डायबिटीज का नया इलाज: सिर्फ 2 घंटे में खत्म होगी डायबिटीज, AIIMS डॉक्टरों ने किया कारनामा, दवाओं का टंटा भी खत्म
एम्स दिल्ली के डॉक्टरों के शोध में सामने आया है कि मात्र दो घंटे की खास मेटाबॉलिक सर्जरी से टाइप-2 डायबिटीज को तेजी से कंट्रोल किया जा सकता है और कई मरीजों की दवाइयां तुरंत बंद हो जाती हैं।

एसोसिएट प्रोफेसर, जनरल सर्जरी, किडनी ट्रांसप्लांटेशन सर्जरी, और वैस्कुलर सर्जरी, एम्स दिल्ली ने बताया (ref) कि इस शोध के अनुसार, मात्र दो घंटे की एक खास मेटाबॉलिक सर्जरी टाइप-2 डायबिटीज को काफी हद तक ठीक कर सकती है। डॉक्टर ने इस शोध के बारे में विस्तार से बताया है।
डायबिटीज क्यों खतरनाक है?
डॉक्टर ने बताया कि भारत अब डायबिटीज की भी राजधानी बन चुका है। शुगर कंट्रोल का सही पैमाना HbA1c टेस्ट है। अगर HbA1c सालों तक 8 के आसपास रहे तो लगभग 8 साल में किडनी फेलियर, हार्ट अटैक या आंखों के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। HbA1c 12 होने पर 6 साल से भी कम समय में बड़े अंग फेल हो सकते हैं, जबकि 6.5 रहने पर यह खतरा लगभग 15 साल बाद होता है।
कैसी होती है यह मेटाबॉलिक सर्जरी?
यह सर्जरी लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की जाती है, जिसमें पेट पर छोटे-छोटे छेद बनाकर प्रक्रिया की जाती है। इसी वजह से इसे आम भाषा में 'बटन होल सर्जरी' भी कहा जाता है। इस सर्जरी का नाम मिनी गैस्ट्रिक बायपास या वन-अनास्टोमोसिस गैस्ट्रिक बायपास है। इसमें पेट के ऊपरी हिस्से का एक छोटा सा भाग काटकर लगभग 100 ml का गैस्ट्रिक पाउच बनाया जाता है और आंत के करीब 160-200 सेमी हिस्से को बायपास कर दिया जाता है।
इसके बाद खाना सीधे छोटी आंत में पहुंचता है, जिससे GLP-1 जैसे अच्छे हार्मोन बढ़ जाते हैं और घरेलिन, लेप्टिन, ग्लूकैगॉन जैसे खराब हार्मोन कम हो जाते हैं। इन हार्मोनल बदलावों की वजह से शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग करने लगता है और शुगर बहुत तेजी से कंट्रोल हो जाती है।
सर्जरी का असर और दो घंटे बाद दवाइयां बंद
डॉक्टर ने बाया कि इस सर्जरी में लगभग 2 घंटे लगते हैं। एम्स के प्रोटोकॉल के अनुसार मरीज को बुधवार को भर्ती किया जाता है, शुक्रवार को सर्जरी की जाती है। उसी शाम उसकी डायबिटीज की सभी दवाइयां बंद कर दी जाती हैं क्योंकि शुगर तुरंत नीचे आने लगती है। डॉक्टरों के अनुसार, अधिकतर मरीजों की शुगर अगले ही दिन सामान्य स्तर पर पहुंच जाती है।
किस उम्र में की जा सकती है यह सर्जरी?
वर्ल्ड गाइडलाइंस के अनुसार 18 से 65 साल की उम्र वाले मरीजों को ही इस सर्जरी की सलाह दी जाती है, हालांकि भारत में 65-80 साल के कुछ मरीजों ने भी आवेदन किया है, जिनके लिए अतिरिक्त अनुमति लेनी पड़ती है। 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर यह सर्जरी नहीं की जाती। यह सर्जरी केवल टाइप-2 डायबिटीज वाले मरीजों के लिए है, टाइप-1 डायबिटीज में इसका उपयोग नहीं किया जाता।
सर्जरी का खर्च कितना?
एम्स दिल्ली में यह सर्जरी पूरी तरह मुफ्त की जा रही है जबकि बाहर प्राइवेट हॉस्पिटल में इसी प्रक्रिया पर भारी खर्च आता है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी पर लगभग 3-4 लाख रुपये और रोबोटिक सर्जरी पर करीब 5-6 लाख रुपये तक। डॉक्टर बताते हैं कि यह खर्च उन खर्चों से कम है जो अनकंट्रोल्ड डायबिटीज के कारण होते हैं- जैसे डायलिसिस, हार्ट सर्जरी, स्टेंट, लेजर, या अंग कटने तक की नौबत।
शोध में क्या निकला?
एम्स ने अब तक 35 मरीजों पर यह सर्जरी की है और सभी मरीजों की डायबिटीज की दवाइयां सर्जरी के तुरंत बाद बंद कर दी गईं। सर्जरी के बाद ये मरीज अब सामान्य, स्वस्थ और पहले से बेहतर जीवन जी रहे हैं। ऐसे नतीजे बताते हैं कि यह शोध डायबिटीज से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद बन सकता है।
शुगर के मरीजों को बड़ी राहत
डायबिटीज से परेशान लोगों के लिए यह रिसर्च एक बड़ी राहत है। सालों तक दवाइयों और इंसुलिन के सहारे रहने वाले मरीज सिर्फ दो घंटे की सर्जरी से न सिर्फ शुगर कंट्रोल कर पा रहे हैं बल्कि कई बार दवाओं से भी छुटकारा पा लेते हैं। एम्स की यह खोज आने वाले समय में डायबिटीज के इलाज में एक बड़ी क्रांति ला सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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