छोटे बच्चों को कब्ज से बचाने के लिए डाइट में शामिल करें पालक समेत ये फूड्स, 5 लक्षण दिखते ही डॉ.से करें संपर्क

 

अगर आपका बच्चा बार-बार कब्ज से परेशान रहता है, तो इसके पीछे गलत खान-पान और कम पानी पीना समेत कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं। इस समस्या से बचाव के लिए जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों की डाइट में पालक, गाजर और बीन्स जैसी फाइबर रिच सब्जियां शामिल करें, ताकि पाचन बेहतर बना रहे और इस समस्या से बचा जा सके।

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बच्‍चों को कब्‍ज से बचाने के ल‍िए ख‍िलाएं पालक और गाजर (लेख मे यूज की गईं सभी तस्‍वीरें सांकेत‍िक हैं) Image-freepik
मेरे पास अक्सर ऐसे कई पेरेंट्स आते हैं, जिनके बच्चे बार-बार कब्ज की समस्या से परेशान रहते हैं। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह संतुलित और फाइबर से भरपूर डाइट न लेना और शारीरिक गतिविधि की कमी होती है। हालांकि यह समस्या आमतौर पर गंभीर नहीं होती, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर बच्चे को बेचैनी, चिड़चिड़ापन और भूख कम लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे शुरुआत से ही बच्चों में हेल्दी आदतें विकसित करें, जैसे समय पर खाना खाना और रोजाना शारीरिक गतिविधि करना, जिससे उनकी पाचन बेहतर बना रहे।

क्‍या हैं कब्‍ज के लक्षण?

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कब्‍ज के लक्षण क्‍या हैं ? Image-freepik
कब्ज के लक्षणों में आमतौर पर पॉटी का अनियमित होना, सख्त या सूखी पॉटी आना और पॉटी करते समय दर्द या परेशानी होना शामिल है। बच्चों को पेट दर्द, पेट फूलना या पेट ठीक से साफ न होने जैसा महसूस हो सकता है। कुछ बच्चे दर्द के डर से वॉशरूम जाने से बचते हैं, जिससे समस्या और बढ़ सकती है। वहीं, गंभीर मामलों में भूख कम लगना या थोड़ा-थोड़ा पॉटी लीकेज जैसी समस्‍या भी देखी जा सकती है।

कब्‍ज से बचने के ल‍िए क्‍या करें?

कब्ज से बचाने के लिए पेरेंट्स को बच्चों की डाइट का खास ध्यान रखना चाहिए। उन्हें संतुलित और फाइबर से भरपूर खाना देना जरूरी है। इसके लिए ओट्स, ब्राउन राइस और गेहूं जैसे साबुत अनाज रोज के आहार में शामिल करें। साथ ही पपीता, सेब (छिलके सहित), नाशपाती और केला जैसे फल भी दें, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और आंतों की कार्यप्रणाली को मजबूत करते हैं।

इसके अलावा, पालक, गाजर और बीन्स जैसी हरी सब्जियां भी बच्चों के पाचन के लिए फायदेमंद होती हैं। दही जैसे प्रोबायोटिक फूड आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जिससे पाचन मजबूत होता है।

साथ ही, बच्चों को दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना बेहद जरूरी है, ताकि शरीर हाइड्रेट रहे और पॉटी नरम बनी रहे।

कब्ज बढ़ाने वाले क‍िन फूड्स से रहें दूर

तले-भुने खाने, रिफाइंड आटा, चॉकलेट, कैफीनयुक्त ड्रिंक्स और पैकेटबंद स्नैक्स का ज्यादा सेवन करने से बचें, क्योंकि ये कब्ज के साथ-साथ एसिडिटी को भी बढ़ा सकते हैं। इसलिए पेरेंट्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे बच्चों को इन चीजों का सेवन कम से कम कराएं और उनकी डाइट में हेल्दी विकल्प शामिल करें।

कब्‍ज से बचाव के एक्टिविटी जरूरी है:

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कब्‍ज से बचाव के फ‍िज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी है बेहद जरूरी (Image- freepik)


पाचन को स्वस्थ रखने में फिजिकल एक्टिविटीअहम भूमिका निभाती है। नियमित मूवमेंट से आंतें बेहतर तरीके से काम करती हैं, जिससे खाना आसानी से पचता है। इसलिए पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों को दौड़ने, साइकिल चलाने, बाहर खेलने या हल्की एक्सरसाइज की आदत डालें, जिससे पेट की समस्याएं कम हो सकें। वहीं, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने से कब्ज और आंतों से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसलिए इस पर भी ध्यान देना जरूरी है।

ये उपाय भी आएंगे काम:

बच्चों को समय पर भोजन करने के लिए प्रोत्साहित करें और खाना छोड़ने की आदत से बचाएं। इसके अलावा, उन्हें धीरे-धीरे खाना खाने और भोजन को अच्छी तरह चबाने की आदत सिखाएं। इसके साथ ही, नियमित समय पर टॉयलेट जाने की आदत विकसित करना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि नींद की कमी पाचन और मेटाबॉलिज्म दोनों को प्रभावित कर सकती है। स्क्रीन टाइम सीमित करें और बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि उनका समग्र स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।

डॉक्‍टर को कब द‍िखाएं:

अगर कब्ज दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, बच्चे को तेज पेट दर्द, उल्टी, पॉटी में खून या वजन कम होने जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

पेरेंट्स ध्‍यान रखें ये बात:

बच्चों को कब्ज से बचाने के लिए सबसे जरूरी है क‍ि पेरेंट्स को उनकी दिनचर्या को ठीक रखें। उन्हें समय पर खाना ख‍िलाएं, पर्याप्त पानी पिलाएं और रोज एक्टिवि‍टी करने की आदत डालें। इन आदतों को बचपन से अपनाने से पाचन बेहतर रहता है। ध्‍यान रखें क‍ि दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय शुरू से ही अच्छी आदतें डालना सबसे आसान और असरदार तरीका है।

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