गमले में ढेरों मिर्च, टमाटर और भिंडी उगाने के लिए क्या करें? फ्री का घोल, फूल खिलते ही डालना होगा

 

अक्सर लोग घर की छत या बालकनी में सब्जियां उगाने का शौक रखते हैं, लेकिन शिकायत रहती है कि पौधों में फूल तो आते हैं पर वे फल बनने से पहले ही झड़ जाते हैं। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो माली का बताया फ्री का घोल डालकर देखें।

cheap trick to increase green Chilli, tomatoes and okra plant growth

घर की बालकनी या छत पर सब्जियां उगाना बहुत सुखद होता है, लेकिन अक्सर पौधों में फूल तो आते हैं पर वे फल बनने से पहले ही झड़ जाते हैं। मिर्च, टमाटर, बैंगन और भिंडी जैसे पौधों को फल देने के लिए खास पोटैशियम की जरूरत होती है। अगर आपके पौधों की ग्रोथ भी रुक गई है, तो माली का बताया फ्री का नुस्खा आपके गार्डन में जान फूंक सकता है।


लकड़ी की राख से तैयार यह जादुई घोल पौधों के लिए एक सुपरफूड की तरह काम करता है। सिर्फ 5 लीटर पानी और 5 मुट्ठी राख के सही इस्तेमाल से आप अपनी सब्जियों की पैदावार को कई गुना बढ़ा सकते हैं। इस घोल को पौधे में सही तरीके से डालना होगा, तभी आपको फायदा मिलेगा नहीं तो पौधे को नुकसान भी हो सकता है।

लकड़ी की राख का इस्तेमाल

लकड़ी की राख का इस्तेमाल

माली के इस नुस्खे के लिए आपको राख की जरूरत होगी, जो फ्री में ही मिल जाती है। क्योंकि राख में प्रचुर मात्रा में पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम पाया जाता है। पोटैशियम पौधों में फूलों को फलों में बदलने के लिए सबसे जरूरी तत्व है। यह जड़ों को मजबूत बनाता है और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे कीड़े-मकोड़े पौधों को नुकसान नहीं पहुंचा पाते।

घोल तैयार करने का सही तरीका

घोल तैयार करने का सही तरीका

इस लिक्विड को बनाना बेहद आसान है। आप सबसे पहले 5 लीटर पानी एक बड़ी बाल्टी में लें। इसमें 5 मुट्ठी शुद्ध लकड़ी की राख मिलाएं। इसे अच्छी तरह हिलाकर रातभर के लिए छोड़ दें। रात भर भीगने से राख के सारे पोषक तत्व पानी में घुल जाते हैं। ध्यान रहे कि कोयले की राख के बजाय लकड़ी की राख का इस्तेमाल करना पौधों के लिए ज्यादा सुरक्षित होता है।

5 गुना पानी का नियम

5 गुना पानी  का नियम

सुबह तक आपका 'कंसंट्रेटेड' घोल तैयार हो जाएगा। लेकिन इसे सीधे पौधों में नहीं डालना है। इस्तेमाल से पहले इस मिश्रण में 5 गुना सादा पानी मिलाएं। यानी अगर आपके पास 5 लीटर राख वाला पानी है, तो उसमें लगभग 25 लीटर सादा पानी और मिलाएं। इसे पतला करना इसलिए जरूरी है क्योंकि राख की तासीर गर्म और क्षारीय होती है, जो सीधे डालने पर पौधों की कोमल जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।

फ्लावरिंग स्टेज पर ही क्यों डालें?

फ्लावरिंग स्टेज पर ही क्यों डालें?

माली की सबसे जरूरी सलाह यह है कि इस घोल का इस्तेमाल फ्लावरिंग के समय करें। जब मिर्च, टमाटर, बैंगन या भिंडी के पौधों में छोटे-छोटे फूल दिखने लगें, तब उन्हें अतिरिक्त ताकत की जरूरत होती है। इस समय राख का पानी डालने से फूल झड़ते नहीं हैं और हर फूल से स्वस्थ सब्जी निकलती है। बेल वाली सब्जियां जैसे लौकी और तरोई में भी यह उतना ही असरदार है।

मिट्टी का सूखा होना है जरूरी

मिट्टी का सूखा होना है जरूरी

इस घोल को डालने से पहले गमले की मिट्टी की जांच जरूर करें। एक्सपर्ट के अनुसार, जब मिट्टी थोड़ी सूखी हो तभी यह खाद दें। गीली मिट्टी में खाद डालने से जड़ें उसे सही तरह से सोख नहीं पातीं और घोल गमले के नीचे से बाहर निकल सकता है। सूखी मिट्टी स्पंज की तरह काम करती है और राख के सारे पोषक तत्वों को सीधे जड़ों तक पहुंचा देती है।

गार्डनिंग एक्सपर्ट की टिप्स

इस्तेमाल का समय और सावधानी

इस्तेमाल का समय और सावधानी

अच्छे परिणाम के लिए इस घोल को एक-एक हफ्ते के अंतराल पर 2 से 3 बार दें। बहुत ज्यादा राख का इस्तेमाल मिट्टी के पीएच लेवल को बिगाड़ सकता है, इसलिए महीने में सिर्फ 2 या 3 बार ही इसका प्रयोग करें। इसके नियमित इस्तेमाल से आप देखेंगे कि आपके गमले सब्जियों से लद गए हैं और पौधों की पत्तियां भी चमकदार और हरी हो गई हैं।


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