Stepping out in sunlight from AC: बहुत सारे लोग गर्मी में एसी का इस्तेमाल करते हैं। कई बार एसी की ठंडक से सीधा धूप की गर्मी में जाना पड़ता है। दोनों स्थितियां एक दूसरे के विपरीत हैं, तो इसका शरीर पर क्या असर पड़ता है। क्या यह शरीर को कमजोर या बीमार बना सकता है, इस बारे में Dr. Vinaya Bhandari ने जानकारी दी है।

शरीर का इंटरनल थर्मोस्टेट सिस्टम
- स्किन मे मौजूद ब्लड वेसल्स चौड़ी होने लगती हैं, जिसे वैसोडिलेशन कहते हैं
- गर्मी बाहर निकालने के लिए स्वेट ग्लैंड्स काम करने लगती हैं
- दिल की धड़कन धीरे से बढ़ जाती है
शरीर को क्यों होता है 'शॉक' जैसा एहसास
डॉक्टर के मुताबिक, शरीर को जो असहजता होती है, वो 'हीट शॉक' जैसा एहसास होता है, जो कि तापमान बदलने पर नर्वस सिस्टम की प्रतिक्रिया से होता है। आपकी स्किन के पास खास टेंप्रेचर सेंसर होते हैं, जो दिमाग को सिग्नल भेजते हैं। ठंड से गर्म माहौल में अचानक बदलाव आने से ये सेंसर ओवरस्टिम्युलेट हो जाते हैं। दिमाग को तेजी से एडजस्ट करना पड़ता है, जिसकी वजह से कुछ पल के लिए भारीपन या भ्रम जैसी स्थिति हो सकती है। यह एहसास आमतौर पर हानिरहित होता है, लेकिन धूप या बहुत गर्म माहौल की वजह से इंटेंस हो सकता है।चक्कर आना और सिर घूमने की समस्या
ठंडे कमरे से सीधा धूप में जाने पर अक्सर सिर घूमने या चक्कर आने की शिकायत आमतौर पर देखी जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि आपकी रक्त वाहिकाएं अचानक से चौड़ी होने लगती हैं। थोड़े समय के लिए ब्लड प्रेशर गिर जाता है और दिमाग तक खून की सप्लाई कम पहुंचने लगती है। यह स्थिति अक्सर हल्की होती है, लेकिन डिहाइड्रेशन या ब्लड प्रेशर की दवा लेने पर थोड़ी ज्यादा प्रभावित कर सकती है।हाइड्रेशन का काम
एक्सपर्ट बताती हैं कि एयर कंडीशनर वाले माहौल में ह्यूमिडिटी कम होती है, जिससे बॉडी में ड्राईनेस बढ़ती है। आप ऐसे माहौल में पसीना निकाले बिना भी बॉडी फ्लूइड खोते रहते हैं। फिर आप जब गर्मी में कदम रखते हैं तो तेजी से पसीना निकलना शुरू हो जाता है और फ्लइड की कमी ज्यादा हो जाती है। अगर आप पहले से डिहाइड्रेटेड रहेंगे तो सिरदर्द, थकान और फोकस में कमी झेलनी पड़ सकती है।सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन जैसी हेल्थ एजेंसियां गर्मी के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए हाइड्रेशन पर ध्यान देने की सलाह देती हैं।
गर्मी में सिरदर्द
आसपास के तापमान में अचानक बदलाव आने से कुछ लोगों में सिरदर्द और माइग्रेन का दर्द होना आम है। Cephalalgia जैसे जर्नल पर प्रकाशित रिसर्च बताती हैं कि एनवायरमेंटल चेंजेस में गर्मी बढ़ने जैसा बदलाव दिमाग के अंदर मौजूद पेन पाथवे को एक्टिवेट कर सकता है। आसान भाषा में समझें तो ऐसे बदलावों के प्रति दिमाग काफी संवेदनशील होता है। टेंप्रेचर में आया बड़ा बदलाव ट्रिगर की तरह काम करता है। माइग्रेन के मरीजों के अंदर यह समस्या ज्यादा आम देखी जाती है।धूप से एसी में जाने पर क्या होता है?
अगर आप धूप या गर्मी से अचानक एसी के कमरे में जाएं तो भी शरीर पर प्रभाव पड़ता है। ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती है, जिसे वैसोकंस्ट्रिक्शन कहते हैं। इसकी वजह से पसीने का उत्पादन कम हो जाता है, स्किन टेंप्रेचर तेजी से गिरता है और कुछ लोगों को कोल्ड हेडेक (ठंड के कारण होने वाला सिरदर्द), हल्की अकड़न और साइनस में दिक्कत हो सकती है। हालांकि, ये समस्याएं भी अस्थाई होती हैं और शरीर संतुलन प्राप्त करने के लिए कोशिश करने लगता है।
क्या बार-बार सर्दी-गर्मी होने से बीमार पड़ते हैं?
लोगों के बीच एक सामान्य मान्यता है कि एसी से गर्मी में बार-बार आने जाने से बीमारी होती है। हालांकि यह पूरी तरह ठीक नहीं है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, अकेले तापमान में बदलाव आने से इंफेक्शन नहीं होता। इसका असल जिम्मेदार वायरस और बैक्टीरिया है। हालांकि, बार-बार ठंड-गर्मी में आने जाने से शरीर पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और एनर्जी लेवल व कंफर्ट प्रभावित होता है। इससे कुछ लोगों को थकान की समस्या हो सकती है।क्या शरीर खुद को ढाल लेता है?
मानव शरीर गर्मी के मुताबिक खुद को ढाल लेता है और इस प्रक्रिया को acclimatization कहते हैं। तापमान में नियमित होने वाले ऐसे बदलाव के बाद शरीर की पसीना उत्पादन करने की क्षमता माहौल के मुताबिक काम करने लगती है। दिल तनाव को झेलना सीख जाता है। आपको धूप में जाने पर कम परेशानी होने लगती है। लेकिन, लगातार एसी में रहने से यह प्रक्रिया प्रभावित भी हो सकती है।किन टिप्स का रखें ध्यान?
- एसी से धूप में जाने से पहले कुछ देर छाया में रहें।
- एसी में रहने पर भी पर्याप्त पानी पीएं।
- एसी का टेंप्रेचर बहुत कम ना रखें।
- अगर चक्कर आ रहे हैं तो सावधान हो जाएं और शरीर को माहौल के मुताबिक ढलने का समय दें।
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