बच्चों को नाश्ते में चाय-बिस्कुट बिल्कुल न दें, बढ़ सकता है एनीमिया का खतरा, ये 5 जोखिम भी हैं शामिल
कभी बच्चों की जिद तो कभी जल्दबाजी में माता-पिता उन्हें नाश्ते में चाय और बिस्कुट दे देते हैं। लेकिन यही आदत धीरे-धीरे उनकी सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। यह स्नैक्स बच्चों को जरूरी पोषण नहीं देता और इससे एनीमिया (खून की कमी) का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के लिए हेल्दी और पौष्टिक नाश्ते के विकल्प चुनें।

इसलिए जरूरी है कि बच्चों को हेल्दी नाश्ते के विकल्प दिए जाएं, जैसे वेजिटेबल पोहा, पनीर स्टफिंग वाला चीला और अन्य पौष्टिक चीजें। नीचे पेरेंट्स इसके बारे में विस्तार से समझ सकते हैं।
आखिर चाय- बिस्किट अनहेल्दी क्यों हैं?
सुबह का नाश्ता बच्चे के पूरे दिन की ऊर्जा, दिमाग के काम (कॉग्निटिव फंक्शन) और ओवरऑल हेल्थ के लिए बहुत जरूरी होता है। वहीं, चाय-बिस्किट में पोषण न के बराबर होता है। बिस्किट ज्यादातर मैदा, चीनी और अनहेल्दी फैट से बने होते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल जैसे जरूरी पोषक तत्व लगभग नहीं के बराबर होते हैं।
वहीं, चाय में भी कोई खास पोषण नहीं होता। ऐसे में चाय और बिस्कुट मिलकर सिर्फ ‘खाली कैलोरी’ देते हैं, जो पेट तो भरते हैं लेकिन शरीर को जरूरी ताकत और पोषण नहीं देते। इसी वजह से यह कॉम्बिनेशन पूरी तरह से
बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहतर पर असर
1: बढ़ता है एनीमिया का खतरा: चाय में टैनिन नाम का तत्व होता है, जो शरीर में आयरन को सही तरीके से अवशोषित होने से रोकता है। अगर बच्चे रोज सुबह चाय पीते हैं, तो उनके शरीर में आयरन की कमी हो सकती है और आगे चलकर एनीमिया (खून की कमी) का खतरा बढ़ जाता है। इससे बच्चे की ग्रोथ और इम्यूनिटी दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है।2: चिड़चिड़ापन बढ़ सकता हैं:बिस्कुट में चीनी ज्यादा होती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और फिर अचानक गिर जाता है। इस उतार-चढ़ाव की वजह से बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं, उनका ध्यान कम लगने की शिकायत हो सकती है और बार-बार कुछ अनहेल्दी खाने की इच्छा होने लगती है।
3: खराब हो सकती है नींद: कैफीन वाली चाय बच्चों के लिए सही नहीं होती। यह उनकी नींद खराब कर सकती है, बेचैनी को बढ़ा सकती है। साथ ही, इससे बच्चे का ध्यान लगाने की क्षमता और व्यवहार भी प्रभावित हो सकता है।
4: अनहेल्दी खाने की इच्छा बढ़ सकती है: यह कॉम्बिनेशन ज्यादा देर तक ऊर्जा नहीं देता। बच्चे थोड़ी ही देर में फिर भूखे महसूस करने लगते हैं, जिससे वे बाद में ज्यादा खाना खा सकते हैं या बार-बार अनहेल्दी स्नैक्स की मांग करने लगते हैं।
5: इम्युनिटी कमजोर हो सकती है: हर दिन चाय और बिस्कुट खाने से बच्चों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता। इससे उनके विकास पर असर पड़ सकता है। ऐसी आदत के कारण बच्चे जल्दी थक सकते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर हो सकती है और शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है और वो भी खासकर आयरन और कैल्शियम की।
6: मोटापा बढ़ सकता है: इसके अलावा, ज्यादा चीनी लेने से बच्चों में मोटापा बढ़ सकता है और दांतों से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
7: याददाश्त कमजोर हो सकती है: पोषण की कमी वाला नाश्ता बच्चों के दिमाग पर भी असर डालता है। ऐसे में बच्चों को कॉन्स्ट्रेशन में दिक्कत होती है, याददाश्त कमजोर हो सकती है और शैक्षणिक प्रदर्शन में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।
हेल्दी नाश्ते के आसान विकल्प
मूंगफली के साथ वेजिटेबल पोहा- दही के साथ होल व्हीट वेजिटेबल पराठा
- दूध और फलों के साथ ओट्स दलिया
- सांभर और नारियल की चटनी के साथ इडली
- पनीर स्टफिंग वाला बेसन चिल्ला
- होल ग्रेन टोस्ट के साथ उबले अंडे
- मेवे और बीजों के साथ फ्रूट स्मूदी
- सब्जियों के साथ उपमा
- सादा या मीठा दलिया
- दूध के साथ पीनट बटर या पनीर सैंडविच
कैसे छुड़ाएं यह आदत
धीरे-धीरे बदलाव करें: पेरेंट्स ध्यान रखें कि आदत एकदम से नहीं छूटती। इसलिए चाय-बिस्कुट की जगह धीरे-धीरे दूध, फल या हेल्दी नाश्ता देना शुरू करें।खुद उदाहरण बनें: बच्चे वही सीखते हैं जो माता-पिता करते हैं। अगर आप हेल्दी नाश्ता करेंगे, तो बच्चा भी अपनाएगा।
नाश्ता मजेदार बनाएं: रंग-बिरंगे फल, अलग-अलग शेप और अच्छे तरीके से सजाकर खाना दें, ताकि बच्चे को पसंद आए।
समय तय करें: हर दिन एक ही समय पर नाश्ता कराएं। इससे बच्चे को आदत पड़ जाएगी।
प्यार से समझाएं: बच्चे को आसान भाषा में बताएं कि अच्छा खाना उसे ताकत देता है और खेलने-सीखने में मदद करता है।
पेरेंट्स को यह समझना जरूरी है
पेरेंट्स को यह समझना जरूरी है कि चाय और बिस्कुट आसान लगते हैं, लेकिन ये बच्चों को पूरा पोषण नहीं देते। इससे उनके शरीर और दिमाग के विकास पर नकरात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए बच्चों को ऐसा नाश्ता देना जरूरी है जो पोषक तत्वों से भरपूर हो और संतुलित भी हो। क्योंकि अच्छा नाश्ता उन्हें दिनभर ऊर्जा देता है और पढ़ाई में ध्यान लगाने में भी मदद करता है। वहीं, माता-पिता अगर धीरे-धीरे और लगातार कोशिश करें, तो बच्चों की यह आदत आसानी से बदल सकते हैं।
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