Exercise for Cervical Spondylosis: सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की पहचान उसके खास लक्षणों से की जाती है। इसका दर्द अकड़ाहट, सुन्नपन या झुनझुनी के साथ आ सकता है। इससे राहत पाने के लिए शोल्डर रोल, नेक रोटेशन और चिन टक जैसी एक्सरसाइज फायदेमंद होती हैं। स्पाइन और ऑर्थोपेडिक डॉ. अनिल रहेजा ने सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण और इसे मैनेज करने के आसान तरीकों के बारे में बताया है।

सबसे पहले समझें सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस क्या है?
रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से को सर्वाइकल कहते हैं, जो गर्दन में मौजूद होता है और सिर को संभालने और हिलाने की जिम्मेदारी निभाता है। सर्वाइकल के अंदर 7 वर्टिब्रे और कई सारे डिस्क व जोड़ होते हैं। जब उम्र बढ़ने के साथ इन वर्टिब्रे, डिस्क और जोड़ों में कमजोरी या डैमेज होने लगती है तो इस स्थिति को सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कहा जाता है यानी उम्र के कारण सर्वाइकल हिस्से में होने वाला वेयर एंड टेयर।
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के खास लक्षण
डॉक्टर अनिल रहेजा के मुताबिक, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का सबसे आम लक्षण गर्दन का दर्द है। लेकिन इसके साथ मरीज को गर्दन में अकड़ाहट, सिरदर्द और कभी-कभी गर्दन का दर्द कंधों और हाथों तक फैलता हुआ महसूस होता है। दर्द के साथ झुनझुनी या सुन्नपन भी परेशान कर सकता है। इन 6 संकेतों की मदद से आप सर्वाइकल के दर्द और सामान्य दर्द के बीच अंतर कर सकते हैं। यह स्थिति दर्दनाक होती है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे मैनेज करना आसान है।सबसे पहला काम है पोस्चर सही रखना
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का सबसे आम कारण पोस्चर का बिगड़ना है। लैपटॉप-मोबाइल का लंबे समय तक इस्तेमाल करने या गर्दन को झुकाकर काम करने से सर्वाइकल स्पाइन पर दबाव पड़ता रहता है। इसलिए इस समस्या से राहत पाने के लिए आपको सबसे पहले शरीर का पोस्चर ही सही करना पड़ेगा। मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन को आंखों के लेवल पर रखें, कमर और सिर को एक सीध में रखें और गर्दन को लंबे समय तक झुकाने से बचकर पोस्चर को सुधारा जा सकता है। दिन में बार-बार अपनी कुर्सी, वर्कस्टेशन का सेटअप और बॉडी का पोस्चर चेक करते रहें, इससे कुछ दिनों में आपके लक्षणों में कमी देखने को मिलेगी।सर्वाइकल के दर्द के लिए एक्सरसाइज व थेरेपी
डॉक्टर के अनुसार, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस को मैनेज करने के लिए रेगुलर फिजियोथेरेपी लेना काफी प्रभावशाली होता है। गर्दन की मजबूती और स्ट्रेचिंग वाली एक्सरसाइज से फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाकर अकड़न को दूर किया जा सकता है। नेक रोटेशन (आराम से गर्दन घुमाना), चिन टक और शोल्डर रोल (कंधों को घुमाना) जैसी आसान एक्सरसाइज से इस हिस्से की मसल्स का तनाव कम कर सकते हैं। इन सभी एक्सरसाइज को पूरे मार्गदर्शन और निगरानी में करना चाहिए। जल्दी और बेहतर रिजल्ट पाने के लिए रोजाना इन एक्सरसाइज की प्रैक्टिस करें।सर्वाइकल पेन कम करने वाली दवाएं
जिन लोगों को ज्यादा दर्द होता है, उन्हें दवाएं भी दी जाती हैं। एंटी-इंफ्लामेटरी ड्रग्स और मसल्स को रिलैक्स करने वाली दवाओं से दिक्कत को कम किया जाता है। कुछ मामलों में टॉपिकल जेल या हीट पैच लगाने की सलाह दी जाती है। लेकिन समस्या की जड़ को ठीक करने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव करना और फिजिकल थेरेपी अहम होती है।गर्म और ठंडी सिकाई से मिलता है तुरंत आराम
गर्म और ठंडी सिकाई करने से दर्द और अकड़ाहट जैसे लक्षणों से तुरंत व अस्थाई आराम प्राप्त होता है। गर्म सिकाई से टाइट मसल्स को रिलैक्स करने, ब्लड सर्कुलेशन सुधारने और अकड़ाहट दूर करने में मदद मिलती है। ठंडी सिकाई से सूजन व इंफ्लामेशन कम होती है। आप दिन में कभी गर्म, कभी ठंडी सिकाई करके आराम पा सकते हैं।
लाइफस्टाइल और आदतों में क्या बदलाव करें?
- एक कंधे पर भारी वजन डालने से बचें
- सोते वक्त सपोर्टिव तकिए का इस्तेमाल करें
- सोने वाला गद्दा स्पाइन को सपोर्ट देने वाला होना चाहिए
- लंबे समय तक चलने वाले काम के बीच छोटे-छोटे रेगुलर ब्रेक लें
- फिजिकली एक्टिव रहें और बॉडी वेट को कंट्रोल में रखें
- गर्दन को तेज और झटके से घुमाने से बचें
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