वेट लॉस का ये तरीका पित्त की थैली कर सकता है डैमेज, सीने में लगने लगेगा 'पत्थरों का ढेर'

 

वेट लॉस हेल्दी रहने के लिए जरूरी है। मोटापे के कारण अनेक समस्याएं होती हैं। लेकिन वजन कम करने के लिए बहुत तेज व गंभीर तरीकों से गॉल ब्लैडर को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए धीरे-धीरे और हेल्दी रूप से वेट लॉस करना चाहिए। वजन कम करने के साथ ही पाचन तंत्र को हेल्दी रखना भी जरूरी है।

gall bladder stone
शरीर को फिट रखने के लिए आजकल लोग अक्सर क्रैश डाइट पर चले जाते हैं। अच्छा दिखने की चाहत पूरा करने का यह तरीका स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। क्रैश डाइट या इससे वेट लॉस के बाद लोगों में गॉल ब्लैडर की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। तेजी से वजन घटने पर बाइल का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे गॉलस्टोन एवं गॉल ब्लैडर में सूजन होने का खतरा बढ़ जाता है। वजन घटाना स्वास्थ्य के लिए तभी ठीक होता है, जब यह एक हेल्दी तरीके से किया जाए।

नई दिल्ली के द्वारका से मणिपाल हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी कंसल्टेंट डॉक्टर सार्थक मलिक ने बताया कि गॉल ब्लैडर एक छोटा सा नाशपाती के साइज का अंग होता है। इसमें लिवर से निकलने वाला बाइल जूस स्टोर होकर गाढ़ा होता है। यह अंग सिकुड़कर छोटी आंत में बाइल जूस छोड़ता है, जो खाने में मौजूद फैट को तोड़ने में मदद करता है। बाइल जूस के बहुत अधिक गाढ़ा होने पर गॉल ब्लैडर ठीक से खाली नहीं हो पाता और गॉल स्टोन बन जाते हैं। यह पत्थर सीने के पास मौजूद पित्त की थैली में होते हैं।

कब होता है वेट लॉस से खतरा?

कब होता है वेट लॉस से खतरा?

डॉक्टर सार्थक का कहना है कि वेट लॉस से गॉल ब्लैडर की समस्याएं होने का खतरा तब होता है, जब व्यक्ति एक सप्ताह में 1 से 1.5 किलो वजन कम करता है। इतना वजन खासकर तब कम होता है, जब क्रैश डाइट या वजन घटाने का तरीका किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ना हो।

ज्यादा कोलेस्ट्रॉल और गॉल स्टोन

ज्यादा कोलेस्ट्रॉल और गॉल स्टोन

क्रैश डाइट की वजह से शरीर बहुत स्पीड में फैट तोड़ता है, जिससे बाइल में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल निकलता है। इस कोलेस्ट्रॉल से बाइल गाढ़ा हो जाता है। दूसरा यह है कि जब बाइल बहुत ज्यादा लंबे समय तक गाढ़ा रहे तो कोलेस्ट्रॉल के क्रिस्टल बनने शुरू हो जाते हैं। जो कि बाद में गॉल स्टोन बन जाते हैं।

सूजन और संकुचन कम होना

सूजन और संकुचन कम होना

जब आप डाइट में बहुत कम फैट कर देते हैं तो गॉल ब्लैडर को संकुचन यानी सिकुड़ने में दिक्कत होती है। इसकी वजह से बाइल पित्त की थैली में ही फंसा रह जाता है। इसके अलावा जब पथरी से ब्लॉकेज हो जाती है तो पित्त की थैली में तेज दर्द, इंफेक्शन, पाचन की दिक्कत और सूजन हो सकती है।

क्या होते हैं लक्षण?

क्या होते हैं लक्षण?
  • पेट के ऊपरी दाईं तरफ सीने के पास दर्द
  • भोजन के बाद जी मिचलाना
  • अपच महसूस होना
  • बुखार या कभी पीलिया
  • पेट फूलना​

इलाज कैसे होता है?

इलाज कैसे होता है?

गॉल ब्लैडर की समस्याओं का ट्रीटमेंट डाइट में सुधार करके कर सकते हैं। गंभीर स्थिति में सर्जरी भी की जा सकती है। लेकिन नॉर्मल केस में डॉक्टर केवल डाइट में बदलाव करके कुछ दवाओं की सलाह देते हैं। अगर दिक्कत बार बार हो रही है या गंभीर है तो लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी की जा सकती है। इसलिए डॉक्टर को दिखाना जरूरी है ताकि सही इलाज मिल सके।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है

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