Old Cars: पुराने जमाने में कई ऐसी कारें लॉन्च हुई थीं, जिसमें अपने समय से आगे की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की गई थी। ये गाड़ियां अपने समय की धुरंधर रही हैं। दशकों पहले लॉन्च हुईं इन कारों ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को बदल दिया था। इस कारों में इस्तेमाल की गई टेक्नोलॉजी आज के समय में मार्केट में आने वाली कारों में भी देखने को मिलती है। आइए आपको ऐसी चार कारों के बारे में डिटेल में बताते हैं।

लैंबॉर्गिनी काउंटैच (Lamborghini Countach)
1970 के दशक की इस कार ने सुपरकार बनाने का तरीका हमेशा के लिए बदल दिया था। इसका शानदार डिजाइन और इसमें लगा पावरफुल V12 इंजन उस समय किसी अजूबे से कम नहीं था। इसकी देखा-दूनी फेरारी जैसी कंपनियों ने भी अपनी कारों के डिजाइन में बदलाव किया। आज के समय में आने वाली शेवरले कॉर्विट तक में ऐसी ही डिजाइन देखने को मिलता है। 1974 में भी यह कार 290 किलोमीटर प्रति घंटा की टॉप स्पीड पकड़ सकती थी, जो आज की कई स्पोर्ट्स कारों के बराबर है। हालांकि, इसे चलाना थोड़ा मुश्किल था क्योंकि इसकी क्लच बहुत हैवी थी और पीछे का नजारा बिल्कुल नहीं दिखता था।
बुगाटी टाइप 35 (Bugatti Type 35)
1920 के दशक में जब ज्यादातर लोग बैलगाड़ियों से सफर करते थे, तब बुगाटी ने यह सुपरकार पेश की थी। खासियतों की बात करें तो यह वजन में बहुत हल्की (सिर्फ 725 किलो) थी। इसे एल्युमिनियम से बनाया गया था। इसका इंजन 140 हॉर्सपावर की पावर जेनरेट करता था और यह 210 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकती थी। इस कार ने 1924 से 1930 के बीच 2,000 से ज्यादा रेस जीती थीं।
होंडा इनसाइट (Honda Insight)
भले ही टोयोटा प्रियस पहली हाइब्रिड कार थी, लेकिन होंडा इनसाइट को शुरू से ही केवल हाइब्रिड कार के तौर पर ही डिजाइन किया गया था। इस कार का चेसिस बहुत हल्का था और इसमें 1-लीटर का 3-सिलेंडर वाला छोटा इंजन इस्तेमाल किया गया था, जिसे 10 किलोवाट के इलेक्ट्रिक मोटर के साथ जोड़ा गया था। इसे बनाने का मकसद माइलेज बढ़ाना और ईंधन की बचत करना था। आज दुनिया भर में हाइब्रिड कारों का जो बोलबाला है, उसकी नींव इसी कार ने रखी थी।
एएमसी ईगल (AMC Eagle)
आज हम सड़कों पर जो क्रॉसओवर एसयूवी (Crossover SUV) देखते हैं, उसकी शुरुआत 1980 में इस कार से हुई थी। उस समय फोर-व्हील ड्राइव (4WD) सिर्फ जीप या ट्रकों में होता था। लेकिन एएमसी ईगल पहली ऐसी कार थी जिसमें फोर-व्हील ड्राइव फीचर दिया गया था। यह शहर की आम सड़कों के साथ-साथ ऊबड़-खाबड़ रास्तों, पथरीली जगहों और कीचड़ और पानी से भरी सड़कों से भी आराम से निकल सकती थी।
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