दालचीनी, हल्दी, राख और चायपत्ती... इन 4 फ्री की चीजों को पौधों में कैसे डालें? माली ने बताया इस्तेमाल का तरीका और बेहतरीन फायदे

 

घर के पौधों को हरा-भरा रखने और कीड़ों से बचाने के लिए महंगे केमिकल वाले फर्टिलाइजर की जरूरत नहीं है। गार्डनिंग एक्सपर्ट के मुताबिक रसोई में मौजूद 4 फ्री की चीजें—दालचीनी, हल्दी, लकड़ी की राख और बची हुई चायपत्ती, पौधों के लिए बहुत काम की है बस आपको सही तरीके से इस्तेमाल करना होगा।

benefits and right way to use haldi Cinnamon rakh and tea leaves in plant

पेड़-पौधों से घर और बगीचे की खूबसूरती दोगुनी हो जाती है, लेकिन इनकी सही देखभाल करना किसी चुनौती से कम नहीं है। अक्सर लोग पौधों को हरा-भरा रखने और कीड़ों से बचाने के लिए बाजार से महंगे-महंगे केमिकल वाले फर्टिलाइजर और कीटनाशक खरीदकर लाते हैं। ये केमिकल कुछ समय के लिए तो असर दिखाते हैं, लेकिन लंबे समय में पौधे की मिट्टी को बंजर बना देते हैं।

ऐसे में गार्डनिंग एक्सपर्ट का कहना है कि पौधों को हेल्दी और चमकदार बनाए रखने का राज रसोई में ही छुपा है। घर में मौजूद 4 ऐसी चीजें—दालचीनी, हल्दी, राख और चायपत्ती, जो लगभग फ्री की हैं क्योंकि यह हमारी किचन में रहती है इन्हें अलग से खरीदने की जरूरत नहीं है। तो चलिए जानते हैं इन चारों चीजों को पौधों में डालने का सही तरीका, इनके फायदे और इन्हें किन पौधों पर इस्तेमाल करना चाहिए।

हल्दी- मिट्टी से फंगस को रखे दूर

हल्दी- मिट्टी से फंगस को रखे दूर

पौधे के गमले की मिट्टी की ऊपरी परत पर आधा से एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर छिड़क दें। इसके बाद खुरपी से मिट्टी की हल्की गुड़ाई कर दें ताकि हल्दी मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाए। चाहें तो गुड़ाई करने के बाद मिट्टी को कुछ घंटों के लिए ऐसे ही छोड़ दें और फिर पानी डालें।



फायदे- दरअसल हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं। यह मिट्टी में पनपने वाले हानिकारक फंगस, दीमक और हानिकारक कीड़ों को जड़ से खत्म कर देती है। अगर पौधे की छंटाई की है, तो कटे हुए हिस्से पर हल्दी का लेप लगाने से वहां फंगस नहीं लगती। इसका इस्तेमाल सभी प्रकार के इनडोर और आउटडोर पौधों जैसे- मनी प्लांट, तुलसी, गुलाब, एलोवेरा और मिर्च या टमाटर के पौधों पर बेझिझक कर सकते हैं।

चायपत्ती- पौधों को मिलेगी भरपूर नाइट्रोजन

चायपत्ती- पौधों को मिलेगी भरपूर नाइट्रोजन

इस्तेमाल की हुई चायपत्ती को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। अब आधा लीटर पानी में 3 चम्मच यह सूखी चायपत्ती डालकर 4 दिनों के लिए किसी छायादार जगह पर ढककर रख दें। 4 दिन बाद इस पानी को छान लें, इसमें थोड़ा और सादा पानी मिलाकर पौधों की जड़ों में डालें।

फायदे- चायपत्ती में प्रचुर मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम होता है, जो पौधों की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है। यह मिट्टी को हल्का अम्लीय बनाती है, जिससे पौधों में ज्यादा कलियां और फूल आते हैं। इसका इस्तेमाल एसिडिक मिट्टी पसंद करने वाले पौधे जैसे कि गुलाब, मोगरा, गुड़हल, गार्डेनिया और सभी प्रकार के फूलों वाले पौधों में कर सकते हैं।

दालचीनी- चींटियों और मच्छरों का काम तमाम

दालचीनी- चींटियों और मच्छरों का काम तमाम

एक छोटा चम्मच दालचीनी पाउडर लें और उसे गमले की मिट्टी के चारों तरफ छिड़क दें। इसके बाद बहुत हल्की गुड़ाई कर दें। ध्यान रहे, दालचीनी डालने के तुरंत बाद पौधों में पानी नहीं देना है, वरना इसका असर कम हो जाएगा।

फायदे- दालचीनी की तेज गंध चींटियों, सफेद मक्खियों और मिट्टी में पनपने वाले छोटे मच्छरों को बिल्कुल पसंद नहीं होती। इसे डालते ही चींटियां गमला छोड़कर भाग जाती हैं। साथ ही, यह छोटे पौधों को 'डैम्पिंग ऑफ' नामक फंगल बीमारी से बचाती है। इसे आप उन पौधों में जरूर डालें जहां चींटियों का आतंक ज्यादा होता है। जैसे कि तुलसी, पुदीना, नींबू, अमरूद और अन्य इनडोर और औषधीय पौधे।

लकड़ी- नेचुरल पोटेशियम बूस्टर

लकड़ी- नेचुरल पोटेशियम बूस्टर

आप सूखी लकड़ी या कंडे की राख को दो तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। एक मुट्ठी राख मिट्टी पर छिड़क कर गुड़ाई कर दें, या फिर इसे पानी में घोलकर पौधों में डालें। ध्यान रहे, इसका इस्तेमाल 2 से 3 महीने में केवल एक बार ही करना है।

फायदे- राख में पोटेशियम और कैल्शियम भारी मात्रा में होता है, जो पौधों के तनों को मजबूत बनाता है और फलों-सब्जियों का साइज बढ़ाता है। यह मिट्टी के पीएच लेवल को भी मेंटेन करती है और पत्तों को खाने वाले कीड़ों को दूर रखती है। राख का इस्तेमाल टमाटर, बैंगन, आलू, शिमला मिर्च और लौकी-तोरई जैसी बेल वाली सब्जियों के लिए बहुत फायदेमंद है। फूलों में इसे गेंदा और गुड़हल पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी?

किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी?

इन फ्री की चीजों का फायदा तभी मिलेगा जब आप सही मात्रा का ध्यान रखेंगे। चायपत्ती हमेशा बिना चीनी-दूध वाली ही इस्तेमाल करें, नहीं तो मिट्टी में फंगस या चींटियां बढ़ सकती हैं। इसी तरह, राख का इस्तेमाल बहुत ज्यादा न करें, क्योंकि अत्यधिक राख मिट्टी को बहुत अधिक क्षारीय बना सकती है, जिससे कुछ पौधों की ग्रोथ रुक सकती है।

गार्डनिंग एक्सपर्ट की टिप्स

मौसम के हिसाब से करें बदलाव

मौसम के हिसाब से करें बदलाव

गर्मियों के मौसम में दालचीनी और हल्दी का इस्तेमाल पौधों को ठंडक और सुरक्षा देता है, जबकि चायपत्ती का लिक्विड फर्टिलाइजर तेज धूप में भी पौधों को झुलसने से बचाता है और उन्हें हरा-भरा रखता है। बरसात के दिनों में हल्दी और दालचीनी का पाउडर मिट्टी को अत्यधिक नमी के कारण सड़ने से बचाता है।

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