Side Effects of Not Eating Enough: जरूरत से ज्यादा कम खाना शरीर के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। अगर आप वजन कम करने के लिए यह तरीका आजमा रहे हैं तो सावधान हो जाएं। इसकी वजह से वेट लॉस होने की वजह फैट बढ़ सकता है। बेरिएट्रिक सर्जन डॉ. विजय एस. पांडे ने इस तरह से वजन बढ़ने का कारण और वेट लॉस का सही तरीका बताया है।

कम खाने के बाद भी क्यों बढ़ता है वजन?
आपके शरीर की रेस्टिंग कैलोरी बर्न यानी बेसल मेटाबॉलिक रेट बदलकर बहुत धीमी होने लगती है। इसका मतलब है कि शरीर सांस लेने, ब्लड सर्कुलेट करने या गर्माहट बनाए रखने के लिए बहुत कम कैलोरी में ही काम करने लगता है और सर्वाइवल के लिए फैट को ज्यादा से ज्यादा बचाने की कोशिश में लग जाता है। इसके अलावा आप जितनी कैलोरी ले रहे होते हैं, वो भी जरूरत से ज्यादा होने की वजह से फैट बनकर स्टोर होने लगती है।
कम खाने के बाद बहुत ज्यादा खाने की इच्छा
बेसल मेटाबॉलिक रेट कम होने के दौरान ही आपके हॉर्मोन में बदलाव होने लगता है। दिमाग को खाने से पेट भरने का संकेत देने वाले लेप्टिन हॉर्मोन का लेवल कम होने लगता है। जबकि भूख का संकेत देने वाले घ्रेलिन हॉर्मोन का लेवल बढ़ने लगता है। यह उतार-चढ़ाव ना केवल आपकी भूख बढ़ाता है, बल्कि शरीर को पेट भरने का पता लगाने में मुश्किलें पैदा करता है। धीरे-धीरे इस हॉर्मोनल बदलाव की वजह से व्यक्ति को बहुत ज्यादा खाने की इच्छा करने लगती है, खासकर हाई कैलोरी वाले फूड, जिसकी वजह से उसकी फूड चॉइस भी अनहेल्दी हो जाती है।मसल्स लॉस का खतरा भी
जरूरत से ज्यादा कम खाने का एक नुकसान मसल्स लॉस है। जब आप बहुत कम कैलोरी के साथ कम प्रोटीन भी लेते हैं, तो शरीर एनर्जी बनाने के लिए लीन मसल्स का इस्तेमाल करने लगता है। मसल्स एक तरह के टिश्यू होती हैं, जो एनर्जी का इस्तेमाल करती हैं। बता दें कि यह फैट के मुकाबले ज्यादा कैलोरी उपयोग करती हैं। इसलिए मसल्स खोने पर मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर कम कैलोरी का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है। यही प्रक्रिया दोबारा पर्याप्त भोजन लेना शुरू करने के बाद भी जारी रहती है।
थकावट-कमजोरी का एहसास
कैलोरी को बहुत कम करने से थकान और कमजोरी आती है, जिससे शरीर की एक्टिविटी घटने लगती है। लोगों को एहसास नहीं होता कि वो पहले से कम घूमना-चलना, कम वर्कआउट और कम कैलोरी बर्निंग शुरू कर चुके हैं। इस नॉन-एक्सरसाइज एक्टिविटी थर्मोजेनेसिस (NEAT) में कमी आने से शरीर की एनर्जी इस्तेमाल करने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।दोबारा नॉर्मल खाने पर क्या होता है?
मेडिकल साइंस के नजरिए से लोगों को लंबे समय तक कड़ी डाइटिंग नहीं करनी चाहिए। इसकी वजह से लोग शुरू-शुरू में कुछ वजन जरूर घटा सकते हैं, लेकिन मेटाबॉलिज्म धीमा होने और हॉर्मोन में बदलाव आने की वजह उनका शरीर एक समय बाद वजन घटाना बंद कर देता है।जब वो वापस सामान्य रूप से खाना शुरू करते हैं, जो धीमा मेटाबॉलिज्म अतिरिक्त कैलोरी को ढंग से प्रोसेस नहीं कर पाता है। जिसकी वजह से वजन बहुत जल्दी और पहले से ज्यादा हो सकता है। इस स्थिति को रिबाउंड वेट गेन कहते हैं।
वेट लॉस करने का सही तरीका
- यह समझना बहुत जरूरी है कि केवल कम खाने से वजन नहीं घटता है। आपको हर दिन खाने से मिलने वाली कैलोरी से ज्यादा हेल्दी कैलोरी बर्न करने पर जोर देना चाहिए, जिससे मेटाबॉलिज्म को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
- कैलोरी को अचानक घटाने की जगह धीरे-धीरे कम करना चाहिए। पूरे दिन में मिलने वाली कैलोरी में औसतन 300 से 500 की कमी लेकर आएं। यह मेटाबॉलिज्म को नुकसान पहुंचाए बिना फैट लॉस में मदद करेगा।
- पर्याप्त प्रोटीन लेना जरूरी है, क्योंकि यह मसल्स लॉस से बचाने के साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह पेट को देर तक भरा रखकर मेटाबॉलिज्म को फायदा पहुंचाता है।
- मसल्स को मेंटेन या बढ़ाने के लिए रेजिस्टेंस की कोई फॉर्म इस्तेमाल करें। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मेटाबॉलिज्म को धीमा होने से रोकती है।
- डाइट में फल, सब्जियां, लीन प्रोटीन, हेल्दी फैट, कॉम्प्लेक्स कार्ब्स शामिल करके शरीर के लिए महत्वपूर्ण सभी न्यूट्रिएंट लें।
- अचानक एक्स्ट्रीम होने की जगह कंसिस्टेंट होना फायदेमंद है। यह हेल्दी हैबिट बनाने और वेट लॉस को हेल्दी बनाने के लिए जरूरी है।
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