Vertigo and Dizziness Causes: वर्टिगो और डिजीनेस एक जैसी समस्या लगती जरूर हैं, लेकिन मेडिकल में इन्हें अलग-अलग बताया गया है। इनके बीच एक बारीक अंतर होता है, जिसे पहचानकर मरीज अपनी परेशानी को ढंग से डॉक्टर को समझा सकता है। इससे मरीज को जल्दी प्रभावी इलाज मिल जाता है। डॉक्टर ने दोनों स्थितियों के बीच का अंतर बताया है।

अक्सर दोनों शब्दों को एक-दूसरे के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दोनों का सही मतलब अलग-अलग होता है। दोनों कंडीशन के कारण और इलाज भी अलग-अलग होते हैं। इसलिए सही इलाज पाने के लिए आपको अपनी समस्या के बारे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। जब आप डॉक्टर को अपनी समस्या आसानी से सटीकता के साथ समझाते हैं तो प्रभावी इलाज जल्दी मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
चक्कर आने और सिर घूमने के बीच का अंतर
चक्कर आना या डिजीनेस एक सामान्य शब्द है, जिसे बेहोशी, कमजोरी, असंतुलन, अस्थिरता या लाइट हेडेडनेस के एहसास के लिए मेडिकल भाषा में इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर, इसके अंदर मूवमेंट का एहसास होना शामिल नहीं होता।
दूसरी तरफ, सिर घूमना या वर्टिगो को मेडिकल भाषा में एक खास प्रकार के चक्कर आने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसके अंदर आपको मोशन या घूमने का झूठा एहसास होता है। इसमें आप और आपके आसपास का माहौल स्थिर होने के बावजूद आपको ऐसा लगता है कि सबकुछ घूम रहा है। इसके पीछे अक्सर अंदरुनी कान या ब्रेन के बैलेंस सेंटर में समस्या होती है।
कुल मिलाकर, अगर कोई असंतुलित हो जाता है, बेहोश हो जाता है या अस्थिर रहता है तो इसे चक्कर आना कहेंगे। लेकिन अगर कोई व्यक्ति स्थिर रहकर बार-बार अस्थिर होने या कुछ घूमने का झूठा एहसास करता है तो इसे सिर घूमना कहा जाएगा।
डिजीनेस के कारण क्या हैं?
डिजीनेस के कई सारे कारण हो सकते हैं, जैसे-- डिहाइड्रेशन -फ्लूइड इनटेक में कमी आने से ब्लड प्रेशर गिर सकता है, जिससे बेहोशी या चक्कर खाकर गिरने का खतरा हो सकता है।
- लो ब्लड शुगर -यह हाइपोग्लाइसेमिया की स्थिति है, जो डायबिटिक या भोजन छोड़ने वालों में ज्यादा देखी जाती है।
- बीपी का अचानक गिरना -इसे पोस्टुरल हाइपोटेंशन कहा जाता है, जो कि अक्सर अचानक और तेजी से खड़े होने पर होता है।
- एनीमिया -हीमोग्लोबिन लेवल की कमी से दिमाग को मिलने वाली ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है।
- स्ट्रेस और एंग्जायटी -इन साइकोलॉजिकल फैक्टर्स की वजह से चक्कर आने जैसे शारीरिक लक्षण भी दिख सकते हैं।
- दवाओं का साइड इफेक्ट -एंटी-हाइपरटेंसिव जैसी कई सारी दवाओं के सेवन से चक्कर आने के मामले देखे जाते हैं।
वर्टिगो के कारण क्या हैं?
वर्टिगो एक खास समस्या है, जिसके पीछे बैलेंस के लिए जिम्मेदार मैकेनिज्म होते हैं।- बिनाइन पेरोक्सीमल पोजिशनल वर्टिगो (BPPV) - यह सबसे आम कारण है, जो सिर की मूवमेंट के साथ शुरू होता है।
- इनर ईयर डिसऑर्डर्स - वेस्टिबुलर न्यूराइटिस या मेनियर डिजीज जैसे कान के अंदरुनी हिस्से से जुड़े विकार।
- माइग्रेन एसोसिएटेड वर्टिगो - माइग्रेन के दौरान कुछ लोगों को वर्टिगो के एपिसोड झेलने पड़ सकते हैं।
- न्यूरोलॉजिकल कंडीशन - स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या ब्रेन ट्यूमर की वजह से, हालांकि यह वजहें आम नहीं होती और इनमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है।
घर पर कैसे बचाव किया जा सकता है?
वर्टिगो या डिजीनेस की हल्की समस्याओं से बचने के लिए कुछ टिप्स अपनाए जा सकते हैं। लेकिन यह केवल हल्की परेशानी या निदान हो चुकी स्थिति में ही अपनाएं।
- पानी का पर्याप्त सेवन करने पर डिहाइड्रेशन के कारण होने वाले डिजीनेस से बचाव किया जा सकता है।
- अगर आप लेटे या बैठे हुए हैं तो धीरे-धीरे खड़े हों।
- अगर आपको सिर घूमने या चक्कर आने का एहसास हो तो तुरंत बैठ या लेट जाएं ताकि गिरने से चोट ना लगे।
- वर्टिगो से बचाव के लिए आसान सी हेड और बैलेंस एक्सरसाइज करें। इसका तरीका जानने के लिए डॉक्टर से बात करें।
- अचानक सिर घुमाने या तेज रोशनी या शोर से बचें।
क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
- एपिसोड आने पर ड्राइविंग या किसी मशीन को ऑपरेट ना करें।
- कैफीन और ऐल्कोहॉल को लिमिट करें, इनसे परेशानी बढ़ सकती है।
- घर को सुरक्षित बनाएं ताकि गिरने का खतरा कम हो। जैसे ढीले पर्दे आदि को हटाना।
- एपिसोड के साथ सिरदर्द, नजर में बदलाव, कमजोरी या बोलने में दिक्कत जैसी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें, यह गंभीर स्थिति का लक्षण हो सकता है।
कैसे होता है इन समस्याओं का इलाज?
- चक्कर आने की समस्या को ठीक करने के लिए इसके पीछे का कारण, जैसे एनीमिया, ब्लड प्रेशर, दवाएं या एंग्जायटी का इलाज करना जरूरी होता है।
- BPPV के लिए maneuvers की रिपोजिशनिंग ट्रेन्ड प्रोफेशनल्स द्वारा की जाती है।
- इनर ईयर इंफेक्शन के लिए एंटीहिस्टामाइन या एंटी-वर्टिगो दवाएं दी जाती है।
- क्रोनिक कंडीशन में वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन थेरेपी की मदद ली जाती है।
- न्यूरोलॉजिकल कारणों में इमेजिंग टेस्ट और स्पेशलाइज्ड ट्रीटमेंट की मदद ली जाती है।
Comments
Post a Comment