Liver Cirrhosis Stage Based Symptoms: लिवर सिरोसिस एक खतरनाक बीमारी है, जो गंभीर होने के बाद मरीज की हालत खराब कर देती है। यह धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है और व्यक्ति को पता भी नहीं लग पाता। लेकिन इससे होने वाले नुकसान को शुरुआत में कुछ छोटी-छोटी चीजों को पहचानकर पकड़ा जा सकता है ताकि देर होने से पहले इस बीमारी को मैनेज किया जा सके।

सिरोसिस में लिवर पर बन जाते हैं डैमेज के निशान
कौन-सी छोटी चीजें पकड़नी होगी?
लिवर सिरोसिस की प्रमुख रूप से दो स्टेज होती हैं। शुरुआती स्टेज में लिवर को नुकसान पहुंचने तो लगता है, लेकिन फिर भी यह अंग अपना सामान्य काम करने में सक्षम होता है। इस स्टेज में छोटी-छोटी समस्याएं इस बीमारी के लक्षण के रूप में दिखती हैं, जैसे- हल्की थकान, कमजोरी या भूख कम लगना। इन लक्षणों के मामूली होने के कारण बीमारी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। आप इन छोटी-छोटी दिक्कतों को पकड़कर ही सिरोसिस को समय पर पहचान सकते हैं।दूसरी डीकंपेंसटेड स्टेज होती है, जिसके अंदर लिवर की फंक्शनल कैपासिटी काफी घट जाती है और लक्षण गंभीर बनकर सामने आने लगते हैं। इस वक्त मरीज के शरीर में सूजन, पेट में पानी भरना (एसाइटिस), पीलिया और आसानी से ब्लीडिंग होने की स्थिति झेलनी पड़ सकती है। यह स्थिति काफी खतरनाक होती है और इसमें तुरंत मेडिकल इलाज की जरूरत होती है।
कौन-से लक्षणों से होता है सामना?
लिवर सिरोसिस के लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं और वक्त के साथ गंभीर होते जाते हैं। शुरुआत में मरीज को लगातार थकान और कमजोरी महसूस होती है, क्योंकि लिवर ढंग से काम नहीं कर पाता और एनर्जी की सप्लाई कम होने लगती है। साथ में भूख कम होने लगती है और पाचन खराब हो जाता है, जिससे वजन भी घटने लगता है। एसाइटिस (पेट में पानी भरने से सूजन) और पैर-टखनों में सूजन देखने को मिलती है।
लिवर डैमेज होने पर खून जमाने की क्षमता भी कम हो जाती है, जिसकी वजह से चोट लगने पर आसानी से या गंभीर ब्लीडिंग होती है। कुछ मरीजों की स्किन में लगातार खुजली होती रहती है, क्योंकि लिवर टॉक्सिन को फिल्टर करके बाहर नहीं निकाल पाता। इन टॉक्सिन का असर दिमाग पर पड़ सकता है, जिससे कंफ्यूजन, भूलने की समस्या या बिहेवियर में बदलाव जैसे मानसिक संकेत भी दिखते हैं।
शरीर को कैसे खराब करता है लिवर सिरोसिस?
लिवर बहुत महत्वपूर्ण अंग है, जिसका काम डिटॉक्सिफिकेशन, डायजेशन और न्यूट्रिएंट्स के मेटाबॉलिज्म से जुड़ा होता है। सिरोसिस में इस अंग की सामान्य संरचना और कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है। इससे शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं और ब्लड फ्लो भी बाधित हो सकता है। इसकी वजह से पाचन क्रिया भी कमजोर पड़ जाती है और पोषक तत्वों का सही से उपयोग नहीं हो पाता। शरीर और इम्यून सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ता जाता है। सही समय पर इलाज ना मिलने से यह स्थिति आगे चलकर लिवर फेलियर का कारण बन जाती है।इस वक्त डॉक्टर के पास जाना जरूरी
लिवर सिरोसिस को समय पर पकड़ने के लिए कुछ लक्षणों के दिखने पर डॉक्टर के पास जरूर चले जाना चाहिए। अगर आपको लंबे समय से थकान महसूस होती रहती है और आराम करने के बाद भी ठीक नहीं होती, पीलिया हुआ है, पेट में सूजन रहती है या अचानक अपने आप वजन कम होने लगा है तो शांत ना बैठें। यह लिवर के अंदर गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं।लिवर सिरोसिस एक साइलेंट समस्या है, लेकिन बहुत गंभीर है। इसलिए अगर आपको लिवर रोग से जुड़ा कोई लक्षण दिखता है तो समय रहते डॉक्टर से परामर्श करना और जांच करवाना जरूरी हो जाता है। रेगुलर चेकअप करवाने, संतुलित डाइट लेने और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर लिवर को हमेशा स्वस्थ रखा जा सकता है।
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