इडली-डोसा के बैटर में पान का पत्ता डालने से क्या होता है? रसोई ने खोला राज, गर्मियों में काम आएगा उपाय

 

रसोई में अक्सर ऐसी कई पुरानी और पारंपरिक तरकीबें छिपी होती हैं, जो कमाल की होती हैं। कंटेंट क्रिएटर विन्नू ने भी पान के पत्तों को लेकर एक खास ट्रिक बताई है, जो गर्मी के मौसम में परफेक्ट इडली बनाने के काम आती है।

Why add betel leaves in idli or dosa batter
(फोटो साभार: insta@vinnuskitchensaga)
इडली-डोसा भारतीय रसोई में बड़े ही चाव से बनाया जाता है, लेकिन गर्मियों के आते ही गृहिणियों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है वो है बैटर का जल्दी खट्टा होना। तेज गर्मी के कारण घोल में खमीर इतनी तेजी से उठता है कि उसका स्वाद और गंध दोनों बिगड़ जाते हैं। इसी समस्या का एक बेहद अनोखा और पारंपरिक समाधान 'विन्नू की रसोई' से मिला है।


विन्नू ने खुलासा किया है कि कैसे एक साधारण पान का पत्ता इडली के घोल के लिए रक्षक का काम कर सकता है। अक्सर घी की महक बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाला यह पत्ता, इडली बैटर में डालने पर उसके पीएच लेवल को संतुलित रखता है और उसे लंबे समय तक ताजा बनाए रखता है।

विन्नू की रसोई का राज

विन्नू की रसोई का राज

विन्नू बताती हैं कि उन्हें हमेशा से पता था कि घी बनाते समय पान का पत्ता डालने से घी दानेदार और खुशबूदार बनता है। लेकिन जब उन्होंने इडली के घोल में इसके इस्तेमाल के बारे में सुना, तो वह खुद भी हैरान रह गईं। यह एक ऐसा 'दादी-नानी का नुस्खा' है जिसे दक्षिण भारतीय घरों में गर्मियों के मौसम में आजमाया जाता है।

गर्मियों में खट्टेपन पर लगाम

गर्मियों में खट्टेपन पर लगाम

गर्मियों के मौसम में इडली के बैटर के साथ सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वह बहुत जल्दी खट्टा हो जाता है। तेज गर्मी के कारण खमीर की प्रक्रिया इतनी तेज हो जाती है कि घोल से अजीब सी गंध आने लगती है। विन्नू के अनुसार, बैटर के बर्तन में एक साफ पान का पत्ता डालकर रखने से फर्मेंटेशन की प्रक्रिया कंट्रोल में रहती है और घोल जल्दी खट्टा नहीं होता।

पीएच लेवल का संतुलन

पीएच लेवल का संतुलन

पान के पत्ते में प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल और पीएच संतुलित करने वाले गुण होते हैं। जब आप इसे इडली के घोल में ऊपर से रख देते हैं, तो यह हानिकारक बैक्टीरिया को पनपने से रोकता है और लैक्टिक एसिड के स्तर को बहुत ज्यादा बढ़ने नहीं देता। यही कारण है कि आपका बैटर लंबे समय तक ताजा बना रहता है और इडली का स्वाद बना रहता है।

इडली की सफेदी और ताजगी

इडली की सफेदी और ताजगी

अक्सर ज्यादा खट्टा होने के बाद इडली पीली पड़ने लगती है या उसका स्वाद बिगड़ जाता है। पान के पत्ते का इस्तेमाल करने से न केवल घोल का खट्टापन कम होता है, बल्कि इडली भी रुई जैसी सफेद और नरम बनती है। यह पत्ता बैटर की नमी को भी बरकरार रखने में मदद करता है, जिससे इडली सूखती नहीं है।

प्राकृतिक खुशबू और सेहत

प्राकृतिक खुशबू और सेहत

पान का पत्ता पाचन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। जब इसे बैटर में डाला जाता है, तो इसकी हल्की सी प्राकृतिक खुशबू इडली को एक अनोखा एहसास देती है। यह नुस्खा पूरी तरह से केमिकल-मुक्त और फ्री का है। बस ध्यान रहे कि आपको पत्ता केवल बैटर के ऊपर रखना है या उसमें डुबोना है, उसे पीसना नहीं है।

बैटर में पान डालने की तरकीब

इस्तेमाल करने का सही तरीका

इस्तेमाल करने का सही तरीका

इस नुस्खे को आजमाना बेहद आसान है। एक ताजा और हरा पान का पत्ता लें, उसे अच्छे से धो लें। अब फर्मेंटेशन के लिए रखे गए इडली के बैटर के बर्तन में इस पत्ते को ऊपर से रख दें और ढक्कन बंद कर दें। जब आपको इडली बनानी हो, तो पत्ते को बाहर निकाल दें। विन्नू का कहना है कि यह छोटी सी ट्रिक गर्मियों में काफी काम आसान कर सकती है।

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