दिमाग तेज करने वाली 4 मिनट की रेसिपी, ब्राह्मी, मंडूकपर्णी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा, ज्योतिषमति, जटामांसी भी कारगर

 

Ayurvedic Remedies For Stronger Brain: याददाश्त कम होना और धीरे-धीरे निर्णय लेना दिमाग की कमजोरी के लक्षण हो सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ यह दिक्कत आना स्वाभाविक है, जिसकी गंभीरता को कम करने के लिए कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां काफी प्रभावशाली होती हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री तत्व में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सक ने दिमाग तेज करने वाली एक 4 मिनट की रेसिपी भी शेयर की है।

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दिमाग तेज करने वाली आसान रेसिपी (सांकेतिक तस्वीर)
मैं अक्सर 25 वर्ष के बाद लोगों की दिमागी शक्ति में तेजी से गिरावट आते हुए देखता हूं। कभी वो किसी का नाम भूल जाते हैं तो कभी कोई शब्द याद नहीं आता। आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री तत्व में आयुर्वेदिक चिकित्सक होने के नाते मैं उन्हें ब्राह्मी, मंडूकपर्णी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा, ज्योतिषमति, जटामांसी का उपयोग करने की सलाह देता हूं। आप बढ़ती उम्र में दिमाग को ताकतवर बनाए रखने के लिए घर पर एक 4 मिनट वाला देसी उपाय भी कर सकते हैं।

दिमाग को जल्दी बूढ़ा होने से कैसे बचाएं?

उम्र बढ़ने पर दिमाग की रक्त वाहिकाएं संकुचन और अकड़न से प्रभावित होती हैं। इसकी वजह से ब्लड फ्लो घट जाता है और रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज का खतरा होता है। इसके अलावा, व्हाइट मैटर लेसन, स्ट्रोक का अधिक खतरा और दिमाग को धीमा ऑक्सीजन पहुंचना भी शुरू हो जाता है। यह सारी स्थितियां याददाश्त और कॉग्नीटिव फंक्शन को प्रभावित करती हैं। इसकी वजह से डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारी होती है। दिमाग की बायोलॉजिकल एजिंग को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन वक्त से पहले आने से बचाया जा सकता है।

आयुर्वेद के नजरिए से दिमाग की कमजोर कैसी आती है?

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दिमागी कमजोरी का कारण


40 की उम्र के बाद दिमागी कमजोरी के लक्षण साफ दिखने लगते हैं। इनके पीछे वात का असंतुलन होता है। यह एनर्जी स्पेस और एथर से बनी होती है, जो पूरे नर्वस सिस्टम को रेगुलेट करती है। मानसिक तनाव, इंसोम्निया, ओवरथिंकिंग और कमजोर नर्वस सिस्टम का मतलब है कि आपको पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है।

हेल्दी ब्रेन के लिए जरूरी 3 न्यूट्रिएंट्स

  • एंटीऑक्सीडेंट्स - एंटीऑक्सीडेंट्स दिमाग को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाते हैं। यह डैमेज उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है और कॉग्निटिव डिक्लाइन का कारण बनता है। पालक, गाजर, टमाटर, कद्दू, सफेद पेठा जैसी सब्जियों के साथ ब्लूबेरी, आंवला, स्ट्रॉबेरी जैसे फूड्स इस पोषक तत्व से भरपूर होते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी से दिमाग में सेलुलर डिटेरियोरेशन तेजी से होती है और अल्जाइवर व डिमेंशिया का खतरा होता है।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड - यह ब्रेन सेल्स मेंब्रेन के स्ट्रक्चर और फ्लेक्सिबिलिटी को मेंटेन रखने के लिए आवश्यक है। पर्याप्त ओमेगा-3 ना लेने से न्यूरल कम्युनिकेशन कमजोर पड़ जाता है, याददाश्त खोने लगती है और फोकस करने में दिक्कत आने लगती है। अलसी के बीज, अखरोट, चिया सीड्स, बादाम, हरी पत्तेदार सब्जियों को इनका बेस्ट प्लांट सोर्स माना जाता है।
  • विटामिन बी - खासतौर से, विटामिन बी1, बी6 और बी12 नर्वस सिस्टम को सीधा मदद पहुंचाते हैं और ये न्यूरोट्रांसमीटर फंक्शन में अहम रोल निभाते हैं। इनकी कमी को नर्व डीजनेरेशन, खराब याददाश्त और न्यूरोलॉजिकल कंडीशन से जोड़ा जाता है। साबुत अनाज, बीन्स, फलियां, सूरजमुखी के बीज, मटर और एस्पैरेगस इनका अच्छा सोर्स हैं।


तेज दिमाग के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां

इन तीन पोषक तत्वों के अलावा आयुर्वेद में कुछ जड़ी बूटियों को दिमागी स्वास्थ्य बढ़ाने वाला माना जाता है और इन्हें मेध्य रसायन कहा जाता है। वयस्कों को इन्हें रेगुलर रुटीन में जोड़ लेना चाहिए।

