रेसेस चुनने चाहिए ?
माता-पिता को टीनएजर्स के लिए ब्रेसेस चुनते समय दो बातें सबसे जरूरी होती हैं। पहली यह है कि उनकी देखभाल कितनी आसान है और दूसरी बच्चे की पसंद क्या है। चूंकि सिरेमिक ब्रेसेस दिखने में अच्छे होते हैं और कम नजर आते हैं, इसलिए कई टीनएजर्स इन्हें पसंद करते हैं। लेकिन ये मेटल ब्रेसेस जितने मजबूत नहीं होते और जल्दी टूट सकते हैं। इसलिए ब्रेसेस लगवाने से पहले इस बात पर गौर करना जरूरी है। Image- Istock
पेरेंट्स रखें ध्यान
अगर ब्रेसेस का इलाज देर से किया जाए, तो टेढ़े-मेढ़े दांत और जबड़े की समस्या बढ़ सकती है। इससे चेहरे में असमानता आ सकती है और दांतों की सीधे होने से जुड़ी परेशानी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
वहीं, बड़े होने पर जबड़े का विकास आमतौर पर स्थित हो जाता है, इसलिए इस तरह की समस्या को ठीक करना ज्यादा मुश्किल हो जाता है। कुछ मामलों में सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है। इसलिए समय पर इलाज करना बहुत जरूरी है, ताकि दांत और चेहरा दोनों सही तरीके से ठीक हो सकें।
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