Ovarian Cancer Silent Signs: ओवेरियन कैंसर को क्यों मानते हैं 'साइलेंट किलर', क्या इसका कोई लक्षण नहीं दिखता?
Ovarian Cancer Signs in Women: ओवेरियन कैंसर महिलाओं की ओवरी में होने वाली एक खतरनाक बीमारी है, जो जानलेवा साबित हो सकती है। इस बीमारी को चुपचाप नुकसान पहुंचाने वाला माना जाता है, क्योंकि इसके लक्षण अक्सर दूसरी बीमारियों से जुड़े समझ लिए जाते हैं। जिस वजह से इस कैंसर की पहचान करने और इलाज मिलने में देरी हो सकती है। हर महिला को इसके संभावित 7 लक्षणों के बारे में जागरूक रहना चाहिए।

1. हमेशा ब्लोटिंग रहना
2. पेल्विक और एब्डोमिनल का दर्द
पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में होने वाले दर्द या तकलीफ को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। महिलाएं अक्सर इस दर्द को मेंस्ट्रुअल पेन या डायजेस्टिव डिस्कंफर्ट समझ लेती हैं। लेकिन अगर यह दर्द लगातार बना हुआ है और कोई वजह समझ नहीं आ रही तो डॉक्टर से तुरंत कंसल्ट कर लेना चाहिए।3. जल्दी पेट भर जाना
अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के आपका पेट जल्दी भर जाता है या भूख में कमी महसूस होने लगती है तो यह छिपी हुई समस्या के कारण हो सकता है। ऐसा ओवेरियन ट्यूमर की वजह से पड़ने वाले प्रेशर या फ्लूइड इकट्ठा होने की वजह से होता है।4. बॉवल हैबिट में बदलाव
कब्ज, डायरिया या अनियमित बॉवल मूवमेंट जैसी पेट की दिक्कतें ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकती हैं। अक्सर यह समस्याएं गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रोब्लम्स की वजह से होती हैं, इसलिए ओवेरियन कैंसर के रूप में इनकी पहचान करने में देरी हो जाती है।5. बार-बार पेशाब आना
बार-बार पेशाब का तेज प्रेशर लगना या ब्लैडर पर महसूस होने वाला दबाव भी ओवेरियन कैंसर का संकेत हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ट्यूमर की वजह से ब्लैडर जैसे आसपास के अंगों पर भी दबाव पड़ने लगता है।6. बेवजह वजन घटना या बढ़ना
वजन घटना या पेट में पानी इकट्ठा होने की वजह से वजन बढ़ना भी इस कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। अगर आपके वजन में अचानक इस तरह का बदलाव आया है तो उसे इग्नोर ना करें और डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।7. लगातार थकान रहना
क्या आप हर वक्त थकान महसूस करती हैं? यह भी ओवेरियन कैंसर का संकेत हो सकता है, इसलिए डॉक्टर से जरूर बात करें। शरीर के अंदरुनी बीमारी के लड़ने की वजह से यह थकान होती है, जो आराम करने के बाद भी कम नहीं होती।
किन महिलाओं को रहता है अधिक खतरा?
ओवेरियन कैंसर किसी भी उम्र की महिला को हो सकता है, लेकिन कुछ फैक्टर से इसका खतरा बढ़ जाता है, जैसे-- 50 से ज्यादा उम्र वाली और खासकर मैनोपॉज के बाद वाली महिला को
- ओवेरियन, ब्रेस्ट या कोलोरेक्टल कैंसर का पारिवारिक इतिहास होने पर
- जेनेटिक म्यूटेशन होने पर, खासतौर से BRCA1 और BRCA2
- कैंसर की पर्सनल हिस्ट्री होने पर
- वक्त से पहले मेंस्ट्रुएशन या काफी देरी से मेनोपॉज होने पर
- कभी गर्भवती ना होने वाली महिलाओं को
जल्दी निदान करना क्यों होता है मुश्किल?
ओवेरियन कैंसर का निदान करने वाला कोई विश्वासजनक स्क्रीनिंग टेस्ट अधिकतर महिलाओं तक उपलब्ध नहीं है। ओवरी पेट के काफी अंदर मौजूद होती हैं, जिसकी वजह से इनमें विकसित होने वाला ट्यूमर अक्सर रूटीन एग्जाम में पता नहीं चलता है।कौन-से टेस्ट करवाने चाहिए?
अगर ऊपर बताए गए ओवेरियन कैंसर के संभावित लक्षण 2-3 हफ्तों से ज्यादा समय तक बने रहते हैं तो मेडिकल टेस्ट करवाना जरूरी हो जाता है। निम्नलिखित टेस्ट ओवेरियन कैंसर का निदान कर सकते हैं।- पेल्विक एग्जामिनेशन - डॉक्टर द्वारा शुरुआती जांच के लिए
- अल्ट्रासाउंड (ट्रांसवजाइनल सोनोग्राफी) - ओवेरी की असामान्यता को देखने के लिए
- CA-125 ब्लड टेस्ट - यह ट्यूमर मार्कर, जो बढ़ जाता है, हालांकि यह स्पेसिफिक नहीं है
- सीटी या एमआरआई स्कैन - ट्यूमर के फैलने की जानकारी देने वाला इमेजिंग टेस्ट
- बायोप्सी या सर्जिकल इवैलुएशन - निदान की पुष्टि करने के लिए
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