छिलकों से 'काला सोना' बनाना है आसान, मटके वाला तरीका, ना जाएगी बदबू ना ही लगेंगे कीड़े
किचन के कचरे को फेंकने के बजाय उसे बगीचे के लिए बेशकीमती खाद में बदलना एक बेहतरीन कला है। 'कैलाश वाटी' द्वारा शेयर किया गया मटके वाला तरीका पर्यावरण और आपके पौधों, दोनों के लिए वरदान साबित हो सकता है। उनके तरीके से खाद बनाना बहुत ही आसान है।

कैलाश वाटी के अनुसार, एक पुराने मटके की मदद से घर पर ही बेहतरीन जैविक खाद तैयार कर सकते हैं। यह तरीका न केवल सस्ता है, बल्कि पूरी तरह से प्राकृतिक भी है। सबसे अच्छी बात है कि उनकी तरकीब से खाद बनाने में बदबू नहीं आएगी और पोषक तत्व भरपूर मिलेंगे। क्योंकि यहां सूखे पत्ते, मिट्टी और किचन के गीले कचरे का सही संतुलन बिठाया जाता है।
मटके की तैयारी और एयर-वेंटिलेशन
खाद बनाने के लिए सबसे पहले एक मीडियम या बड़े आकार का मिट्टी का मटका लें। अब किसी नुकीली चीज या ड्रिल की मदद से मटके के चारों तरफ छोटे-छोटे छेद कर दें। ये छेद बहुत जरूरी हैं क्योंकि खाद बनने की प्रोसेस में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। हवा का संचार होने से कचरा सड़ता नहीं है, बल्कि सही तरीके से डीकंपोज होता है और बदबू नहीं आती।
सूखे पत्तों की पहली परत
मटके के सबसे निचले हिस्से में सूखे पत्तों की एक मोटी परत बिछाएं। सूखे पत्ते कार्बन का मुख्य स्रोत होते हैं और ये किचन वेस्ट से निकलने वाले अतिरिक्त पानी को सोखने का काम करते हैं। यह परत मटके के तल को गीला होने से बचाती है और खाद के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है।
मिट्टी और किचन वेस्ट की लेयरिंग
सूखे पत्तों के ऊपर 1-2 इंच मिट्टी की एक परत डालें। इसके बाद अपने किचन से निकलने वाले छिलके की एक परत बिछाएं। फिर दोबारा मिट्टी डालें और फिर किचन वेस्ट। इस 'सैंडविच' तकनीक को तब तक दोहराते रहें जब तक कि मटका ऊपर तक न भर जाए। ध्यान रहे कि कचरे के टुकड़े जितने छोटे होंगे, खाद उतनी ही जल्दी बनेगी।
गुड़ और लस्सी का जादुई घोल
खाद बनने की प्रोसेस तेज करने के लिए आपको विशेष मिश्रण तैयार करना है। इसके लिए 2 गिलास छाछ में 200 ग्राम गुड़ अच्छी तरह मिला लें। छाछ में मौजूद बैक्टीरिया और गुड़ की मिठास डीकंपोजिशन की प्रोसेस को कई गुना तेज कर देते हैं। इस घोल को धीरे-धीरे भरे हुए मटके के ऊपर डाल दें। यह मिश्रण खाद में नमी बनाए रखेगा और लाभकारी कीटाणुओं को पनपने में मदद करेगा।
क्या डालें और क्या न डालें
इस विधि में सबसे जरूरी बात है कि मटके में कभी भी पकी हुई चीजें जैसे दाल, चावल, पकी हुई सब्जी, तेल या दूध से बनी चीजें न डालें। पका हुआ भोजन डालने से मटके में कीड़े पड़ सकते हैं और बहुत गंदी बदबू आने लगती है। हमेशा केवल कच्चे फलों-सब्जियों के छिलके और डंठल का ही उपयोग करें।
3 महीने में बन जाएगी खाद
मटके को ऊपर से किसी ढक्कन या बोरी से ढककर छायादार जगह पर रख दें। हर 15-20 दिन में एक बार ऊपर की मिट्टी को हल्का सा चला दें ताकि हवा अंदर तक जा सके। लगभग 3 महीने बाद देखेंगे कि सारा कचरा गहरे भूरे या काले रंग के पाउडर में बदल गया है। इसमें से मिट्टी जैसी सोंधी महक आएगी। यही आपका 'काला सोना' है, जिसे छानकर आप अपने पौधों में डाल सकते हैं।
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