बच्चा गुस्से में मारता या काटता है? ये 8 तरीके बिना डांटे उसका व्यवहार सुधारने में करेंगे मदद

 

छोटे बच्चे जब खुश होते हैं, तो खूब मस्ती करते हैं, लेकिन जब गुस्सा आता है, तो वे खुद को संभाल नहीं पाते और मारपीट करने लगते हैं। हालांकि, ऐसी स्थिति में माता-पिता को बच्चों को डांटने या गुस्सा करने की बजाय उन्‍हें यह समझाना चाहिए कि लड़ाई-झगड़े में मारपीट की जगह बातचीत से समस्या हल करना बेहतर तरीका होता है।

if your child hits or bites in anger try these 7 strategies instead of scolding to help improve behavior

अक्सर देखा जाता है कि छोटे बच्चे गुस्से में मारने या काटने लगते हैं। ऐसी स्थिति में कई बार पेरेंट्स भी उन पर गुस्सा करने लगते हैं, लेकिन यह तरीका ठीक नहीं है। अमेर‍िकन एकेडमी ऑफ पीड‍ियाट्र‍िक्‍स की रिपोर्ट बताती है कि छोटे या प्रीस्कूल बच्चों को अभी अपने गुस्से को शांत तरीके से व्यक्त करना नहीं आता, इसलिए वे स्वाभाविक रूप से मारने या काटने जैसी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी होती है कि वे इन स्थितियों को समझदारी से संभालें और बच्चों को गुस्से को सही तरीके से व्यक्त करना सिखाएं। साथ ही, वे नीचे दिए गए कुछ टिप्स की मदद से बच्चे के गुस्सैल व्यवहार को सुधार सकते हैं।

1- खुद पर कंट्रोल करें

सबसे पहले माता-पिता को यह समझना चाहिए कि जब बच्चा गुस्से में अपना आपा खो दे, तो उन्हें खुद शांत रहना और अपने व्यवहार पर कंट्रोल रखना जरूरी है। क्योंकि छोटे बच्चों में आत्म-नियंत्रण स्वाभाविक रूप से कम होता है, ऐसे में उन्हें सही व्यवहार सिखाने में आपकी अहम भूमिका होती है। आप बच्चों को सिखाएं कि गुस्से में लात मारना, पीटना या काटना गलत है। अगर उन्हें कोई बात बुरी लगती है, तो वे अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करें- जैसे ‘मुझे गुस्सा आ रहा है’ या ‘मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।’ उन्हें समझाएं कि किसी को मारना या काटना बिल्कुल भी सही नहीं है।

2-धमकी न दें

child hitting
बच्‍चे को धमकी न दें ( Image- Istock)


बच्चों के गलत व्यवहार पर पेरेंट्स को उन्हें गुस्‍से में डांटने या धमकी देने से बचना चाह‍िए, जैसे ‘अब शांत बैठो, नहीं तो सजा मिलेगी।’ इससे वे डर तो सकते हैं, लेकिन सही व्यवहार नहीं सीख पाते। इसके बजाय, उन्हें सही तरीका सिखाना ज्यादा असरदार होता है। साथ ही, छोटी-मोटी शरारत को कुछ समय के लिए नजरअंदाज करें और फिर शांत होकर समझाएं कि उन्हें क्या करना चाहिए।

3- फैमिली रूल्स समझाएं

पेरेंट्स को अपने फैमिली रूल्स के बारे में भी बच्चों को सिखाना चाहिए। क्योंकि बच्चे नियमों को तब तक नहीं समझते जब तक उन्हें सिखाया न जाए। इसलिए उनके व्यवहार के लिए स्पष्ट नियम और अपेक्षाएं बताएं, ताकि वे सही और गलत के बीच फर्क समझ सकें।

4- तारीफ करें

child hitting
बच्‍चे के अच्‍छे ब‍िहेव‍ियर की तारीफ करें Image- Istock


अनुशासन तभी सबसे ज्यादा असरदार होता है जब उसे लगातार अपनाया जाए, सिर्फ तब नहीं जब बच्चा गलती करे। साथ ही, जब आपका बच्चा अच्छा व्यवहार करे, तो उसकी सराहना जरूर करें। उसे बताएं कि वह कितना समझदारी से पेश आ रहा है। जैसे अगर वह किसी से विनम्रता से बात करता है या शांति से व्यवहार करता है, तो उसकी तारीफ करें और उसे खुले-द‍िल से प्‍या करें। इससे वह सही आदतें जल्दी सीखता है।

5- बच्‍चों को खुद सुलझाने दें झगड़ा

माता-पिता को अपने बच्चे पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और खेल के दौरान उनके झगड़ों पर ध्यान देना चाहिए। अगर झगड़ा मामूली हो, तो थोड़ा दूरी बनाए रखते हुए बच्चों को खुद ही सुलझाने का मौका दें। हालांकि, जब बच्चे आपस में हाथापाई करने लगें या रोकने के बाद भी लड़ाई जारी रहे, तो तुरंत दखल देना जरूरी है। ऐसी स्थिति में, जब एक बच्चा गुस्से में दूसरे को मार रहा हो या काट रहा हो, तो दोनों को अलग करें और शांत होने तक उन्हें अलग रखें। इसके बाद उन्हें यह समझाएं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लड़ाई किसने शुरू की, बस एक-दूसरे को चोट पहुंचाने की कोशिश का कोई भी बहाना सही नहीं होता। इसील‍िए उन्‍हें इस बात का ध्‍यान रखना होगा क‍ि वे क‍िसी को भी चोट नहीं पहुंचा सकते।

6-सख्‍ती से न कहना स‍िखाएं

पेरेंट्स को अपने बच्चे को सख्ती से ‘ना’ कहना सिखाना चाहिए। साथ ही यह भी समझाएं कि अगर कभी लड़ाई-झगड़े की स्थिति बने, तो वहां से हट जाना और मारपीट की बजाय बातचीत से समस्या हल करना बेहतर होता है। उदाहरण देकर उन्हें सिखाएं कि शब्दों से बातचीत को सुलझाना लड़ाई या मारपीट करने से ज्यादा सही तरीका है।

7- ध्‍यान भटकाएं

बच्चों का व्यवहार सुधारने का एक और असरदार तरीका है उनका ध्यान भटकाएं। जब बच्चा गुस्सा या परेशान होने लगे, तो उसे किसी दूसरी एक्टिविटी में लगा दें, इससे वह जल्दी शांत हो सकता है। बस ध्यान रखें कि उन्हें अलग तरह से व्यवहार करने के लिए लालच न दें।

8- स्‍ट्राॅन्‍ग रहें

अंत में, यह बेहद जरूरी है कि बच्चे का व्यवहार सुधारते समय आप खुद को गिल्टी महसूस न करें और बिना वजह माफी न मांगें। अगर बच्चा आपकी उलझन या कमजोर भावनाओं को समझ लेता है, तो वह खुद को सही और आपको गलत मान सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप पूरे आत्मविश्वास के साथ मजबूत बने रहें।

Comments