ब्राह्मी

दिमाग और नर्वस सिस्टम के लिए ब्राह्मी बेस्ट हर्ब है। यह दिमाग के लेफ्ट और राइट हेमिस्फेयर को बैलेंस करने के साथ पीनियल ग्लैंड को डीकैल्सिफाई करती है। यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने और ब्रेन सेल्स के एक दूसरे के साथ कनेक्शन बनाने में मदद करती है। इससे याददाश्त तेज होती है, सोचने की क्षमता बढ़ती है, न्यूरल रीजनेरेशन को सपोर्ट मिलता है और अल्जाइमर से जुड़े प्लाक का बिल्ड अप होने से बचाव होता है। ब्राह्मी नर्वस सिस्टम से टॉक्सिन और ब्लॉकेज हटाने में मदद रकती है।

इसे डिप्रेशन को दूर करने के साथ ज्ञान, समझदारी, मेमोरी और फोकस में बढ़ोतरी करने वाला देखा जाता है। आप ब्राह्मी की चाय या इसे उबले दूध के साथ ले सकते हैं। ब्राह्मी घी का सेवन भी कर सकते हैं, जो कि घी के अंदर ब्राह्मी एक्सट्रेक्ट को मिलाकर बनाया जाता है। इसे आयुर्वेदिक हेयर ऑयल की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

मंडूकपर्णी

मंडूकपर्णी न्यूरोट्रांसमीटर फंक्शन को सुधारकर दिमाग को फायदा पहुंचाती है। यह एंग्जायटी और मेंटल स्ट्रेस घटाने में असरदार देखी जाती है। इससे नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन और कोलेस्ट्रॉल लेवल को मैनेज करने में सपोर्ट मिलती है, जिससे मेंटल अलर्टनेस और कॉग्निटिव फंक्शन बढ़ता है।

शंखपुष्पी

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शंखपुष्पी का फायदा (सांकेतिक तस्वीर)


शंखपुष्पी भारत में काफी लोकप्रिय है। यह मेमोरी, फोकस और लर्निंग सुधारने का काम करती है। यह मानसिक थकान, तनाव और डिप्रेशन से बचाती है और सिरदर्द से राहत देकर स्लीप और भूख के प्रोसेस को हेल्दी रखती है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा से कोर्टिसोल घटता है और शरीर तनाव को अच्छी तरह झेल पाता है। यह मेंटल एग्जॉशन को दूर रखने, न्यूरोन को बचाने और कॉग्निटिव एंड्युरेंस को बढ़ाने में मदद करता है। इसमें लॉन्जिविटी बढ़ाने वाली प्रोपर्टीज भी मानी जाती हैं।

ज्योतिषमति

ज्योतिषमति मेंटल क्लीयरिटी लाती है और बौद्धिक शक्ति बढ़ाती है। यह नर्वस सिस्टम को सपोर्ट करने के साथ, लिवर और दिल का फंक्शन बढ़ाती है। याद करने और सोचने की क्षमता को बढ़ाने के लिए इसका पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

जटामांसी

जटामांसी जड़ी बूटी को नर्वाइन टॉनिक कहा जाता है, क्योंकि इसका जटामांसोन कंपाउंड नर्वस सिस्टम को शांत करने के साथ दिमाग में GABA का लेवल बढ़ाता है। इससे एंग्जायटी और डिप्रेशन को कम करने में मदद मिलती है, अच्छी नींद आती है और न्यूरोडीजनेरेशन से बचाव होता है।

तेज दिमाग के लिए 4 मिनट की रेसिपी

मुट्ठीभर ब्लूबेरी, एक पका केला, एक कप बादाम का दूध या नारियल पानी, एक मुट्ठी पालक, एक चम्मच अखरोट या अलसी के बीज, एक चुटकी हल्दी और शहद की कुछ बूंदें एक गिलास में डालकर मिलाएं और सेवन करें। यह एक अकेला गिलास एंटीऑक्सीडेंट्स, ओमेगा-3 फैटी एसिड, फोलेट और एंटी-इंफ्लामेटरी कंपाउंड्स साथ में देगा। 4 मिनट वाली यह रेसिपी दिमाग की सारी पौष्टिक जरूरतों को पूरा कर देगी।

ध्यान रखें दिमाग एक रात में ना कमजोर होता है और ना ही एक रात में स्वस्थ बनता है। धीरे-धीरे वक्त के साथ छोटे-छोटे बदलावों से हालात बदलते हैं। यहां बताई गई जड़ी बूटी और रेसिपी को सप्लीमेंट्स की तरह ना समझें, बल्कि इसे अपने रुटीन और डाइट का हिस्सा बनाएं। रोजाना ताजा, घर का पका, सात्विक खाना खाएं और अस्वस्थ आदतों से दूर रहें।

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